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2002 के दंगों के बाद बिगड़ी छवि को सुधारने में मददगार रहा वाइब्रेंट गुजरात: विजय रूपाणी

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि हर वाइब्रेंट समिट में विदेशी निवेशकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. हर निवेश यह साबित करता है कि गुजरात ने अपनी छवि बरकरार रखी है.

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गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी. (फोटो साभार: ट्विटर)

गांधीनगर: तीन दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात समिट के नौंवे सत्र का रविवार को समापन हो गया. इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात समिट के सफल प्रयोग ने 2001 के कच्छ भूकंप और 2002 के गोधरा दंगों के बाद खराब हुई गुजरात की छवि को सुधारने में मदद की.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को श्रेय देते हुए रूपाणी ने कहा, ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट के सफल प्रयोग के कारण ही गुजरात देश के विकास का इंजन बन सका.’

उन्होंने कहा कि 2001 में आए भूकंप और 2002 में हुए दंगों को याद कीजिए. लोगों के एक समूह ने पूरे गुजरात को बदनाम करने की कोशिश की. लेकिन वाइब्रेंट समिट के कारण गुजरात दोबारा खुद को स्थापित करने में सफल रहा.

रूपाणी ने कहा, ‘उस समय लोग सोचते थे कि कच्छ फिर से नहीं खड़ा हो पाएगा. लोगों का मानना था कि गोधरा के बाद दुनियाभर में गुजरात की खराब हुई छवि के बाद यहां निवेश के लिए कोई विदेशी नहीं आएगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन आज हम देख सकते हैं कि हर वाइब्रेंट गुजरात समिट में विदेशी निवेशकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. पूरी दुनिया गुजरात का अभिवादन करते हुए इस वाइब्रेंट समिट से जा रही है. वे केवल तभी निवेश करते हैं जब उन्हें विश्वास और स्थिरता का भरोसा होता है. हर निवेश यह साबित करता है कि गुजरात ने अपनी छवि बरकरार रखी है.’

10 दिसंबर, 2018 को राज्य के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, 2003 से हो रही इस समिट के पिछले आठ सत्रों में गुजरात में 13,45,873 करोड़ का निवेश आया और इससे 23,67,000 नौकरियों के अवसर पैदा हुए.

समिट के लिए आने वाले विदेशी निवेशकों की बढ़ती संख्या के अलावा सहयोगी देशों के रूप में आने वाले देशों की संख्या भी इस साल बढ़कर 15 हो गई.