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आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध किसी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं: सुषमा स्वराज

इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में बोलीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज. पहली बार भारत ने की शिरकत. भारत के शामिल होने पर पाकिस्तान ने किया बैठक का बहिष्कार.

ओआईसी की बैठक को संबोधित करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज. (फोटो साभार: ट्विटर/@OIC_OCI)

ओआईसी की बैठक को संबोधित करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज. (फोटो साभार: ट्विटर/@OIC_OCI)

अबु धाबी: भारत ने शुक्रवार को पहली बार संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी में ओआईसी की बैठक को संबोधित किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि क्षेत्रों को अस्थिर करने वाले और विश्व को बड़े संकट में डालने वाले आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध किसी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं है.

भारत की यह भागीदारी इस्लामिक सहयोग संगठन (ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन- ओआईसी) समूह को संबोधित करने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को दिया गया आमंत्रण रद्द करने की पाकिस्तान की मज़बूत मांग के बावजूद हुई है.

पाकिस्तान की इस मांग को मेज़बान देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने स्वीकार नहीं किया और इसके फलस्वरूप पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पूर्ण सूत्र का बहिष्कार किया.

सुषमा स्वराज ने कहा, ‘आतंकवाद और चरमपंथ अलग-अलग नाम हैं… आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई किसी भी धर्म के ख़िलाफ़ संघर्ष नहीं है.’

सुषमा 57 इस्लामिक देशों के समूह ओआईसी को संबोधित करने वाली पहली भारतीय मंत्री हैं.

इससे पूर्व 1969 में इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्री फ़ख़रुद्दीन अली अहमद, जो बाद में राष्ट्रपति बने, को रबात सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था. लेकिन उनके मोरक्को की राजधानी पहुंचने के बाद पाकिस्तान द्वारा ज़ोर दिए जाने पर उनसे आमंत्रण वापस ले लिया गया था. उसके बाद से भारत को ओआईसी के सभी विचार-विमर्श से बाहर रखा गया.

सुषमा ने अपने संबोधन में पवित्र क़ुरान की एक पंक्ति को उद्धृत किया जिसका अर्थ है, ‘धर्म में कोई बाध्यता नहीं होनी चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘जैसे कि इस्लाम का मतलब अमन है और अल्लाह के 99 नामों में से किसी का मतलब हिंसा नहीं है. उसी तरह दुनिया के सभी धर्म शांति, करुणा और भाईचारे का संदेश देते हैं.’

सुषमा ने कहा, ‘मैं अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 18.5 करोड़ मुसलमान भाइयों-बहनों सहित 1.3 अरब भारतीयों का सलाम लेकर आई हूं. हमारे मुसलमान भाई-बहन अपने-आप में भारत की विविधता का सूक्ष्म ब्रह्मांड हैं.’

उन्होंने कहा कि भारत में ‘बहुत ही कम’ मुसलमान चरमपंथी और रुढ़िवादी विचारधारा वाले कुप्रचार के शिकार हुए हैं.

सुषमा ने अपने तकरीबन 17 मिनट के संबोधन में एक बार भी पाकिस्तान का ज़िक्र नहीं किया.

उनकी टिप्पणी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव की पृष्ठभूमि में आई है. पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे.

सुषमा ने कहा कि वह ऐसी धरती की प्रतिनिधि हैं जो सदियों से ज्ञान का स्रोत, शांति की मशाल, भक्ति और परंपराओं का स्रोत और दुनिया भर के धर्मों का घर रहा है तथा अब यह दुनिया की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.

मालूम हो कि बीते 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में भारत की ओर से किए गए एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच संबंध और तनावपूर्ण हुए हैं. इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान ने प्रयास किया था कि ओआईसी के लिए स्वराज का आमंत्रण रद्द हो जाए.

हालांकि समूह ने ऐसा नहीं किया जिसके बाद पाकिस्तान ने इस बैठक का बहिष्कार किया. पाकिस्तान की ओर से कोई भी इस बैठक में शामिल नहीं हुआ. बता दें कि पाकिस्तान ओआईसी का सदस्य देश है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने शुक्रवार को कहा कि भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिया गया आमंत्रण रद्द नहीं किया गया है, इसलिए वह बैठक में हिस्सा लेने नहीं जाएंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)