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नोटबंदी से पहले आरबीआई ने कहा था, नोट बैन से ख़त्म नहीं होगा काला धन: आरटीआई

आरटीआई से मिली जानकारी में सामने आया है कि आरबीआई निदेशक मंडल ने नोटबंदी प्रभाव को लेकर मोदी सरकार को आगाह करते हुए कहा था कि नोटबंदी से काले धन की समस्या पर कोई ठोस असर नहीं होगा.

A Reserve Bank of India (RBI) logo is seen at the gate of its office in New Delhi, November 9, 2018. Credit: REUTERS/Altaf Hussain

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: केंद्रीय बैंक (भारतीय रिज़र्व बैंक- आरबीआई) के निदेशक मंडल ने देश की आर्थिक वृद्धि पर नोटबंदी का अल्पकालीन नकारात्मक प्रभाव पड़ने को लेकर आगाह किया था और कहा कि इस अप्रत्याशित कदम का काले धन की समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस प्रभाव नहीं पड़ेगा.

निदेशक मंडल में आरबीआई के मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास भी शामिल थे. सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में दिए गए बैठक के ब्योरे के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा को लेकर राष्ट्र को संबोधन से केवल ढाई घंटे पहले आरबीआई निदेशक मंडल की बैठक हुई.

मोदी सरकार के 500 और 1,000 रुपये के नोट को चलन से हटाए जाने के कदम का मुख्य मकसद काला धान पर अंकुश लगाना था. चलन वाले कुल नोट में बड़ी राशि के नोट की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत थी.

ब्योरे के अनुसार, महत्वपूर्ण बैठक में आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल और तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास मौजूद थे.

इसमें शामिल अन्य सदस्य तत्कालीन वित्त सचिव अंजलि छिब दुग्गल, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी और एसएस मूंदड़ा थे. गांधी और मूंदड़ा दोनों अब निदेशक मंडल में शामिल नहीं हैं.

वहीं दास को दिसंबर 2018 में आरबीआई का गवर्नर बनाया गया था. बोर्ड की बैठक में सरकार के नोटबंदी के अनुरोध को मंजूरी दी.

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की तरफ से कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव पर पोस्ट किए गए बैठक ब्योरों (मिनट्स ऑफ मीटिंग) के अनुसार, ‘यह सराहनीय कदम है लेकिन इसका चालू वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद पर अल्पकाल में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.’

निदेशक मंडल की 561वीं बैठक में कहा गया, ‘ज्यादातर काला धन नकद रूप में नहीं है बल्कि सोना और अचल संपत्ति के रूप में है और इस कदम का वैसी संपत्ति पर ठोस असर नहीं होगा.’

Minutes of RBI’s board … by on Scribd

प्रधानमंत्री ने 500 और 1,000 रुपये के नोट को चलन से हटाने की घोषणा की थी जिसका मकसद काले धन पर अंकुश लगाना, नकली मुद्रा पर रोक लगाना तथा आतंकवदी संगठनों के वित्त पोषण पर लगाम लगाना आदि था. नकली नोट के बारे में बैठक में कहा गया था कि कुल 400 करोड़ रुपये इस श्रेणी के अंतर्गत हैं जो कुल मुद्रा का बहुत कम प्रतिशत है.

आठ नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के 15.41 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में थे. इसमें से बैंकों में चलन से हटाए गए नोट को जमा करने के लिए देश के नागरिकों को दिए गए 50 दिन के समय में 15.31 लाख करोड़ रुपये वापस आ गए. प्रवासी भारतीयों के लिए यह समयसीमा जून 2017 थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)