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सीबीआई प्रमुख को चुनने के लिए हुई दूसरी बैठक भी बेनतीजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की सदस्यता वाली चयन समिति शुक्रवार को हुई बैठक में सीबीआई निदेशक पद के लिए किसी एक नाम पर एकमत नहीं हो सकी.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

नई दिल्ली: सीबीआई के अगले प्रमुख के नाम को लेकर संशय बरकरार है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली चयन समिति की दूसरी बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया. अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी.

इससे पहले दिन में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से सवाल किया था कि अब तक ब्यूरो के स्थायी निदेशक की नियुक्ति क्यों नहीं की गयी.

अदालत ने कहा था कि वह अंतरिम सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के ‘खिलाफ’ नहीं है लेकिन केंद्र को ‘तत्काल’ केंद्रीय जांच ब्यूरो के नियमित निदेशक की नियुक्ति करनी चाहिए. सीबीआई निदेशक का पद संवेदनशील है और लंबे समय तक इस पद पर अंतरिम निदेशक को रखना अच्छी बात नहीं है.

शुक्रवार को प्रधानमंत्री के आवास एक घंटे से अधिक समय चली इस बैठक में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ओर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बैठक में शामिल हुए.

चयन समिति की बैठक का ब्यौरा दिए बिना एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘बैठक के दौरान कोई फैसला नहीं हो पाया.’

इससे पहले 24 जनवरी को बैठक हुई थी लेकिन तब भी सीबीआई प्रमुख पर कोई फैसला नहीं हो पाया था. पिछली बैठक में समिति के सदस्यों से कुछ योग्य अधिकारियों की सूची और उनकी फाइलें साझा की गयी थीं.

अधिकारियों ने बताया कि समझा जाता है कि तीन सदस्यीय चयन समिति की दूसरी बैठक के दौरान सरकार ने ऐसे कुछ अधिकारियों के नाम सामने रखे, जिन्हें सीबीआई निदेशक पद पर नियुक्ति के योग्य माना गया है. हालांकि इन नामों पर खड़गे ने आपत्ति जाहिर की.

बता दें कि खड़गे ने आलोक वर्मा की बहाली के समय हुई समिति की बैठक में उन्हें हटाने के फैसले का विरोध किया था. उस समय खड़गे ने कहा कि वर्मा को दंडित नहीं किया जाना चाहिए और उनका कार्यकाल 77 दिन के लिए बढ़ाया जाना चाहिए, क्योंकि इतने दिन की अवधि के लिए वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया था.

हालांकि ऐसा भी कहा जा रहा है कि खड़गे के एतराज के बावजूद केंद्र जल्द ही एजेंसी के अगले प्रमुख के नाम की घोषणा कर सकता है.

पद के लिए 1984 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जावेद अहमद, रजनीकांत मिश्रा, एसएस देसवाल का नाम दौड़ में सबसे आगे है.

उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी जावेद अहमद वर्तमान में राष्ट्रीय अपराधशास्त्र एवं विधि विज्ञान संस्थान के प्रमुख हैं. अहमद के ही कैडर के उनके सहपाठी रजनीकांत मिश्रा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के प्रमुख हैं.

वहीं हरियाणा कैडर के आईपीएस देसवाल भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक हैं. मालूम हो कि आलोक वर्मा को हटाए जाने के बाद से सीबीआई प्रमुख का पद 10 जनवरी से ही खाली है.

भ्रष्टाचार के आरोपों पर गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना के साथ वर्मा का टकराव हुआ था. वर्मा और अस्थाना दोनों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. वर्मा को पद से हटाए जाने के बाद से एम. नागेश्वर राव अंतरिम सीबीआई प्रमुख के तौर पर काम कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति द्वारा सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद वर्मा को महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा और गृह रक्षा बनाया गया था. हालांकि, वर्मा ने इस पद को स्वीकार नहीं किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)