भारत

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में दलित छात्राओं ने प्रिंसिपल पर लगाया भेदभाव का आरोप

आज़मगढ़ जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल पर दलित छात्राओं ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

Rajkiya Aashram Paddhati Balika Inter College-Azamgarh

आजमगढ़ का राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ के एक गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल की दलित छात्राओं ने प्रिंसिपल के खिलाफ भेदभाव और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. इस संबंध में जिला प्रशासन ने गुरुवार को जांच के आदेश दिए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आज़मगढ़ ज़िले के मेहनगर के गौर गांव में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज में छात्राओं के लिए एक हॉस्टल भी है.

मेहनगर तहसील के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) दुष्यंत कुमार मौर्य ने कहा कि यदि प्रिंसिपल दोषी पाई जाती हैं तो जिला प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा.

उन्होंने कहा, ‘कक्षा नौंवी की दो छात्राओं के बीच बुधवार को कुछ विवाद हुआ था. इस पर दोनों लड़कियां प्रिंसिपल के पास गईं, इनमें से एक दलित समुदाय से थी. दलित छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल रागिनी सिंह ने उसके साथ बुरा व्यवहार किया और उसका पक्ष नहीं सुना. पांच दलित छात्राओं ने मुझे लिखित शिकायत दी है, जिनका कहना है कि वे स्कूल में भेदभाव का सामना कर रही हैं. उनका कहना है कि उन्हें सुबह की प्रार्थना के दौरान पीछे की कतारों में खड़ा करने और कक्षा में पीछे बैठने को मजबूर किया जाता है.’

मौर्य ने कहा कि गुरुवार को वह स्कूल गए थे और जरूरत पड़ने पर छात्राओं को उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है.

आज़मगढ़ के समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक सुरेश चंद्र पाल ने कहा, ‘अगर आरोप सच साबित होते हैं तो हम कार्रवाई करेंगे. मैंने बुधवार को छात्राओं से बात की थी.’

उनका कहना है कि स्कूल में 303 छात्राएं हैं, जिनमें से 183 दलित समुदाय से हैं. 87 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और 33 सामान्य वर्ग से हैं.

उन्होंने कहा कि यह एक आवासीय स्कूल हैं, जिसमें पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षण है.

भीम आर्मी के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को प्रिंसिपल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया.

भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल ने कहा, ‘दलित छात्रों को नियमित पढ़ाई से दूर रखा जाता है. उनके साथ भेदभाव किया जाता है. छात्रों ने हमारे प्रतिनिधियों को बताया कि सवर्ण जाति की छात्राओं के लिए अलग कमरे हैं. हमने एक टीम गुरुवार को स्कूल भेजी थी और वे शुक्रवार को रिपोर्ट जमा करेंगे. अगर जिला प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करती है तो हम आंदोलन शुरू करेंगे.’

छात्राओं की लिखित शिकायत में दलित छात्राओं के साथ समान व्यवहार और प्रिंसिपल के निलंबन की मांग की गई है.

पांच दलित छात्राओं द्वारा लिखी गई शिकायत में कहा गया है, ‘प्रिंसिपल भद्दी भाषा में हमारे साथ बात करती हैं. वे हमारे परिजनों को भी गाली देती हैं और उनके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करती हैं. प्रिंसिपल के ऑफिस से डॉ. बीआर अंबेडकर की तस्वीर भी हटा दी गई है. हमें स्कूल से निकालने की धमकी दी गई है और स्कूल आने वाले किसी भी अधिकारी से इसके बारे में बात करने पर खामियाजा भुगतने की धमकी दी गई है.’

इन पांचों छात्राओं में से एक ने फोन पर बताया कि प्रिंसिपल खाना बांटते समय भी भेदभाव करती हैं.

छात्रा ने कहा, ‘ऊंची जाति के बच्चों के लिए विशेष भोजन परोसा जाता है.’

प्रिंसिपल रागिनी नायक ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.