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एसबीआई ने आधार डेटा के दुरुपयोग का लगाया आरोप, यूआईडीएआई का इनकार

एसबीआई अधिकारियों ने कहा कि यूआईडीएआई की सुरक्षा प्रणाली में कई खामी है, जो हैक करने और कई स्टेशन आईडी बनाने को संभव बनाती है. हमने प्राधिकरण से अपील की है कि वे हमारे साथ अपने सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने और डेटाबेस को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए काम करें.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

चंडीगढ़: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अधिकारियों ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के डेटा के गलत इस्तेमाल होने की आशंका जताई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के अधिकारियों ने यूआईडीएआई को बताया कि फर्जी आधार बनाने के लिए उनके आधार ऑपरेटरों की लॉगिन और बायोमेट्रिक पहचान का दुरुपयोग हुआ है.

यूआईडीएआई ने इन आशंकाओं को नकारते हुए कहा कि आधार पूरी तरह सुरक्षित है. बायोमेट्रिक या अन्य किसी तरह की सुरक्षा से कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ है.

यह पूरा मुद्दा एसबीआई को दिए गए आधार नामांकन के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है. चंडीगढ़ क्षेत्र में इस काम की जिम्मेदारी एसबीआई ने दो वेंडरों एफआईए टेक्नोलॉजी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और संजीवनी कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को दी. चंडीगढ़ क्षेत्र के तहत हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित चंडीगढ़ आते हैं.

हालांकि, इन एजेंसियों के तहत काम करने वाले तकरीबन 250 कर्मचारियों में से लगभग आधे कर्मचारियों पर यूआईडीआईए ने जुर्माना लगाया और तमाम कर्मचारियों कोऔर ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है. इसकी वजह से एसबीआई की आधार नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से ठप पड़ गई. इसका नतीजा यह हुआ कि एसबीआई अपना लक्ष्य पूरा करने में विफल हो गई और उस पर जुर्माना लग गया.

इनमें से एक पीड़ित 40 वर्षीय विक्रम हैं जो एसबीआई शाखा में आधार ऑपरेटर के तौर पर 10 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह पर हरियाणा के जींद जिले के उचना गांव में काम करते थे. 26 दिसंबर, 2018 को विक्रम पर 33 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया.

यूआईडीएआई के मुताबिक, विक्रम ने 9 नवंबर से 17 नवंबर के बीच अपने आईडी का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे आधार कार्ड बनाए थे. यह पूरा फर्जीवाड़ा 143 डिवाइस का इस्तेमाल करके किया गया था. आधार नामांकन के लिए इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप, डेस्कटॉप या टैबलेट जैसी हर डिवाइस यूआईडीएआई के साथ दर्ज होती है और एक स्टेशन आईडी से उसकी पहचान की जाती है.

एसबीआई अधिकारियों के अनुसार, एक रजिस्ट्रार के रूप में केवल एसबीआई के पास कई स्टेशन आईडी को मंजूरी प्रदान करने का अधिकार है जबकि उन्होंने ऐसा नहीं किया है. इसीलिए चंडीगढ़ स्थित बैंक अधिकारियों ने मुंबई स्थित कॉरपोरेट ऑफिस को पत्र लिखकर मामले को यूआईडीएआई के साथ उठाने को कहा.

पत्र में लिखा है कि उन्होंने इन स्टेशन आईडी को नहीं बनाया है और निश्चित तौर पर यूआईडीएआई की सुरक्षा प्रणाली में कई खामी है जो हैक करने और विक्रम के नाम से कई स्टेशन आईडी बनाने को संभव बनाती है. हमने प्राधिकरण से अपील की है कि वे हमारे साथ अपने सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने और डेटाबेस को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए काम करें.

इस मामले में विक्रम के फिंगरप्रिंट जैसे व्यक्तिगत बायोमेट्रिक का इस्तेमाल करके आधार कार्ड बनाए गए और उनका इस्तेमाल आयकर, महाराष्ट्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय सूचना केंद्र में हुआ. इसके साथ ही उनका इस्तेमाल करके विभिन्न बैंकों में मौजूद विक्रम के व्यक्तिगत खातों से पैसे निकाले गए. इन सब के बावजूद यूआईडीएआई ने किसी भी बैंक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की.

एसबीआई के उप महाप्रबंधक बी. राजेंद्र कुमार ने कहा कि विक्रम के बायोमेट्रिक के दुरुपयोग और वेंडर जिन परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें उनकी जानकारी है. उनके कॉरपोरेट ऑफिस ने यूआईडीएआई के सामने यह मुद्दा उठाया है और उनसे अपील की है कि वे हमारे साथ अपने सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने और डेटाबेस को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए काम करें.

बैंक और वेंडर द्वारा की गई एक आंतरिक जांच में विक्रम को उन सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है जो उस पर यूआईडीएआई ने लगाया था. एसबीआई ने यूआईडीएआई से अपील की है कि वे लगाए गए जुर्माने को हटा लें और विक्रम को काम पर वापस आने दें. हालांकि, इस बीच यूआईडीएआई बाकी सभी ऑपरेटरों को काम पर वापस आने की मंजूरी दे दी.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस संबंध में यूआईडीएआई का पक्ष जानने के लिए उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मीडिया इंचार्ज को एक पत्र चार जनवरी को लिखा था. 18 जनवरी को यूआईडीएआई ने मामले की जानकारी देने मना कर दिया लेकिन जांच जारी होने की बात स्वीकार की. इसके बाद 19 जनवरी को यूआईडीएआई ने सुरक्षा के तौर पर आधार ऑपरेटर के पंजीकरण में एक नया चरण जोड़ा है.