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दाभोलकर और पानसरे हत्या मामलों की धीमी जांच पर कोर्ट ने पूछा, मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे हत्या मामलों की धीमी जांच पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के पास गृह सहित 11 विभाग हैं लेकिन इस मामले को देखने के लिए उनके पास वक़्त नहीं है.

गोविंद पानसरे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और नरेंद्र दाभोलकर. (फोटो: पीटीआई)

गोविंद पानसरे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और नरेंद्र दाभोलकर. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंधविश्वास के ख़िलाफ़ अलख जगाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या की जांच की गति पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.

बीते गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि क्या इन मामलों का जायज़ा लेने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पास वक़्त नहीं है. जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस बीपी कोलाबावाला की पीठ ने कहा कि यह शर्मनाक है कि तकरीबन हर जांच में अदालत के हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ती है.

हालांकि शुक्रवार को राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि इस संबंध में उनकी ओर से कोई देरी नहीं हुई है.

गौरतलब है कि सीबीआई नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले की जांच कर रही है जबकि महाराष्ट्र सीआईडी गोविंद पानसरे की हत्या के मामले की जांच कर रही है.

कोर्ट ने सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? उनके पास गृह सहित 11 विभाग हैं लेकिन मामले का जायज़ा लेने के लिए उनके पास वक़्त नहीं है. इसके अलावा जांच के बीच आ रहीं अड़चनें हटाने की उनके मातहतों के पास शक्ति नहीं है?’

अदालत ने कहा, ‘यह शर्मनाक है और हमें ऐसा नहीं कहना चाहिए लेकिन अगर कर्नाटक की दुर्भाग्यपूर्ण घटना (सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या) नहीं होनी चाहिए थी और आप लोगों (महाराष्ट्र का प्रशासन) ने कर्नाटक पुलिस का सहयोग नहीं किया, आप इस घटना से अनजान बने रहे.’

सीबीआई के वकील अनिल सिंह ने अदालत को बताया, ‘जांच एजेंसी ने दाभोलकर के हमलावरों की पहचान कर ली है और चार्जशीट भी दाख़िल कर चुकी है.’ उन्होंने कहा कि कर्नाटक पुलिस ने अतिरिक्त जानकारी लेने के लिए सीबीआई को अतिरिक्त वक़्त चाहिए.

फिलहाल अदालत ने दोनों एजेंसियों को दोनों मामलों की आगे की जांच के लिए 26 अप्रैल तक का वक़्त दिया है.

दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि 16 फरवरी 2015 को पानसरे पर कोल्हापुर में गोली मार दी गई थी. बाद में 20 फरवरी को उनका निधन हो गया था.

इस बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने दावा किया कि जहां तक पानसरे हत्या मामले के संबंध में जांच पर फैसला लेने की बात है तो फड़णवीस की ओर से कोई देरी नहीं हुई.

उन्होंने कहा, ‘क़ानून यह साफ़ कहता है कि मुख्यमंत्री या मंत्री को किसी जांच में दख़ल नहीं देनी चाहिए. एक बार हमें आदेश मिल जाए तो हम उच्च न्यायालय के समक्ष अपना रुख़ पेश करेंगे.’

दोगुनी की गई जांच टीम के अधिकारियों की संख्या

इससे पहले सीआईडी के वकील अशोक मुंदारगी ने दलील दी कि जांच एजेंसी ने पानसरे हत्या मामले की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) में शामिल अधिकारियों की संख्या दोगुनी कर दी है.

उन्होंने कहा कि टीम में अब 35 अधिकारी हैं. हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को ख़ारिज करते हुए कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान अदालत की तल्ख़ टिप्पणी के बाद ये दलीलें पेश की गई हैं.

मुंदारगी ने कहा, ‘शीर्ष अधिकारी मामले को गहराई से देख रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में इस संबंध में पांच बैठकें हो चुकी हैं. इसके अलावा फ़रार आरोपियों की जानकारी देने के लिए घोषित की गई इनाम की राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है.’

पीठ ने कहा, ‘क्या आपको लगता है कि लोग पैसों की ख़ातिर आपकी मदद के लिए आएंगे. आप सब जानते हैं कि अपना मुंह बंद रखकर कहीं अधिक रकम पा सकते हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)