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जेएनयू राजद्रोह: आरोप-पत्र दाख़िल करने में देरी पर पुलिस ने कहा- सबूत जमा करने में वक़्त लगा

दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने सरकार के ख़िलाफ़ नफ़रत और असंतोष भड़काने के लिए भारत विरोधी नारे लगाए थे.

उमर ख़ालिद और कन्हैया कुमार. (फोटो: पीटीआई)

उमर ख़ालिद और कन्हैया कुमार. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) राजद्रोह मामले में करीब तीन साल बाद आरोप पत्र दाख़िल करने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही दिल्ली पुलिस ने स्पष्टीकरण दिया है. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि आमतौर पर इस तरह के मामलों में वक्त लग जाता है क्योंकि इसके तहत देशभर में जांच की गई और बहुत सारे रिकॉर्ड और सबूत जमा किए गए.

पुलिस ने सोमवार को दिल्ली के एक अदालत में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ 1,200 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया और कहा कि वे परिसर में एक कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे थे और उन पर 9 फरवरी, 2016 में विश्वविद्यालय परिसर में देश विरोधी नारों का समर्थन करने का आरोप है.

कन्हैया कुमार और अन्य ने आरोप-पत्र दाखिल करने में देर करने पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आम चुनाव के ठीक पहले ऐसा किए जाने के पीछे राजनीतिक निहितार्थ हैं.

हालांकि जांच टीम के एक प्रमुख सदस्य ने कहा कि इसमें देर नहीं हुई है क्योंकि ऐसे मामलों में आमतौर पर इतना वक्त लग जाता है. उन्होंने कहा, ‘जांच का दायरा देशभर में फैला हुआ था. बहुत सारे सबूत इकट्टा करने थे, जिनमें आरोपियों और संदिग्धों तथा गवाहों के बयान भी शामिल थे.’

उन्होंने बताया कि मामले के आरोपियों/संदिग्धों और गवाहों से पूछताछ में ज्यादा वक्त लगा.

मालूम हो कि दिल्ली पुलिस ने जेएनयू परिसर में नौ फरवरी 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने के लिए कन्हैया कुमार समेत पूर्व छात्रों- उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को भी आरोपी बनाया है.

यह कार्यक्रम संसद हमला मामले के मास्टरमाइंड अफज़ल गुरु को फांसी की बरसी पर आयोजित किया गया था.

भाजपा के सांसद महेश गिरी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की शिकायत पर वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस थाने में 11 फरवरी, 2016 को अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए तथा 120बी के तहत एक मामला दर्ज किया गया था.

एबीवीपी ने कथित आयोजन को ‘राष्ट्र विरोधी’ बताते हुए शिकायत की थी जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी अनुमति रद्द कर दी थी. इसके बावजूद यह आयोजन हुआ था.

कन्हैया ने सरकार के ख़िलाफ़ नफरत और असंतोष भड़काने के लिए भारत विरोधी नारे लगाए थे: दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली की एक अदालत के समक्ष दावा किया है कि जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व नेता कन्हैया कुमार ने सरकार के ख़िलाफ़ नफ़रत और असंतोष भड़काने के लिए 2016 में भारत विरोधी नारे लगाए थे. अदालत इस मामले में दाख़िल आरोप-पत्र पर 19 जनवरी को विचार करेगी.

पुलिस ने आरोप-पत्र में कई गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा है कि नौ फरवरी 2016 को विश्वविद्यालय परिसर में कन्हैया प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे थे और काफी संख्या में अज्ञात लोग नारेबाज़ी कर रहे थे.

आरोप-पत्र के मुताबिक गवाहों ने यह भी कहा कि कन्हैया घटनास्थल पर मौजूद थे जहां प्रदर्शनकारियों के हाथों में अफजल के पोस्टर थे. अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया ने सरकार के ख़िलाफ़ नफ़रत और असंतोष भड़काने के लिए खुद ही भारत विरोधी नारे लगाए थे.

इसमें कहा गया है कि एजेंसी ने जिन साक्ष्यों को शामिल किया है उनमें जेएनयू की उच्चस्तरीय कमेटी, जेएनयू के कुलसचिव भूपिंदर जुत्सी का बयान और मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग (जिसमें कुमार को कार्यक्रम के रद्द होने को लेकर बहस करते सुना गया) शामिल है.

इसमें कहा गया है, ‘कन्हैया ने उनसे (जुत्सी) यह भी कहा कि इज़ाज़त के बगैर भी कार्यक्रम करेंगे.’

पुलिस ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के बारे में कहा कि उन्होंने भी भारत विरोधी नारे लगाए थे.

आरोप-पत्र में कहा गया है कि कई वीडियो में उमर ख़ालिद को नारे लगाते देखा गया है जिससे उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है. उसके मोबाइल फोन की लोकेशन का भी बतौर साक्ष्य इस्तेमाल किया गया.

रामा नागा के बारे में आरोप-पत्र में कहा गया है कि उसने आरएसएस के ख़िलाफ़ भाषण दिए थे.