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बिहारः पुलिस हिरासत में दो युवकों की मौत, पांच पुलिसकर्मी निलंबित

बिहार के सीतामढ़ी जिले का मामला. हत्या और लूट के मामले में गिरफ़्तार किए गए गुफ़रान आलम और तसलीम अंसारी नामक युवकों के शरीर पर कीलों से बने घाव के निशान मिले.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: Flickr/CC BY NC ND 2.0)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: Flickr/CC BY NC ND 2.0)

नई दिल्लीः बिहार के सीतामढ़ी में पुलिस हिरासत में दो लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.

आरोप है कि पुलिस की प्रताड़ना की वजह से दोनों युवकों की मौत हुई

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने हत्या और लूट के मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया था. सात मार्च को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर प्रताड़ना के चलते दोनों युवकों की मौत हो गई. घटना से संबंधित तस्वीरों और मृतकों के शरीर धोते वक़्त बनाई गई एक वीडियो क्लिप में उनके शरीर पर लोहे की कीलों ठोके जाने के निशान नज़र आ रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, इन तस्वीरों और वीडियो क्लिप को उनके परिवारवालों ने पुलिस के साथ साझा किया है. इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई है.

बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे ने पुलिस हिरासत में मौत की पुष्टि करते हुए इस घटना को अस्वीकार्य बताया.

उन्होंने कहा, ‘हमने सीतामढ़ी के डुमरा पुलिस थाने के प्रभारी चंद्रभूषण सिंह सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया. उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी. यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो उन्हें बर्ख़ास्त किया जाएगा. हमने सीतामढ़ी के एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.’

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्राथमिकी में अभी तक किसी भी पुलिसकर्मी का नाम दर्ज नहीं है.

छह मार्च के पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि रामाडीह गांव से पुलिस ने मुज़फ़्फ़रपुर के निवासी राकेश कुमार की हत्या और उनकी मोटरसाइकिल चोरी करने के संबंध में गुफ़रान आलम (30) और तसलीम अंसारी (32) को गिरफ़्तार किया.

तसलीम पर पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी में चार आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह जमानत पर बाहर था जबकि गुफ़रान पर कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं था.

रामाडीह गांव भाजपा नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के प्रतिनिधित्व वाली मोतिहारी लोकसभा सीट के तहत आता है.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में गुफ़रान के पिता मुनव्वर अली (58) ने बताया, ‘उस दिन हम सभी सो रहे थे कि स्थानीय चकिया पुलिस थाने की पांच जीप हमारे घर पर आकर रुकी और गुफ़रान के बारे में पूछने लगे.

उन्होंने कहा कि वह एक मामले में गुफ़रान से पूछताछ करना चाहते हैं. इससे पहले कि हम कुछ पूछते, वे उसे पकड़कर ले गए और गांव के एक और शख्स तसलीम अंसारी को भी ले गए.’

मुनव्वर अली अपने भाई सनावर अली और अन्य ग्रामीणों के साथ छह मार्च को तड़के लगभग तीन बजे चकिया पुलिस थाने पहुंचे, लेकिन उन्हें वहां गुफ़रान और तसलीम नहीं मिले.

उन्होंने कहा, ‘हम घर लौटे और कुछ घंटे बाद दोबारा थाने पहुंचे. एक स्थानीय पुलिस मुखबिर ने हमें बताया कि गुफ़रान और तसलीम डुमरा पुलिस थाने में हैं. गुफ़रान मुश्किल से बात कर पा रहा था. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उसे बड़ी बेरहमी से पीटा है और उसके टांगें टूट गई हैं.’

गुफ़रान और तसलीम के परिवारवाले छह मार्च को शाम पांच बजे डुमरा पुलिस थाने पहुंचे.

गुफ़रान के ससुर मोहम्मद अयूब आलम ने कहा, ‘हमने वहां सिर्फ दो महिला कांस्टेबल देखी. जब हमने गुफ़रान और तसलीम के बारे में पूछा तो उन्होंने हमें सदर अस्पताल भेज दिया. वहां, हमें बताया गया कि दोनों की मौत हो चुकी है और उनका पोस्टमार्टम किया जा चुका है. हमें शव तक देखने नहीं दिए गए. हमें अगले दिन शव सौंपे गए.’

रिश्तेदारों का कहना है कि जब शवों को दफनाने के लिए उन्हें धोया जा रहा था तो उनके शरीर पर चोट और प्रताड़ना के निशान दिखाई दिए.

पीड़ित परिवारवालों की कागज़ी कार्रवाई में मदद कर रहे एक कॉलेज छात्र साबिल रूनी ने कहा, ‘हमने इसकी वीडियोग्राफी कर ली है और शवों पर चोट के निशान की तस्वीरें भी हैं. उनके जांघों, तलवों और कलाई पर कीलों से चोट के निशान हैं. दोनों पीड़ितों की टांगें बुरी तरह से घायल थी. हम पूरी जानकारी के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं.’

रिपोर्ट के अनुसार, दोहा की राजधानी कतर में बतौर इलेक्ट्रिशियन काम कर चुके गुफ़रान एक साल पहले ही देश लौटे थे और अब वापस कतर जाने की योजना बना रहे थे, जहां उनके दो भाई बतौर इलेक्टिशियन काम करते हैं. गुफ़रान के दो बच्चे वकफ़ (5) और नेहा तरन्नुम (3) हैं.

मुनव्वर अली ने कहा, ‘मेरे बेटे को दोहा जाने में देरी हो गई क्योंकि वह चाहता था कि इस साल उसके बेटे का स्कूल में दाखिला हो जाए.’

परिवार 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि और गुफ़रान की पत्नी के लिए नौकरी की मांग कर रहा है.

तसलीम का भाई सऊदी अरब में इलेक्टिशियन का काम करता है. गुफ़रान के परिवार का पक्का घर और कृषि भूमि है जबकि तसलीम का परिवार कच्चे घर में रहता है.

तस्लीम के पिता मोलाजिम अंसारी (65) का कहना है, ‘जब पुलिस आई, उस समय रात के लगभग 1:15 बज रहे थे. पुलिस ने हमारा घर उथल-पुथल कर दिया और तसलीम को उठाकर ले गई.’

अंसारी ने कहा, ‘हमारे पास राशन कार्ड नहीं है. इंदिरा आवास के तहत घर भी नही मिला है. यहां तक कि मेरे बेटे पर आपराधिक मामला लगा है, फैसला सुनाना अदालत का काम है. पुलिस कैसे उन्हें मार सकती है? मुख्यमंत्री जिस कानून के राज की बात करते हैं क्या ये वही है?’