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स्मार्ट सिटी: पिछले चार सालों में केवल सात फीसदी राशि जारी कर पाई मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लिए कुल 2267.62 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं मंजूरी की गई थीं लेकिन पिछले चार वर्षों में मात्र 8.63 प्रतिशत यानि 196 करोड़ रुपये की धनराशि ही जारी हो पाई.

(फोटो: पीआईबी)

(फोटो: पीआईबी)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना के लिए पिछले चार सालों में केंद्र सरकार मात्र सात फीसदी राशि ही जारी कर पाई है. जून 2015 में शुरू हुई 2,03,172 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए अब तक मात्र 14,882 करोड़ रुपये ही जारी हुए हैं.

यह जानकारी पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर को आरटीआई के तहत मिली. कपूर ने बताया कि उन्होंने देशभर के स्मार्ट सिटीज के निर्माण के बारे 29 नवंबर 2018 और 4 जनवरी 2019 को आरटीआई लगाई थी.

इस पर भारत सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय (स्मार्ट सिटीज-1 प्रभाग) के केंद्रीय जनसूचना अधिकारी संजय शर्मा ने 18 दिसम्बर 2018 और जनवरी 2019 में सूचना दी.

इस परियोजना के तहत साल 2015-16 में 1467.20 करोड़ रुपये जारी किए गए जबकि साल 2016-17 में यह धनराशि बढ़ाकर 4992.50 करोड़ रुपये कर दी गई.

लेकिन अंतिम दो वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली धनराशि निरन्तर घटती गई. साल 2017-18 में जहां 4552.50 करोड़ रुपये जारी किए गए तो वहीं चौथे वर्ष 2018-19 में 3334 करोड़ रुपये सहित जारी किए गए.

100 स्मार्ट शहरों की घोषणा करने वाली मोदी सरकार ने आरटीआई के जवाब में 110 शहरों के नाम दिए हैं. वहीं इस योजना के तहत कौन-कौन से काम हो रहे हैं केंद्र सरकार को इसकी कोई जानकारी नहीं है.

शर्मा ने आरटीआई के तहत माह जनवरी 2019 के पत्र द्वारा बताया कि यह सूचना सरकार के पास उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि इसे सम्बंधित नगर निगम आयुक्त से प्राप्त किया जा सकता है.

वहीं पिछले चार सालों में शिलांग (मेघालय), डिंडिगुल (तमिलनाडु), अमरावती व ग्रेटर मुंबई (महाराष्ट्र), गाजियाबाद, मेरठ/रायबरेली, रामपुर (यूपी), पश्चिमी बंगाल के दुर्गापुर, हल्दिया व विधाननगर स्मार्ट शहरों को मात्र 2-2 करोड़ रुपये दिए गए.

स्मार्ट सिटी दिल्ली के लिए कुल 2998.27 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई थीं जिनमें से मात्र 6.53 प्रतिशत राशि यानि 196 करोड़ रुपये ही मोदी सरकार ने चार वर्षों में दिए.

हरियाणा में स्मार्ट सिटी फरीदाबाद को कुल 2458.58 करोड़ रुपये के परियोजना में 196 करोड़ रुपये केंद्र सरकार व 194 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिए. स्मार्ट सिटी करनाल को कुल 1211 करोड़ की परियोजना राशि में से 50 करोड़ रुपये केंद्र व 53 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिए.

पश्चिमी बंगाल के तीन शहरों विधान नगर, दुर्गापुर व हल्दिया के लिए पिछले तीन सालों में कोई धनराशि नहीं जारी की गई. साल 2015 में मात्र 2-2 करोड़ रुपये दिए गए. न्यू टाउन कोलकाता को वर्ष 2015-16 में मात्र दो करोड़ रुपये और साल 2018-19 में 50 करोड़ रुपये सहित कुल मात्र 52 करोड़ रुपये दिए गए.

बिहार के चार शहरों को मात्र 411 करोड़ रुपये मिले जबकि पटना के 2497.80 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए मात्र 104 करोड़ रुपये मिले. महाराष्ट्र के 10 शहरों को 1572 करोड़ रुपये मिले जिसमें से थाणे की 5404 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए मात्र 196 करोड़ रुपये मिले.

गुजरात के 6 शहरों को 962 करोड़ रुपये मिले जिसमें से सूरत को कुल 2597 करोड़ के परियोजना में से मात्र 8.92 प्रतिशत यानी 291 करोड़ रुपये मिले. आंध्र प्रदेश के चार शहरों को 877 करोड़ रुपये मिले जिसमें विशाखापट्टनम को 291 करोड़ रुपये मिले. अमृतसर व जालन्धर को 56-56 करोड़ तो लुधियाना को 196 करोड़ रुपये मिले.

