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केरल: नाबालिग से बलात्कार के दोषी पादरी को बीस साल की सज़ा

केरल के कोट्टियूर में नाबालिग से बलात्कार के दोषी पादरी पर अदालत ने दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह घटना 2016 में हुई थी और 2017 में किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया था.

फादर रॉबिन. (फोटो साभार: फेसबुक)

फादर रॉबिन. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः केरल की थलासेरी पॉक्सो अदालत ने शनिवार को चर्च के एक पादरी को 16 साल की किशोरी से बलात्कार के मामले में 20 साल कैद की सजा सुनाई. साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, फादर रॉबिन उर्फ मैथ्यू वड़ाक्केनचेरिल (48) कोट्टियूर के स्थानीय चर्च के प्रतिनिधि और जिस स्कूल में पीड़िता पढ़ती थी, उसके प्रबंधक थे.

पिछले साल 28 फरवरी को उन्हें तब गिरफ्तार किया गया जब वह कनाडा भागने की फिराक में थे.

पुलिस ने कहा कि यौन उत्पीड़न में कथित भागीदारी और किशोरी की डिलीवरी के संबंध में छह अन्य भी आरोपी हैं, जिनमें थंगामा नेलियानी, वायनाड चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के चेयरमैन फादर थॉमस जोसेफ थेराकम, सीडब्ल्यूसी कमेटी की सदस्य सिस्टर बेटी जोस और वायनाड में एक अनाथालय की निरीक्षक सिस्टर ओफेलिया और सिस्टर लिस मारिया और सिस्टर अनीता शामिल हैं.

इन सभी को शनिवार को बरी कर दिया गया. अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी को ही इस अपराध का दोषी करार दिया.

पुलिस का कहना है कि पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए बयान के मुताबिक, यह घटना मई 2016 में हुई थी. किशोरी ने सात फरवरी 2017 को एक निजी अस्पताल में एक बच्चे को जन्म भी दिया था.

अदालत ने कहा कि फादर रॉबिन के खिलाफ अदालत का यह फैसला पीड़िता के जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर आया है, जिससे पता चलता है कि जिस वक्त उसके साथ बलात्कार किया गया, उस समय उसकी उम्र 16 साल थी. बलात्कार पीड़िता के बच्चे का डीएनए भी रॉबिन से मेल खाता है, जिससे पता चलता है कि इस वारदात को उसी ने अंजाम दिया है.

गौरतलब है कि केरल में ही एक अन्य बिशप बलात्कार के आरोपों का सामना कर रहे हैं. एक नन ने जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच उसके साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया है. यह घटना जालंधर डायोसीस द्वारा कोट्टयम जिले में संचालित कॉन्वेंट के बिशप के दौरे के दौरान हुई.

बता दें कि नन से बलात्कार के आरोप में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को पिछले साल 21 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था.  इसके बाद 15 अक्टूबर को उन्हें अदालत से सशर्त जमानत मिल गई थी. जमानत पर रिहा होने के बाद जालंधर में उनका फूल-माला से स्वागत हुआ था.