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ओडिशा: सामाजिक कार्यकर्ता गिरफ़्तार, रिहाई के लिए यूएन के विशेष दूत और एनएचआरसी से अपील

ओडिशा के कालाहांडी ज़िले में नियमगिरि सुरक्षा समिति के संयोजक लिंगराज बाग उर्फ आज़ाद को पुलिस ने विकास कार्यों और सीआरपीएफ शिविर की स्थापना में कथित रूप से बाधा डालने के आरोप में गिरफ़्तार किया है.

लिंगराज बाग उर्फ आजाद (फोटो: फेसबुक प्रोफाइल)

लिंगराज बाग उर्फ आजाद (फोटो: फेसबुक)

भवानीपाटना (ओडिशा): पश्चिमी ओडिशा में विकास कार्यों और सीआरपीएफ शिविर की स्थापना में कथित रूप से बाधा डालने के आरोप में बीते बुधवार को गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता लिंगराज बाग उर्फ आज़ाद की रिहाई की मांग जोर पकड़ने लगी है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, शुक्रवार को प्रफुल्ल सामंतरा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ओडिशा सरकार से बिना किसी शर्त उनकी रिहाई की मांग की. कालाहांडी पुलिस ने बुधवार को उन्हें गिरफ्तार किया था.

आज़ाद की रिहाई के संबंध में नरेंद्र मोहंती, चंद्रनाथ दानी और गोपीनाथ मांझी व अन्य कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ओडिशा मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की है.

लोकशक्ति अभियान के अध्यक्ष प्रफुल्ल सामंतरा ने कहा, ‘बुधवार को राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति ने उन्हें (लिंगराज आज़ाद) गिरफ्तार करने के पुलिस के हथकंडों का खुलासा कर दिया.’

उन्होंने कहा, ‘विज्ञप्ति में पहले तो उन्हें नक्सली कहा गया लेकिन बाद में उन्हें कार्यकर्ता बताया गया जो कि नियमगिरी इलाके में बॉक्साइट खदान के खिलाफ बैठकें आयोजित करवाता है. अगर कोई कार्यकर्ता इस इलाके में प्रदर्शन करता है तो यह कोई गुनाह नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘यहां तक की सुप्रीम कोर्ट भी ग्राम सभाओं से कह चुकी है कि वह इसका फैसला करें कि नियमगिरी में खनन होना चाहिए या नहीं. लोगों के पास राज्य द्वारा किए जा रहे गलत कामों के खिलाफ प्रदर्शन करने का अधिकार होना चाहिए. पुलिस ने उन पर नमगढ़ंत आरोप लगाए हैं.’

इससे पहले अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार महंत ने बताया था कि दो आपराधिक मामलों के सिलसिले में बुधवार को लिंगराज बाग उर्फ आजाद को केसिंगा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के कंदेल स्थित उनके गांव से पकड़ा गया.

आजाद ‘नियमगिरि सुरक्षा समिति’ (एनएसएस) के संयोजक हैं, जो पश्चिमी ओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियों को खनन और औद्योगिकीकरण से बचाने के लिए एक आंदोलन चलाते हैं. वह समाजवादी जन परिषद (एसजेपी) और नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट (एनएपीएम) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं.

एएसपी ने बताया था कि उन पर नियमगिरि क्षेत्र में विकास कार्यों में बाधा डालने, त्रिलोचनपुर में सीआरपीएफ शिविर स्थापित करने में व्यवधान पैदा करने, प्रशासन के खिलाफ जनता को उकसाने और लोगों तथा अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने एवं हथियार दिखाकर धमकाने के आरोप लगाये गये हैं.

द हिंदू के अनुसार, कालाहांडी के एसपी बी. गंगाधर ने आज़ाद की गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए बताया था कि पिछले महीने त्रिलोचनपुर गांव में इंडिया रिज़र्व बटालियन कैंप के बाहर हुए एक प्रदर्शन से जुड़े मामले में बीजापुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

वहीं नियमगिरी पहाड़ियों में प्रस्तावित ‘बॉक्साइट खनन’ के खिलाफ आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतारा ने दावा किया था कि ग्रामीण रिज़र्व बटालियन के शिविर का विरोध इसलिए कर रहे थे क्योंकि सुरक्षाकर्मियों ने पदाधिकारियों की सहमति के बिना उनके ग्राम पंचायत कार्यालय पर कब्जा कर लिया था.

आज़ाद पर नियमगिरी की तलहटी में ‘वेदांत एल्यूमिना रिफाइनरी’ के बाहर धरना प्रदर्शन के लिए भी आरोप हैं. इस संबंध में अप्रैल 2017 में लांजीगढ़ पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था.

गिरफ़्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

बुधवार को गिरफ्तारी के बाद नियमगिरी पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासियों के लिए काम करने वाले कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आज़ाद की गिरफ्तारी पर हैरानी जताई थी. एसजेपी और एनएपीएम के कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया था.

एसजेपी के अखिल भारतीय महासचिव अफलातून ने कहा था, ‘हम 11 मार्च को भुवनेश्वर में नियमगिरि पहाड़ियों में अधिकारों के हनन के खिलाफ प्रस्तावित एसजेपी की रैली से ठीक पहले हुई आज़ाद की गिरफ्तारी की निंदा करते हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)