भारत

अनुभवहीन अधिकारियों को सीबीआई पैनल में शामिल करना कानून का उल्लंघन: खड़गे

ऋषि कुमार शुक्ला को नया सीबीआई निदेशक बनाए जाने पर चयन समिति के सदस्य और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा अंसतोष जताए जाने के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस नेता पर लगातार असहमति जताने का आरोप लगाया.

New Delhi: Congress Parliamentary Party leader Mallikarjun Kharge addresses the media during the Winter Session of Parliament, in New Delhi, Friday, Dec.14, 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore)(PTI12_14_2018_000039B)

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई निदेशक नियुक्त किए जाने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को जांच एजेंसी के प्रमुख के चयन में पहले से तय मापदंडों को पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया और दावा किया कि ऐसा करना ‘दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापना’ (डीएसपीई) कानून तथा उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है.

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की 1 फरवरी की बैठक के संदर्भ में अपने असहमति पत्र में कहा है कि समिति ने सहमति जताई थी कि पैनल में नामों को शामिल करने के लिए वरिष्ठता क्रम, एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) और भ्रष्टाचार विरोधी जांच का कम से कम 100 महीने के अनुभव जैसे तीन प्रमुख आधार बनाए गए थे, लेकिन इनका पालन नहीं हुआ.

उल्लेखनीय है कि खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई भी इस समिति के सदस्य हैं. केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई के नए निदेशक के रूप में शुक्ला के नाम की घोषणा किए जाने के बाद खड़गे ने 2 फरवरी की शाम दो पन्नों का अपना असहमति पत्र प्रधानमंत्री को भेजा.

उन्होंने उच्चतम न्यायालय के ‘विनीत नारायण मामले’ से जुड़े आदेश भी हवाला दिया जिसमें इन तीन बिंदुओं पर जोर दिया गया था. खड़गे ने शुक्ला और पैनल में शामिल कुछ अन्य अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी जांच का अनुभव नहीं रखने वाले अधिकारियों को पैनल में शामिल करके डीएसपीई कानून और न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया गया है.

खड़गे ने कहा कि सीबीआई निदेशक के चयन में मानदंड को कमजोर करते हुए ‘सिर्फ जांच का अनुभव होना’ शामिल किया गया. उन्होंने कहा कि जब इस तरह के अहम पद पर नियुक्ति की जाती है तो नियमों को कमजोर करने के साथ नहीं खड़ा रहा जा सकता और उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

कांग्रेस नेता ने कहा कि समिति ने वरिष्ठता के आधार पर उम्मीदवारों को सूची में शामिल करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि इस तरह के अहम पद पर नियुक्ति के लिए सिर्फ वरिष्ठता ही एक मापदंड नहीं हो सकता. साथ ही भ्रष्टाचार रोधी मामलों की जांच का अनुभव और संस्था (सीबीआई) में सेवा देने के पूर्व अनुभव पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए.

सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति में खड़गे की असहमति उनके राजनीतिक रुख का नतीजा: जेटली

ऋषि कुमार शुक्ला को नया सीबीआई निदेशक बनाए जाने पर चयन समिति के सदस्य और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा अंसतोष जताए जाने के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस नेता पर लगातार असहमति जताने का आरोप लगाया.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, अपने ब्लॉग ‘क्या खड़गे ने असहमति के मूल्यों को कमजोर किया है?’ में जेटली ने कहा कि खड़गे की असहमति उनके राजनीतिक रुख के कारण है.

बता दें कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति के सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे सीबीआई प्रमुख के पद से आलोक वर्मा को हटाए जाने का विरोध करने वाले एकमात्र सदस्य थे. वहीं शुक्ला को सीबीआई प्रमुख बनाए जाने के फैसले का भी विरोध करते हुए खड़गे ने कहा कि उनमें भ्रष्टाचार रोधी मामलों की जांच करने के अनुभव की कमी है.

खड़गे की असहमति पर सवाल उठाते हुए जेटली ने लिखा, ‘सीबीआई निदेशक की नियुक्ति और ट्रांसफर के मामलों को देखने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता शामिल हैं मगर इसमें जो बात लगातार हो रही है वह खड़गे की असहमति है.’

जेटली ने खड़गे पर सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति को राजनीतिक लड़ाई बनाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘आलोक वर्मा के ट्रांसफर मामले में खड़गे की असहमति उनके राजनीतिक रुख का नतीजा थी. आलोक वर्मा के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वालों में एक वह भी थे. उनका नजरिया सामने आने के बाद उन्हें खुद को इस समिति से अलग कर लेना चाहिए था. जेटली ने खड़गे पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और हितों के टकराव का आरोप लगाया.