मध्य प्रदेश के सात शहरों को 1319 करोड़ रुपये, राजस्थान के 6 शहरों को 1031 करोड़ रुपये, श्रीनगर को कुल 3816 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 52 करोड़ रुपये मिले तो जम्मू को कुल 3459 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 54 करोड़ केंद्र सरकार ने दिए.

कर्नाटक के बेंगलूरू को 1792 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 53 करोड़ रुपये ही मिले, मिजोरम के आईजोल को 2052 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 55 करोड़ रुपये मिले. मणिपुर के इम्फाल को 1344 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 111 करोड़ रुपये ही मिले जबकि उत्तराखंड के देहरादून को 1407 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 56 करोड़ रुपये ही मिले.

इसी प्रकार अरूणाचल प्रदेश के पासी घाट को 1484 करोड़ रुपये में से मात्र 54 करोड़ व ईटानगर को 1343 करोड़ रुपये के परियोजना में से मात्र 52 करोड़ रुपये ही केंद्र सरकार ने दिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कुल 2267.62 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी परियोजना को मंजूरी दी गई थी. हालांकि पिछले चार वर्षों में मात्र 8.63 प्रतिशत यानि 196 करोड़ रुपये की धनराशि ही मिल पाई.

वहां चल रहे कार्यों की स्थिति बारे बताने को कोई भी अधिकारी तैयार नहीं हुआ. डीएम वाराणसी व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को गत 1 जनवरी व 4 जनवरी को दो आरटीआई लगाई गई. आरटीआई का जवाब देने के बजाय दोनों अधिकारियों ने आरटीआई आवेदन को एक-दूसरे के पास भेज दिया.

केंद्र शासित चण्डीगढ़ स्मार्ट शहर के लिए कुल 6800 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई थीं जबकि उसके लिए मात्र 4.35 प्रतिशत यानि 296 करोड़ रुपये ही केंद्र एवं केंद्र शासित सरकार से मिले. इसमें से भारत सरकार ने सिर्फ 196 करोड़ रुपये जबकि चण्डीगढ़ सरकार 100 करोड़ रुपये ही दे पाई.

वहां पर तीन साल में स्मार्ट सिटी मिशन के दफ्तर के नवीनीकरण पर 6.76 करोड़ रुपये खर्च करने के अलावा कोई काम नहीं हुआ. सेक्टर-43 में कुल 4982 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले चार प्रमुख परियोजनाओं (चिल्ड्रन पार्क, शॉपिंग मॉल, फाईव स्टार होटल, आर्ट गैलरी, म्यूजियम (वगैरह) के लिए भूमि का स्टेटस स्पष्ट ना होने से परियोजना रूका हुआ है.

स्मार्ट सिटी करनाल के कुल 1211 करोड़ रुपये के परियोजना में से 50 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने व 53 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिए. इसमें प्रशासनिक व अन्य खर्चों पर 1.45 करोड़ रुपये जारी किए गए.

अभी तक करनाल में 12.52 करोड़ रुपये के चार परियोजना अन्य विभागों के तालमेल से पूरे किए गए, 20.15 करोड़ रुपये के परियोजना अन्य विभागों के तालमेल से चल रहे हैं.

जबकि 125.60 करोड़ रुपये के कार्यों की निविदाएं आमंत्रित की गई हैं. 349.63 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाई जा रही है.

स्मार्ट सिटी  फरीदाबाद को कुल परियोजना राशि 2458.58 करोड़ रुपये में से कुल 390 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. जिसमें से 196 करोड़ रुपये भारत सरकार ने व 194 करोड़ रुपये राज्य सरकार ने दिए.

इनमें से मात्र 28.59 करोड़ रुपये परियोजना पर खर्च किए गए जबकि 4.64 करोड़ रुपये प्रशासनिक व अन्य कामों पर खर्च किए गए.

बता दें कि दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए ब्रिटेन की दो कम्पनियों डीएफआईडी व टीएएससी के साथ भारत सरकार ने वर्ष 2016 व वर्ष 2017 में व फ्रांस की कम्पनी एएफडी से भी समझौते किए हैं. अमेरिकी कंपनी ब्लूमबर्ग फिलेनथ्रपिस भी इस परियोजना में भारत सरकार की सहयोगी है.

बता दें कि प्रचुर जलापूर्ति, निर्बाध बिजली सप्लाई, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, सुचारू पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, विशेषत: निर्धन वर्ग के लिए सस्ते मकानों का निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिकों विशेकर महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा, स्वच्छ प्रशासन, ई-गवर्नैंस, पर्यावरण सुरक्षा आदि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के प्रमुख कार्य हैं.