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महान लोगों की याद में स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाएं, न कि स्मारक या प्रतिमा: मद्रास हाईकोर्ट

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता का मरीना बीच पर बन रहे स्मारक के ख़िलाफ़ दायर की गई याचिका पर विचार करते हुए कोर्ट ने ये बात कही.

मद्रास हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार को कहा कि जनता के पैसों से महान लोगों की याद में प्रतिमा या समारक बनाने से अच्छा है, उनके नाम पर स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाया, जिससे आम जनता को उसका फायदा मिलेगा.

लाइव लॉ की खबर के अनुसार, जस्टिस एम. सत्यनारायण और जस्टिस पी. राजमनिकम की पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के स्मारक के निर्माण के खिलाफ याचिका को विचार करते हुए यह बात कही. दरअसल मरीना बीच में समाधि स्थल पर 50.80 करोड़ रुपये की लागत से तमिलनाडु सरकार पूर्व मुख्यमंत्री के स्मारक का निर्माण करवा रही है.

हालांकि अदालत ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि जयललिता आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी साबित नहीं हुई हैं. लेकिन तमिलनाडु सरकार को कहा है कि वे भविष्य में ऐसी निति बनाएं कि महान लोगों के नाम पर प्रतिमा और समारक की जगह स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का निर्माण हो सके.

अदालत ने माना कि यह चलन हो चुका है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों और नेताओं के सम्मान और स्मृति में स्मारक बनाया जाता है और जनता के पैसों को इन कामों के लिए खर्च किया जाता है. स्मारक को सही बताते हुए कहा जाता है कि यह जनता को दिए गए योगदान के बारे में याद दिलाते हैं.

यह भी पाया गया है कि तमिलनाडु सरकार ने ऐसे 68 स्मारक, 4 आरंगम, 5 स्मारक स्तंभ और 1 स्मारक स्थापित किए हैं.

कार्ट ने कहा, ‘इस बात पर ध्यान देना उचित है कि महान नेताओं के सम्मान और स्मृति में, अस्पतालों, स्कूल, कॉलेजों के निर्माण, विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन और नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं लिए जनता के पैसों को खर्च किया जा सकता है. अगर ऐसे काम किए जाते हैं तो ये जनता को लंबे समय तक याद रहेंगे.’

अदालत ने स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों को बनवाने की टिप्पणी की, लेकिन कहा है कि ऐसा करना है कि नहीं करना है, ये सरकार के विवेक पर निर्भर करता है. अदालत इन कामों को लेकर कोई आदेश नहीं दे सकती है.