लोकतंत्र में असहमति को एक शक्तिशाली हथियार बताते हुए जेटली ने कहा, ‘यह कभी भी एक राजनीतिक हथियार नहीं था.’ उन्होंने खड़गे पर इस हथियार को बिना किसी उद्देश्य के लगातार उपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘असहमति के हथियार के अत्यधिक उपयोग से उसका मूल्य कम होता है. कोलेजियम में उन्हें विपक्ष के नेता के तौर पर शामिल किया गया है लेकिन वे खुद को विपक्षी सदस्य की छवि से बाहर नहीं निकाल पाए हैं, इसके बावजूद वे सरकार की समिति के सदस्य बने हुए हैं.’

जितेंद्र सिंह का आरोप – खड़गे ने सीबीआई निदेशक के चयन के मानदंडों में हेरफेर की कोशिश की

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को दावा किया कि सीबीआई निदेशक का चयन करने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली उच्च-स्तरीय समिति के सदस्य एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पसंदीदा अधिकारियों को तवज्जो देने की गलत मंशा से सीबीआई प्रमुख के चयन के मानदंडों में हेरफेर करने की कोशिश की. उन्होंने खड़गे पर आरोप लगाया कि वह चयन समिति में हुई चर्चा के बारे में मीडिया को सिर्फ अपने हिसाब से चीजें बता रहे हैं.

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने बताया, ‘खड़गे ने सीबीआई निदेशक के चयन से संबंधित स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मूल्यांकन पर आधारित उद्देश्यपरक मानदंडों में हेरफेर की कोशिश की….वह उम्मीदवारों की अंतिम सूची में अपने कुछ पसंदीदा अधिकारियों को शामिल करना चाह रहे थे.’ सिंह ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सीबीआई प्रमुख के चयन में लागू किए जाने वाले मानदंडों का पूरा समर्थन किया.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व प्रमुख ऋषि कुमार शुक्ला को दो साल के तय कार्यकाल के लिये शनिवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का निदेशक नियुक्त किया गया है. मध्य प्रदेश कैडर के 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी शुक्ला फिलहाल भोपाल में मध्य प्रदेश पुलिस आवास निगम के अध्यक्ष हैं. शुक्ला का हाल में मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक पद से पुलिस आवास निगम में तबादला हुआ था.

राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शुक्ला रायपुर, दमोह, शिवपुरी और मंदसौर जिलों में विभिन्न पदों पर सेवा दे चुके हैं. बाद में उन्हें राज्य का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था. ग्वालियर के रहने वाले शुक्ला ने दर्शनशास्त्र में परास्नातक किया है.

शुक्ला ने सुनिश्चित किया कि आपराधिक मामलों में जल्द से जल्द आरोप-पत्र दायर हो ताकि मुकदमे की सुनवाई वक्त पर शुरू हो सके और इंसाफ मिलने में होने वाली देरी को न्यूनतम किया जा सके. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सीबीआई में पहले काम नहीं किया है, लेकिन वह 11 वर्षों तक खुफिया ब्यूरो में रहे हैं, जहां उन्होंने कई संवेदनशील मामले संभाले.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली चयन समिति की सिफारिश पर शुक्ला को सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया. 24 जनवरी को हुई समिति की पहली बैठक बेनतीजा रही थी. बीते शुक्रवार को चयन समिति की दूसरी बैठक के दौरान शुक्ला का नाम सीबीआई निदेशक पद के लिए तय किया गया था.

इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है क्योंकि शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वह अंतरिम सीबीआई निदेशक की नियुक्ति को लेकर ‘अनिच्छुक’ है और केन्द्र को ‘तत्काल’ सीबीआई के नियमित निदेशक की नियुक्ति करनी चाहिए.

शीर्ष अदालत ने कहा कि सीबीआई निदेशक का पद ‘‘संवेदनशील’’ और ‘‘महत्वपूर्ण’’ है और लंबे समय तक एजेंसी के अंतरिम निदेशक की नियुक्ति ठीक नहीं है. अदालत ने जानना चाहा था कि सरकार ने अब तक इस पद पर नियुक्ति क्यों नहीं की है.

शुक्ला सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव से प्रभार लेंगे. वह आलोक वर्मा का स्थान लेंगे, जिन्हें 10 जनवरी को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया गया था. आलोक वर्मा को हटाए जाने के बाद से सीबीआई प्रमुख का पद 10 जनवरी से ही खाली है.

प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति द्वारा सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने के बाद वर्मा को महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा और गृह रक्षा बनाया गया था. हालांकि, वर्मा ने इस पद को स्वीकार नहीं किया.

शुक्ला ऐसे समय में देश की शीर्ष जांच एजेंसी की कमान संभाल रहे हैं जब वह विवादों से घिरी है.  भ्रष्टाचार के आरोपों पर गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना के साथ वर्मा का टकराव हुआ था. वर्मा और अस्थाना दोनों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.

उस वक्त कांग्रेस ने वर्मा को पद से हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार उन्हें निशाना बना रही है, क्योंकि उसे डर है कि कहीं वह राफेल लड़ाकू विमान करार की जांच के आदेश न दे दें.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)