भारत

मारे गए आतंकियों की संख्या को लेकर जारी संदेह को खत्म करे सरकार: संसदीय समिति

विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति के सूत्रों ने कहा कि विदेश सचिव ने 26 फरवरी को बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर में मारे गए आतंकवादियों की संख्या के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया.

भारतीय वायुसेना के विमानों की तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

भारतीय वायुसेना के विमानों की तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः विदेश मामलों की स्थायी समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी शिविर पर एयर स्ट्राइक से हुए नुकसान का सबूत दे ताकि भारत द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक में मरने वाले आतंकियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में संदेह की स्थिति खत्म हो सके.

 द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मामलों पर संसद की स्थाई समिति ने यह सुझाव तब दिया, जब विदेश सचिव विजय गोखले ने उन्हें पुलवामा हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच के घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी.

विदेश सचिव विजय गोखले और विदेश मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में समिति को जानकारी दी. गोखले पाकिस्तान की नई सरकार पर बोलने वाले थे लेकिन यह बैठक व्यापक तौर पर पुलवामा हमले पर केंद्रित रही.

समिति के सूत्रों ने कहा कि विदेश सचिव ने 26 फरवरी को हुए एयर स्ट्राइक के ऑपरेशन की जानकारी का ब्योरा देने से इनकार कर दिया. उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद शिविर में मारे गए आतंकवादियों की संख्या के सवालों का जवाब देने से भी इनकार कर दिया.

समिति के सदस्यों ने भारतीय वायुसेना की एयरस्ट्राइक की सराहना की लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को उचित श्रेय नहीं मिलने पर इसकी आलोचना भी की.

इस बैठक में शामिल एक विपक्षी नेता ने कहा, ‘अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कह रहा है कि हमारी एयरस्ट्राइक का कोई प्रभाव नहीं रहा, कैंप पहले से ही खाली थे और इस हमले में किसी की मौत नहीं हुई. वे हमारी सेना के शौर्य को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. इसलिए हमने विदेश सचिव को बताया है कि इस दुष्प्रचार अभियान को एयरस्ट्राइक से संबद्ध सबूतों को व्यापक स्तर पर उजागर करने से ही रोके जाने की जरूरत है.’

समिति ने गोखले से एयरस्ट्राइक के पीछे की वजह को उजागर करने और भारत में आतंकवाद फैलाने में जैश ए मोहम्मद की भूमिका के बारे में बताने को कहा है.

गोखले ने समिति को आश्वस्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए कूटनयिक दृष्टिकोण अभी भी बना हुआ है. सूत्रों का कहना है कि गोखले ने भारत के लिए ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लमाकि को-ऑपरेशन (ओआईसी) के समर्थन पर भी बात की.