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पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के शिविर पर हमारी कार्रवाई सफल रही: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि अगर पाकिस्तान का यह दावा है कि वह नई सोच के साथ नया पाकिस्तान है तो आतंकवाद के ख़िलाफ़ नई तरह की कार्रवाई का प्रदर्शन भी होना चाहिए.

New Delhi: MEA spokesperson Raveesh Kumar and Air Vice Marshal RGK Kapoor at a media briefing in New Delhi, Wednesday, Feb 27, 2019. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI2_27_2019_000072B)

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार (बाएं) और एयर वाइस मार्शल आरजीके कपूर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भारत ने कहा है कि पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के शिविर पर की गई उसकी कार्रवाई सफल रही और देश ने यह भी दिखा दिया कि वह सीमा पार आतंकवाद के ख़िलाफ़ निर्णायक कार्रवाई करने को प्रतिबद्ध है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘अगर पाकिस्तान का यह दावा है कि वह नई सोच के साथ नया पाकिस्तान है तो आतंकवाद के ख़िलाफ़ नई तरह की कार्रवाई का प्रदर्शन भी होना चाहिए.’

उन्होंने कहा कि भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को लेकर पाकिस्तान ने अब तब कोई गंभीर इरादा नहीं दिखाया है.

रवीश कुमार ने कहा कि भारतीय वायुसेना के विमान मिग 21 बाइसन के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने पाकिस्तानी वायुसेना के एक एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया तथा इसके चश्मदीद गवाह और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमने एएमआरएएएम मिसाइल के टुकड़ों के रूप में सबूत भी साझा किए हैं, जो मौके से बरामद किए गए थे और जिसे (एएमआरएएएम मिसाइल) पाकिस्तानी वायुसेना का केवल एफ-16 विमान ही ले जाने में सक्षम है.’

कुमार ने कहा, ‘हमारी गैर-सैन्य (किसी सैनिक ठिकाने और नागरिक क्षेत्र को निशाना न बनाने) आतंकवाद-रोधी कार्रवाई वांछित उद्देश्य प्राप्त करने में सफल रही. इससे पता चलता है कि हम सीमा पार आतंकवाद के ख़िलाफ़ निर्णायक कार्रवाई करने को प्रतिबद्ध हैं.’

कुमार ने कहा कि हमारे सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की पाकिस्तान की असफल कोशिश के दौरान हमने केवल एक विमान खोया.

उन्होंने कहा, ‘अगर पाकिस्तान के पास भारत का दूसरा विमान गिराने के सबूत हैं, जैसा कि वह दावा करता है तो उसने वे साझा क्यों नहीं किए. पाकिस्तान से सवाल किया जाना चाहिए कि अगर उनसे कोई अन्य भारतीय विमान गिराया है तो उसका क्षतिग्रस्त हिस्सा कहा है और उस पायलट का क्या हुआ, जो उस विमान को उड़ा रहा था.’

कुमार ने कहा कि पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत के साथ खड़ा है.

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अब भी पुलवामा हमले को जैश-ए-मोहम्मद द्वारा अंजाम दिए जाने की बात को नकार रहा है जबकि स्वयं इस आतंकवादी संगठन ने इसकी ज़िम्मेदारी ली है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अज़हर के इस्लामाबाद में होने के सवाल पर रवीश कुमार ने कहा, ‘2001 में संसद पर हमला हो, 2008 में मुंबई हमला हो या पठानकोट एयरबेस पर साल 2016 में हुआ हमला हो, हम एक ही तरह की स्क्रिप्ट देख रहे हैं. पाकिस्तान का दावा है कि उसने आतंकी संगठनों और आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ़ काग़जों तक ही सीमित है. वहां आतंकी संगठन और आतंकी बिना किसी रोक-टोक के अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं.’

रिपोर्ट के अनुसार, कुमार ने इस बात की पुष्टि की कि मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में नई याचिका दाख़िल की है.

मालूम हो कि बीते 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे.

रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह बिना किसी बाधा के अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं और यह बात सार्वजनिक है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर आतंकी शिविर बने हुए हैं.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी ज़मीन से संचालित हो रहे आतंकी समूहों के ख़िलाफ़ ठोस, प्रामाणिक और लगातार कार्रवाई करनी चाहिए.

रवीश कुमार ने कहा, ‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह यकीन दिलाने के लिए दृढ़ हैं कि पाकिस्तान को अपनी कथनी से आगे जाकर आतंकियों के ख़िलाफ़ विश्वसनीय, सही और दीर्घकालिक क़दम उठाने की ज़रूरत है.’

उन्होंने कहा, ‘हम ज़िम्मेदारी के साथ काम करते हैं और आगे भी ऐसा करना जारी रखेंगे. हमारी सेना कड़ी निगरानी जारी रखेगी और देश व यहां के लोगों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी.’

करतारपुर कॉरिडोर को लेकर रवीश कुमार ने कहा, ‘यह सिख धर्म के भारतीय नागरिकों की भावनाओं से जुड़ा मामला है. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि करतारपुर कॉरिडोर को लेकर बातचीत बंद होने का मतलब यह नहीं द्विपक्षीय संबंध बहाल नहीं होंगे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)