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भीमा-कोरेगांव: आरोपी हिंदूवादी नेता मिलिंद एकबोटे को रैलियां करने, मीडिया से बातचीत की छूट

पुणे की एक अदालत ने कुछ शर्तों के साथ मिलिंद एकबोटे को राहत दी है. हिंसा के संबंध में एक दलित महिला द्वारा शिकायत के बाद एससी/एसटी एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

मिलिंद एकबोटे. (फोटो: फेसबुक)

मिलिंद एकबोटे. (फोटो: फेसबुक)

पुणे: भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी हिंदूवादी नेता मिलिंद एकबोटे को पुणे की एक अदालत ने सोमवार को पुलिस स्टेशन में साप्ताहिक उपस्थिति, सार्वजनिक रैलियों में बोलने और मीडिया से बात करने की शर्तों में छूट देकर राहत दी.

आरोपी मिलिंद एकबोटे को एक दलित महिला अनीता सावले द्वारा दर्ज शिकायत के बाद एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था. एक अन्य हिंदुत्व नेता संभाजी भिड़े एफआईआर में सह-आरोपी है.

भिड़े को सबूतों के अभाव की वजह से कभी गिरफ्तार नहीं किया गया. वहीं एकबोटे को 14 मार्च, 2018 को पुणे ग्रामीण पुलिस ने गिरफ्तार किया था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी.

हालांकि, अदालत ने बाद में उन्हें 4 अप्रैल, 2018 को जमानत पर रिहा कर दिया था, इस शर्त पर कि वह हर सोमवार को संबंधित पुलिस स्टेशन को रिपोर्ट करेंगे, इस मामले में गवाहों पर दबाव नहीं डालेंगे, अपना पासपोर्ट पुलिस को सौंपे, मीडिया से बात न करें और कोई भी सार्वजनिक रैली को संबोधित नहीं करेंगे.

इस बीच, पुलिस ने सहायक पुलिस निरीक्षक नितिन शिवाजी लाकड़े द्वारा दर्ज एक अन्य मामले में एकबोटे को गिरफ्तार किया, जो 1 जनवरी को हुई हिंसा के दौरान घायल हो गए थे.

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उन्हें 19 अप्रैल को जमानत मिली और यरवडा जेल से रिहा कर दिया गया. इसके बाद लगभग चार महीने पहले, एकबोटे ने अपने वकीलों एसके जैन और अमोल डांगे के माध्यम से अदालत के समक्ष एक आवेदन दायर किया था, जिसमें पुलिस स्टेशन में उपस्थिति के बारे में शर्तों में छूट देने और सार्वजनिक रैलियों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों में बोलने पर प्रतिबंध हटाने की मांग की गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अभियोजन पक्ष के साथ-साथ सावले और और एक अन्य पीड़ित भीमाबाई का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील तुलेव जितेंद्र कांबले और सुरेंद्र जनराव ने एकबोटे के आवेदन का विरोध इस आधार पर किया था कि उनके खिलाफ गंभीर अपराध करने आरोप है और अभी भी आरोप पत्र दायर नहीं किया गया है. जांच जारी है और इन शर्तों में ढील देने से भीमा-कोरेगांव पूछताछ आयोग का काम बाधित हो सकता है.

हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एएन सिरसिकर ने एकबोटे के पक्ष में आदेश पारित किया. अदालत ने कहा कि एकबोटे को हर सोमवार को शिकरपुर पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर तुरंत मौजूद होने का निर्देश दिया है.