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सीएम पलानीस्वामी के आश्वासन के बाद किसानों का आंदोलन 25 मई तक स्थगित

तमिलनाडु के कुछ किसान जंतर मंतर पर पिछले 40 दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. उनका कहना है कि यदि हमारी मांगें मानी नहीं गईं तो 25 मई से फिर आंदोलन करेंगे.

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर 40 दिन से आंदोलन कर रहे तमिलनाडु के किसानों ने अपना धरना स्थगित करने की घोषणा की है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आंदोलनरत किसानों ने 25 मई तक आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सूखा राहत और कर्ज माफ करने को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने राज्य के मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद 25 मई तक आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की है.

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आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान पी अयाकन्नू ने कहा कि यदि हमारी सभी मांगें मानी नहीं गईं तो 25 मई से फिर से आंदोलन करेंगे. किसानों ने कहा यदि हमें ट्रेन का टिकट मिल गया तो हम आज ही तमिलनाडु वापस चले जाएंगे.

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तमिलनाडु के कुछ किसान जंतर मंतर पर पिछले 40 दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांग थी कि किसानों के क़र्ज़ माफ़ किए जाएं. उन्हें सूखा राहत पैकेज दिया जाए और सिंचाई से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाए.

रविवार की सुबह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने जंतर मंतर जाकर आंदोलनरत किसानों से मुलाक़ात की थी और उन्हें मदद का भरोसा दिलाया था और विरोध-प्रदर्शन समाप्त करने की अपील भी की थी.

पलानीस्वामी ने जंतर मंतर पर किसानों से कहा था, ‘हम अनावश्यक ख़र्चो में कटौती करने का प्रयास करेंगे और उचित प्रबंध करने की कोशिश करेंगे… मैं प्रधानमंत्री के समक्ष किसानों की मांग को रखूंगा.. हम किसानों से विरोध-प्रदर्शन का समाप्त करने का आग्रह करते हैं.’

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सूखे के चलते तमिलनाडु में पिछले चार महीने में 400 किसानों की मौत हो गई है. राज्य के किसान क़र्ज़ माफ़ी और सूखा राहत पैकेज की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए तमिलनाडु से दिल्ली आए थे.

इस दौरान किसानों ने ध्यान खींचने के लिए तरह तरह से प्रदर्शन किए. उन्होंने हाथ में कटोरा और कुछ मृत किसानों के कंकाल लेकर प्रदर्शन किए. पीएमओ के सामने नग्न होकर प्रदर्शन किया. ज़मीन पर खाना रखकर खाया. चूहे, सांप और घास खाकर प्रदर्शन किया. शनिवार को किसानों ने मानव मूत्र पीकर अपना विरोध जताया था.

गौरतलब है कि क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, 1995 से लेकर अब तक पूरे देश में क़र्ज़, सूखा, ग़रीबी और भुखमरी के चलते पूरे देश में तीन लाख से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं.