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अनिल अंबानी की कंपनी को दिवालिया घोषित करने के लिए एसबीआई ने चार ऑडिट फर्मों से किया संपर्क

अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस ने लगभग 45,000 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने में असफल रहने पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच में दिवालिया याचिका दायर करने का फैसला किया.

New Delhi: Reliance Communication Ltd (RCom) Chairman Anil Ambani leaves after appearing at the Supreme Court in connection with a contempt petition filed by Ericsson India against him over non-payment of dues, in New Delhi, Tuesday, Feb. 12, 2019. (PTI Photo/ Shahbaz Khan)(PTI2_12_2019_000091B)

अनिल अंबानी. (फोटो: पीटीआई)

अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) को कर्ज देने वाली स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने चार सबसे बड़ी ऑडिट कंपनियों और कंसल्टेंट्स से संपर्क किया है. ये कंपनियां आरकॉम की दिवाला प्रक्रिया का प्रबंधन करने के लिए एक रिजॉल्यूशनल प्रोफेशनल (आरपी) की नियुक्ति करने में मदद करेंगी.

इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, एसबीआई ने इस काम के लिए जिन कंपनियों का साक्षात्कार लिया है उनमें ईवाई और आरकॉम के लिए रिजॉल्यूशनल प्रोफेशनल के रूप में पहले काम कर चुकी एक कंपनी है.

आरकॉम को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ले जाने के लिए एसबीआई एक स्वतंत्र कदम उठाने पर विचार कर रही है. हालांकि कर्ज में डूबी हुई आरकॉम ने 4 फरवरी को ही स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित कर दिया था कि उसने एनसीएलटी में जाने का फैसला कर लिया है क्योंकि वह कर्ज चुकाने में विफल है.

सूत्रों के अनुसार, एसबीआई के पास यह भी विकल्प है कि वह आरकॉम के स्वयं दिवालिया प्रक्रिया में जाने का इंतजार करे और लेनदारों की समिति के सहमत होने पर अपनी पसंद के आरपी की सिफारिश कर दे. बता दें कि आरकॉम ने बैंकों से करीब 45 हजार करोड़ रुपये की कर्ज लिया है.

बीते दिनों अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) ने लगभग 45,000 करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने में असफल रहने पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच में दिवालिया याचिका दायर करने का फैसला किया.

इस संबंध में ईमेल के माध्यम से पूछे गए सवालों पर एसबीआई प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की यह नीति है कि किसी व्यक्तिगत खाते और उसके संबंध में हो रही कार्रवाई के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की जाए.

बता दें कि स्वीडिश टेलीकॉम उपकरण निर्माता एरिक्शन ने पिछले साल मई में आरकॉम को एनसीएलटी में घसीटा था. एरिक्शन का आरोप था कि आरकॉम ने उससे खरीदे गए उपकरणों के 550 करोड़ रुपये नहीं चुकाए.

उस समय एनसीएलटी ने आरकॉम और उसकी दो सहयोगी कंपनियों रिलायंस इंफ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम के लिए कंसल्टिंग फर्म आरबीएस की नियुक्ति को रिजॉल्यूशनल प्रोफेशनल के रूप में मंजूरी दी थी.

इसके बाद आरकॉम ने वादा किया कि वह एनसीएलटी में एक निश्चित समय सीमा में एरिक्शन का बकाया जमा कर देगी जिसके बाद उसकी दिवालिया प्रक्रिया पर रोक लग गई.

वहीं इस साल की शुरुआत में रिलायंस जियो के साथ आरकॉम का प्रस्तावित सौदा रद्द होने के बाद आरकॉम ने एनसीएलटी से अपना आवेदन वापस लेने की मांग की. हालांकि उसकी इस मांग पर एरिक्शन ने सख्त ऐतराज जताया. अब दोनों पक्षों का विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

सुलह की कई कोशिशें होने के बावजूद आरकॉम देनदारों का बकाया चुका पाने में विफल रही है. मुकेश अंबानी के जियो को स्पेक्ट्रम बेचने की नाकामयाब कोशिश के बाद वह और बुरी तरह घिर गई. अगर वह सौदा सफल हो जाता तो कंपनी को अपना कुछ कर्ज उतारने में मदद मिल जाती.

बता दें कि आरकॉम ने 2017 के आखिर में अपनी मोबाइल सेवाएं बंद कर दी थी.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अंबानी और दो अन्य के खिलाफ 550 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के कारण उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिये एरिक्सन इंडिया की याचिका पर सुनवाई पूरी कर चुकी है. न्यायालय इस पर बाद में फैसला सुनायेगा.

न्यायालय ने पिछले साल 23 अक्टूबर को आरकॉम से कहा था कि वह 15 दिसंबर, 2018 तक बकाया राशि का भुगतान करे और ऐसा नहीं करने पर उसे 12 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा.

एरिक्सन ने अनिल अंबानी और दो अन्य के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने का अनुरोध करते हुए याचिका में दावा किया कि उन्होंने 15 दिसंबर, 2018 तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है.

इससे पहले, एरिक्सन इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने शीर्ष अदालत से कहा था कि रिलायंस ने कई बार न्यायालय की अवमानना की है और उन्होंने खुद में बदलाव नहीं किया है. उन्होंने कहा था कि आरकॉम ने शीर्ष अदालत के दो आदेशों का उल्लंघन किया है ओर यहां तक कि शपथ के तहत सूचना छिपाते हुए गलत जानकारी दी.

वहीं, आरकाम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि संचार कंपनी की 25,000 करोड़ रुपये की संपत्ति रिलायंस जियो को बेचने का सौदा विफल हो गया और अब वे दिवालिया स्थिति में हैं.

दवे ने दावा किया कि बंबई स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल दस्तावेज में रिलायंस ने दावा किया है कि उसे हाल ही में रिलायंस जियो सहित अलग-अलग कंपनियों को बेचने से तीन हजार करोड़ रुपये और दो हजार करोड़ रुपये मिले हैं. रोहतगी ने कहा कि यह रकम रिलायंस को नहीं मिली है.

आरकॉम ने सात जनवरी को कहा था कि वह धन लौटाने के प्रति अपनी इच्छा स्पष्ट करने के लिए 118 करोड़ रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में जमा करेगा और शेष राशि भी कुछ समय में अदा कर देगा.

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अंबानी और अन्य दो लोगों के खिलाफ 550 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के कारण अवमानना कार्रवाई के लिए एरिक्सन इंडिया की याचिका पर बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली. न्यायालय इस पर बाद में फैसला सुनायेगा.

दूरसंचार कंपनी एरिक्सन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया था कि रिलायंस के पास रफाल जेट सौदे में निवेश के लिए पैसा है लेकिन वह उनका 550 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं. हालांकि अनिल अंबानी समूह ने एरिक्सन के इस आरोप को तुरंत खारिज कर दिया.