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भाजपा नेता की धमकी के बाद असम विश्वविद्यालय में बिना इज़ाज़त प्रदर्शन पर पाबंदी

नागरिकता संशोधन विधेयक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन असम में जारी है. प्रदर्शनों में मुख्य रूप से छात्र-छात्राएं शामिल हैं. भाजपा नेता प्रदीप दत्ता रॉय ने धमकी दी थी कि छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने आए हैं तो वही करें, राजनीति में न शामिल हों.

असम विश्वविद्यालय (फोटो साभार: picswe.com)

असम विश्वविद्यालय (फोटो साभार: picswe.com)

गुवाहाटी: असम में बराक घाटी के असमिया भाषी छात्र-छात्राओं के असम विश्वविद्यालय में दाख़िले पर रोक लगाने की भाजपा नेता प्रदीप दत्ता रॉय की धमकी के एक दिन बाद संस्थान के अधिकारियों ने शनिवार को कैम्पस के अंदर बगैर इज़ाज़त के होने वाले प्रदर्शनों पर पाबंदी लगा दी.

हालांकि, नागरिकता संशोधन विधेयक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन समूचे असम में जारी है. यह प्रदर्शन मुख्य रूप से छात्र-छात्राओं द्वारा किया जा रहा है.

असम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. संजीव भट्टाचार्य ने एक आदेश में यह कहा है कि अधिकारियों की पूर्व इज़ाज़त के बगैर कैम्पस में कोई जुलूस/धरना या किसी तरह का जमावड़ा नहीं होगा. अगले आदेश तक इन गतिविधियों पर सख़्त पाबंदी है.

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. इसे कुलपति की मंज़ूरी के साथ जारी किया गया है.

दत्ता को शुक्रवार को स्थानीय समाचार चैनलों पर यह कहते सुना गया, ‘मैं विश्वविद्यालय के असमिया भाषी छात्रों को चेतावनी देता हूं कि वे राजनीति में शामिल नहीं हों.’

इंसाइड-एनई वेबसाइट के मुताबिक प्रदीप दत्ता रॉय ने अपने बयान में कहा था, ‘कुछ खिलोंजिया (मूल निवासी) छात्र-छात्राएं असम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं, जहां मैंने ऑल कछार-करीमगंज-हैलाकांडी स्टूडेंट्स यूनियन (एसीकेएसएचए) के तहत 10 सालों तक प्रदर्शन किया है. अमसिया स्टूडेंट्स यूनियन इस विधेयक का विरोध कर रही है जिसकी आलोचना की जानी चाहिए.’

उन्होंने कहा था, ‘जो छात्र-छात्राएं विधेयक का विरोध कर रहे हैं उन पर कार्रवाई करने के लिए मैं कुलपति से मिला हूं. मैंने असमी छात्र-छात्राओं को चेतावनी दी है कि आप लोग यहां पढ़ाई के लिए आए हैं तो वही करें, राजनीति में शामिल होने की ज़रूरत नहीं, वरना मुझे विश्वविद्यालय में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.’

गौरतलब है कि बीते गुरुवार को छात्र-छात्राओं के एक समूह ने विधेयक का समर्थन किया था जबकि दूसरे समूह ने इसका विरोध करते हुए बुधवार को ‘कैंडल मार्च’ निकाला था.

दत्ता के बयान की विभिन्न हलकों द्वारा निंदा की गई है.

गुवाहाटी की कॉटन यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन ने साम्प्रदायिक रूप से उकसाने वाला बयान देने को लेकर यहां दत्ता के ख़िलाफ़ पान बाज़ार पुलिस थाना में एक शिकायत दर्ज कराई है.

इस बीच, गुवाहाटी में विधेयक का विरोध जारी है.

नलबारी कॉलेज और नलबारी कॉमर्स कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का पुतला फूंका.

सोनोवाल के निर्वाचन क्षेत्र माजुली स्थित माजुली कॉलेज में छात्र-छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया.

नार्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ने शनिवार को राज्य में काला दिवस मनाया.

साथ ही, ख़बरों के मुताबिक आईआईटी बॉम्बे में पढ़ाई कर रहे पूर्वोत्तर के छात्र-छात्राओं ने भी कैम्पस में एक रैली निकाली और विधेयक का विरोध किया.

गौरतलब है कि यह विधेयक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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