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रामदेव के पतंजलि को मिली वैदिक स्कूल बोर्ड चलाने की ज़िम्मेदारी

पतंजलि योगपीठ के चयन के साथ ही भारतीय शिक्षा बोर्ड देश का पहला ऐसा निजी स्कूल बोर्ड बन गया जो कि सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होगा.

Patna: Swami Ramdev after being offered a 'Makhana-garland' during a function, in Patna on Monday, July 16, 2018. (PTI Photo) (PTI7_16_2018_000021B)

रामदेव. (फोटो: पीटीआई).

नई दिल्ली: देश में वैदिक शिक्षा का पहला स्कूल बोर्ड स्थापित करने के लिए महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान (एमएसआरवीपी) की गवर्निंग काउंसिल ने बुधवार को आधिकारिक रूप से रामदेव के पतंजलि योगपीठ का चुनाव किया. ऐसा माना जा रहा है कि आगामी छह महीनों में यह अपना कामकाज शुरू कर देगा.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पतंजलि योगपीठ के चयन के साथ ही भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) देश का पहला ऐसा निजी स्कूल बोर्ड बन गया जो कि सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होगा.

अन्य स्कूल बोर्डों की तरह बीएसबी संबद्ध स्कूलों को पाठ्यक्रम, परीक्षा आयोजित करने और प्रमाणपत्र जारी करने का मसौदा तैयार करेगा.

हालांकि, केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता वाली एमएसआरवीपी की गवर्निंग काउंसिल ने बीएसबी के अलावा एक अन्य बोर्ड भी गठित करने का फैसला किया है जो कि विशेष रूप से शास्त्रों की मौखिक परंपराओं के लिए होगी. बाद में इसे भी एमएसआरवीपी ही चलाएगी.

एमएसआरवीपी द्वारा 11 फरवरी को जारी किए गए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) के अनुसार, निजी संस्थानों से आवेदन आमंत्रित करते हुए, बीएसबी का अर्थ वैदिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, शास्त्र एवं दर्शन शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय पारंपरिक ज्ञान, भारतीय कला और भारतीय परम्परा और संस्कृत जैसे पारंपरिक ज्ञान से था.

सूत्रों के अनुसार, 21 करोड़ के डेवलपमेंट फंड का वादा करने के कारण ही पतंजलि को बीएसबी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पतंजलि इसके लिए बैंक गारंटी भी दे चुकी है.

बता दें कि बीएसबी को स्थापित करने के लिए एक निजी संगठन की नियुक्ति की जिम्मेदारी एमएसआरवीपी को दी गई है. एमएसआरवीपी को इस संबंध में कुल केवल तीन आवेदन मिले हैं. बता दें कि एमएसआरवीपी, मानव संसाधन एवं विकास (एचआरडी) मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक पूर्ण वित्तपोषित स्वायत्त संस्था है जिसे ‘वेद विद्या’ को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है.

बीएसबी के स्थापित होने से रामदेव के आचार्यकुलम, आरएसएस के विद्या भारती और आर्य समाज द्वारा चलाए जा रहे गुरुकुलों को फायदा मिलेगा क्योंकि इससे उन्हें कक्षा 12 तक अपना अलग शैक्षणिक मॉडल चलाने की मंजूरी मिल जाएगी. फिलहाल, सीबीएसई जैसे स्कूल बोर्ड इसकी अनुमति नहीं देते हैं.

तीन साल पहले तत्कालीन एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी ने वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने के रामदेव के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. उन्होंने एक निजी स्कूल बोर्ड स्थापित करने पर सरकार की आपत्ति दर्ज कराई थी. फिलहाल, किसी निजी बोर्ड को केंद्र सरकार ने मान्यता नहीं दी है.

हालांकि, 12 फरवरी की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने हाल ही में अपना फैसला पलट दिया. पिछले हफ्ते जारी हुए ईओल में कहा गया है कि बोर्ड गठित करने के लिए चुनी गई एजेंसी एमएसआरवीपी सरकार की मंजूरी से एक औपचारिक आदेश जारी करेगी.