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गुजरात: फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों की मांग, अफसरों-नेताओं की भूमिका की जांच हो

गुजरात में वर्ष 2002 से 2006 के बीच कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में तीन लोगों मार दिए गए थे. पीड़ित परिवारों के वकील ने कहा कि जस्टिस बेदी आयोग की रिपोर्ट यह बताती है कि किन पुलिसकर्मियों ने पीड़ितों की हत्या की लेकिन उनके आकाओं, जो आईपीएस अधिकारी और भाजपा नेता हो सकते हैं उनके बारे में कुछ बात नहीं कहती.

(फोटो साभार: ट्विटर)

(फोटो साभार: ट्विटर)

अहमदाबाद: गुजरात में वर्ष 2002 से 2006 के बीच कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए तीन लोगों के परिवार के सदस्यों ने बुधवार को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और तत्कालीन शीर्ष नेताओं की भूमिका की जांच की मांग की.

उन्होंने कहा कि जस्टिस एचएस बेदी आयोग ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और तत्कालीन शीर्ष नेताओं की भूमिका की जांच नहीं की. उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत समिति को शीर्ष नेताओं की भूमिका की जांच का निर्देश दे.

मालूम हो कि उस वक़्त गुजरात में भाजपा की सरकार थी और नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए समीर ख़ान पठान, हाजी इस्माइल और कासिम जफ़र के परिवारवालों ने मामले की गहराई से जांच की मांग की है. समीर ख़ान पठान और हाजी इस्माइल दो अलग-अलग घटनाओं में मारे गए थे, जबकि कासिम जफ़र कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की पिटाई से मारे गए थे.

परिवारवालों का कहना है, ‘जस्टिस बेदी आयोग की ओर से दी गई रिपोर्ट सिर्फ उन अधिकारियों की ओर इशारा करती है जिन्होंने हत्याओं को अंजाम दिया लेकिन उन लोगों के बारे में कुछ नहीं कहती जिन्होंने हत्या करने का निर्देश दिया.’

समीर के पिता सरफ़राज़ ख़ान उनकी दो बेटियों, हाजी इस्माइल की जामनगर में रहने वाली पत्नी खतीजा अपने पोते मेहराब और कासिम जफ़र की मुंबई में रहने वाली पत्नी मरियम बीबी अपनी जुड़वां बेटियों के साथ बुधवार को अहमदाबाद आए हुए थे.

अहमदाबाद में वकील आनंद याग्निक के दफ़्तर पर इन लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मामले में आगे की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने का आग्रह किया.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में याग्निक ने बताया कि वह यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाएंगे. उन्होंने कहा कि जस्टिस बेदी आयोग की रिपोर्ट यह बताती है कि किन पुलिसकर्मियों ने पीड़ितों की हत्या की लेकिन उनके आकाओं, जो आईपीएस अधिकारी और भाजपा नेता हो सकते हैं उनके बार में कोई बात नहीं कहती.

63 वर्षीय खतीजा कहती हैं, ‘मेरे पति हाजी इस्माइल और बेटे महबूब को पुलिस अधिकारी अभय चुड़ास्मा और दूसरे अधिकारी घर से बहुत दूर ले गए. मैंने जस्टिस बेदी आयोग के समक्ष यह जानकारी दी थी. मेरा बेटा वापस आ गया था लेकिन मेरे पति को पुलिस अधिकारियों ने फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मार दिया.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2005 में हाजी इस्माइल को वलसाड के उमरगाम में कथित तौर पर फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया गया था. एफआईआर में 20 गोलियां मारे जाने की बात दर्ज है. पांच राउंड फायर इंस्पेक्टर केजी इरडा, दो राउंड सब इंस्पेक्टर एलबी मोनपारा, चार राउंड जेएम यादव, पांच राउंड एसके शाह और चार राउंड एसआई व्यास ने किया था. जस्टिस बेदी आयोग ने पाया कि था कि यह एनकाउंटर फ़र्ज़ी था.

आरोपों को लेकर वडोदरा रेंज के इंस्पेक्टर जनरल चुड़ास्मा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘यह आधारहीन आरोप है. तब मैं पुलिस अधीक्षक था लेकिन मेरा इस मामले से कोई संबंध नहीं. यह झूठ है.’

चुड़ास्मा सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में भी आरोपी रहे हैं, हालांकि विशेष सीबीआई अदालत ने उन पर लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.

पीड़ित समीर के पिता सरफ़राज़ ख़ान पठान ने अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के तत्कालीन प्रमुख डीजी वंज़ारा, पीपी पांडेय और अन्य की भूमिकाओं की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच इसके राजनीतिक पहलुओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए. पठान ने सरकार से एक करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग की है. उनके बेटे को साल 2002 में मार दिया गया था.

पठान के वकील याग्निक ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह राज्य मंत्रालय और दूसरे ज़िम्मेदार अधिकारियों की जांच होनी चाहिए.’

मुंबई में रहने वाली मरियम बीबी ने भी एक करोड़ रुपये की मांग की है ताकि वह अपनी चार बेटियों और बेटे की शादी कर सके. उन्होंने बताया कि उनके पति कासिम जफ़र अहमदाबाद में एक धार्मिक यात्रा पर थे जब उन्हें अहमदाबाद पुलिस ने उठा लिया. इसके अगले दिन वह मृत अवस्था में पाए गए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)