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हवस पूरी करने के लिए तीन तलाक़ के ज़रिये बदली जा रही हैं पत्नियां: मंत्री

तीन तलाक़ को लेकर योगी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के विवादित बयान के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण न किया जाए.

maurya modi

(फाइल फोटो: पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम समुदाय से अनुरोध किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण न हो और उम्मीद जताई कि इस प्रथा से निपटने के लिए समुदाय के बुद्धिजीवी ही सामने आयेंगे.

इससे पहले इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुस्लिम बेवजह पत्नियों को तलाक देते हैं. हवस को पूरा करने के लिए तीन तलाक के जरिए पत्नियां बदलते रहने का काम किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘इस मुददे पर भाजपा मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी है. तीन बार तलाक बोलकर पति अपनी ही पत्नी एवं बच्चों को सड़क पर भीख मांगने के लिये छोड़ देते हैं.’

योगी के मंत्री ने कहा कि मुस्लिम बिना कारण, बेवजह और मनमाने तरीके से अपनी पत्नियों को तलाक दे देते हैं. तलाक देकर वह अपनी हवस को पूरा करने का काम कर रहे हैं. तलाक का कोई आधार नहीं होता. अपनी हवस को पूरा करने के लिए इसके जरिए लगातार पत्नियां बदलते रहने का काम किया जा रहा है.

मौर्या के इस बयान के एक दिन बाद शनिवार को कन्नड़ दार्शनिक बसवेश्वर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुये मोदी ने उम्मीद जताई कि भारत के मुसलमान दुनिया भर में अपने समकक्षों को आधुनिकता का मार्ग दिखायेंगे.

उन्होंने कहा, ‘इन दिनों तीन तलाक पर काफी बहस हो रही है. भारत की महान परंपरा को देखते हुये मेरे मन में यह उम्मीद है कि देश में इस समुदाय के प्रभावशाली लोग इस पुरानी हो चुकी व्यवस्था को खत्म करने के लिये आगे आयेंगे और आधुनिक व्यवस्था विकसित करेंगे.’

तीन तलाक के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘यह हमारे देश की मिट्टी की ताकत है कि (मुस्लिम) समुदाय के लोग ही इस परेशानी से हमारी माताओं और बहनों को बचाने के लिये आगे आयेंगे.’

प्रधानमंत्री ने समारोह में मौजूद लोगों से कहा, ‘मैं समुदाय के लोगों से अनुरोध करूंगा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण न होने दें.’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मंत्री स्वामी प्रसाद का बयान ऐसे वक्‍त आया है जब तीन तलाक का मसला सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष लंबित है और वह जल्‍द ही इस पर सुनवाई कर इसकी संवैधानिक वैधानिकता पर फैसला देने वाली है.