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देश का पहला वैदिक स्कूल बोर्ड स्थापित करने की दौड़ में रामदेव का ट्रस्ट शामिल

तीन साल पहले तत्कालीन एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी ने वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने के रामदेव के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. उन्होंने एक निजी स्कूल बोर्ड स्थापित करने पर सरकार की आपत्ति दर्ज कराई थी. हालांकि, सरकार ने हाल ही में अपना फैसला पलट दिया.

New Delhi: Baba Ramdev during Bharatatma Ashokji Singhal Vedik Puraskar 2018 award function, in New Delhi, Tuesday, Sept. 25, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI9_25_2018_000186B)

रामदेव. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने वैदिक शिक्षा के लिए देश का पहला राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड स्थापित करने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है. इंडियन एक्सप्रेस को इसकी जानकारी मिली है.

महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान (एमएसआरवीपी) ने भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) की स्थापना के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे. आवेदन करने के लिए मंगलवार शाम तक का समय था. 11 फरवरी को जारी किए गए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओएल) के लिए कई निजी संस्थाओं के साथ हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट ने भी इच्छा जाहिर की है.

पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की वेबसाइट के अनुसार, उसका उद्देश्य योग और आयुर्वेद पर अध्ययन और शोध करने के साथ यज्ञ, जैविक खेती, गौमूत्र, प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध करना है. रामदेव के अलावा उसके ट्रस्टीज में आचार्य बालकृष्ण, स्वामी मुक्तानंद और शंकरदेव शामिल हैं.

बीएसबी को स्थापित करने के लिए एक निजी संगठन की नियुक्ति की जिम्मेदारी एमएसआरवीपी को दी गई है. एमएसआरवीपी को इस संबंध में कुल केवल तीन आवेदन मिले हैं. बता दें कि एमएसआरवीपी, मानव संसाधन एवं विकास (एचआरडी) मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक पूर्ण वित्तपोषित स्वायत्त संस्था है जिसे ‘वेद विद्या’ को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है.

बीएसबी के स्थापित होने से रामदेव के आचार्यकुलम, आरएसएस के विद्या भारती और आर्य समाज द्वारा चलाए जा रहे गुरुकुलों को फायदा मिलेगा क्योंकि इससे उन्हें कक्षा 12 तक अपना अलग शैक्षणिक मॉडल चलाने की मंजूरी मिल जाएगी. फिलहाल, सीबीएसई जैसे स्कूल बोर्ड इसकी अनुमति नहीं देते हैं.

तीन साल पहले तत्कालीन एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी ने वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने के रामदेव के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. उन्होंने एक निजी स्कूल बोर्ड स्थापित करने पर सरकार की आपत्ति दर्ज कराई थी. फिलहाल, किसी निजी बोर्ड को केंद्र सरकार ने मान्यता नहीं दी है.

हालांकि, 12 फरवरी की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने हाल ही में अपना फैसला पलट दिया. पिछले हफ्ते जारी हुए ईओल में कहा गया है कि बोर्ड गठित करने के लिए चुनी गई एजेंसी एमएसआरवीपी सरकार की मंजूरी से एक औपचारिक आदेश जारी करेगी.

वहीं, एमएसआरवीपी को फिलहाल केवल तीन आवेदन मिले हैं और फिलहाल यह साफ नहीं है कि इसकी आवेदन की आखिरी तारीख आगे बढ़ाई जाएगी या नहीं. अगर आखिरी तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाती है तो आवेदनों को एक चयन समिति को दे दिया जाएगा. समिति इसकी जांच करेगी कि क्या वे एक निजी स्कूल बोर्ड की मान्यता प्राप्त करने की योग्यता रखते हैं. इसके बाद एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में एमएसआरवीपी की निर्णायक समिति आखिरी फैसला लेगी.

निजी स्कूल बोर्ड की मान्यता प्राप्त करने की योग्यता के लिए आवेदक को भारतीय पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, प्रचार और प्रसार में शामिल होना चाहिए जिसमें कम से कम पांच वर्षों तक वैदिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, स्कूलों में योग शामिल हो.

ईओएल यह भी कहता है कि आवेदक के पास 300 करोड़ से कम की संपत्ति नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही विकास कोष के साथ उसे बोर्ड के लिए 50 करोड़ के कोष की व्यवस्था करनी होगी.