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पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का नाम एसआरसीसी के कार्यक्रम में वक्ताओं की सूची से हटाया गया

सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा को नौ जनवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में बतौर वक्ता शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया गया था.

Alok verma PTI

सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा का नाम दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के स्टूडेंट्स यूनियन बिजनेस कॉन्क्लेव 2019 के वक्ताओं की सूची से हटा दिया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद पर बहाल करने के एक दिन बाद नौ जनवरी को निमंत्रण भेजा गया था, जिसमें उनसे 14 फरवरी यानी गुरुवार को होने वाले कार्यक्रम में बतौर वक्ता संबोधित करने का आग्रह किया गया था.

अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जस्टिस एके सीकरी और लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने उन्हें सीबीआई निदेशक पद से हटाने का फैसला किया था. हालांकि, खड़गे ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी.

वर्मा के सहयोगियों का कहना है कि कॉलेज के कार्यक्रम में बतौर वक्ता उनका नाम हटाए जाने की जानकारी उन्हें दे दी गई है.

एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर इस घटनाक्रम को लेकर कहा कि कॉलेज प्रशासन की ओर से मंजूरी नहीं दी गई इसलिए वह (वर्मा) इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगे.

अधिकारी ने बताया कि उनके इस्तीफा देने से पहले नौ जनवरी को उन्हें निमंत्रण दिया गया था.

यह पूछे जाने पर कि क्या आलोक वर्मा को आमंत्रित करने से पहले कॉलेज प्रशासन से मंजूरी मांगी गई थी. इस पर अधिकारी ने कहा कि हां ली गई थी लेकिन इस पूरे प्रकरण और अन्य कुछ मुद्दों के उजागर होने के बाद कॉलेज की आयोजन समिति ने उनका नाम वक्ताओं की सूची से हटाए जाने का फैसला किया.

इस पर मामले पर एसआरसीसी की प्रिंसिपल सिमरित कौर ने कहा कि वह इस निमंत्रण और इसके बाद के घटनाक्रम से वाकिफ नहीं हैं.

मालूम हो कि जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा और ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने पिछले साल 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने का निर्णय किया था. दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को आठ जनवरी 2018 को दोबारा सीबीआई के निदेशक पद पर बहाल कर दिया था. हालांकि बीते 10 जनवरी को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने उन्हें सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था.

(समाचार एजेंसी पीटीआई की इनपुट के साथ)