नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: पूर्वोत्तर के राज्यों से इस सप्ताह की प्रमुख ख़बरें

इस हफ़्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम और नगालैंड के प्रमुख समाचार.

Imphal Gangrape Protest NE LIVE

इम्फाल में दो स्कूली छात्राओं के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन चल रहा है. (फोटो साभार: एनई लाइव डॉट कॉम)

मणिपुर: इम्फाल में दो स्कूली लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार

राजधानी में दो स्कूली छात्राओं के साथ सात युवाओं द्वारा किए कथित सामूहिक दुष्कर्म ने पूरे शहर को दहला के रख दिया.

बताया जा रहा है कि इन सात आरोपियों में से 6 नाबालिग हैं. स्थानीय ख़बरों के अनुसार ये दोनों लड़कियां अपने दो अन्य दोस्तों के साथ बाइक से पूर्वी इंफाल के खुराई इलाके में मेईतेई नववर्ष पर होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रही थीं, जब इन सातों ने उन पर हमला किया.

इनमें से कुछ कार में थे और कुछ बाइक पर. वहां से उन्होंने इन चारों लड़के-लड़कियों का अपहरण किया गया और उन्हें करीब सात किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर ले जाया गया, जहां आरोपियों ने लड़कों के साथ मारपीट और लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया.

इस घटना के एक दिन बाद 17 अप्रैल को इम्फाल के एक एनजीओ विमेन एक्शन फॉर डेवलपमेंट की प्राथमिकी पर पुलिस ने इन सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. जहां इनमें से एक पुलिस रिमांड पर हैं, बाकी छह नाबालिगों को कोर्ट द्वारा किशोर सुधार गृह भेज दिया गया है.

महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से बोन-डेंसिटी टेस्ट के जरिये इन नाबालिगों आरोपियों की उम्र की जांच करवाने का अनुरोध किया है. वहीं 22 साल के इकलौते बालिग आरोपी को 25 अप्रैल को सेशन कोर्ट में पेश किया गया था, जहां उसने ज़मानत की अर्ज़ी दी थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया. कोर्ट ले जाते समय उस पर महिलाओं के समूह ने हमला करने का प्रयास भी किया.

असम: सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी अपडेट के लिए राशन कार्ड को अवैध घोषित किया

असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीज़न) का काम तेज़ी से चल रहा है पर इससे जुड़े विवादों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. पिछले दिनों गुवाहाटी हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत द्वारा जारी प्रमाण पत्र को एनआरसी अपडेट करने के लिए अवैध बताया था, अब सुप्रीम कोर्ट ने राशन कार्ड को नागरिकता का प्रमाण मानने से मना करा दिया है.

राज्य में एनआरसी अपडेट का काम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही चल रहा है. राज्य सरकार के निवेदन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे पूरा करने की समयसीमा कई बार बढ़ाई गई है. फ़िलहाल इसे पूरा करने के लिए दिसंबर 2017 तक का समय दिया गया है.

इससे जुड़ी याचिकाओं को सुनते हुए जस्टिस रंजन गोगोई और रोहिंटन एफ नरीमन की डिवीज़न बेंच ने यह आदेश दिया. एनआरसी के प्रदेश कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने इस बेंच को बताया कि केंद्र सरकार को लोगों द्वारा राशन कार्ड को नागरिकता प्रमाण पत्र के बतौर लेने पर आपत्ति है.

इससे पहले तरुण गोगोई सरकार ने 11 दस्तावेज़ों को नागरिक प्रमाण पत्र के बतौर स्वीकार किया था, जिसमें राशन कार्ड भी एक था. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में याचिका दायर करने वाले लोग, जैसे एनजीओ असम पब्लिक वर्क्स ने इस पर आपत्ति दर्ज करवाई थी कि राशन कार्ड देश के किसी भी हिस्से में नागरिकता प्रमाण के रूप में मान्य नहीं है. केंद्र ने भी यही आपत्ति ज़ाहिर की है.

हालांकि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसका इरादा गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करना नहीं है पर कोर्ट में उस फैसले के ख़िलाफ़ एक याचिका दायर हो चुकी है. हाईकोर्ट के पंचायत सर्टिफिकेट को अवैध घोषित कर देने के बाद करीब 48 लाख पंचायत के दस्तावेज प्रदेश कोऑर्डिनेटर के दफ्तर में पड़े हैं.

स्थानीय अख़बारों के अनुसार असम राज्य के जमीयत उलेमा ने कहा है कि वे 20 अप्रैल को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद होने वाली परेशानियों से निपटने के लिए क़ानूनी रास्ता तलाशेंगे.

अरुणाचल प्रदेश: चकमा और हाजोंग समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दे सकते- रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में चकमा और हाजोंग समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का कहना था, ‘चकमा और हाजोंग समुदायों का मसला बहुत संवेदनशील है और अरुणाचल प्रदेश में उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दे सकते. मैंने उच्चतम न्यायालय में इस मामले पर एक हलफनामा भी दायर किया है.’

रिजिजू ने भाजपा की दो दिवसीय राज्य कार्यकारी बैठक में कहा कि इस मामले पर वे अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ करेंगे. असम और अरुणाचल सीमा के मुद्दे पर रिजिजू ने कहा कि इस मुद्दे पर वे पहले ही असम एवं अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और संबंधित मंत्रालय को सौहार्दपूर्ण समाधान के साथ आगे आने के लिए लिख चुके हैं.

पार्टी की ओर से जारी विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि अरुणाचल को असम से जोड़ने वाला चार लेन वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 415 जल्द ही वास्तविकता में बदलेगा. साथ ही यह भी बताया गया कि इसके लिए केंद्र सरकार अतिरिक्त पैकेज देने का भी आश्वासन दे चुकी है. गौरतलब है कि दोनों राज्यों को जोड़ने वाला यह राष्ट्रीय राजमार्ग अरुणाचल के बंदरदेवा से असम के गोहपुर तक जाएगा. 59 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग का 15 किमी हिस्सा असम में और 42 किमी अरुणाचल में आएगा.

मिज़ोरम: मुख्यमंत्री ने कहा- मुझे कई बार नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा

भारत के बड़े शहरों में पूर्वोत्तर के लोगों को नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ता है. मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लाल थनहवला का कहना है कि उन्हें अपने देश में कई बार यह भेदभाव झेलना पड़ा है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में 74 वर्षीय लाल थनहवला ने कहा, ‘नस्लीय भेदभाव इस देश की सबसे खराब चीज है. मैंने खुद इसका कई बार सामना किया है. ये मूर्ख लोग हैं जिन्हें अपने देश के बारे में नहीं पता होता है.’

उन्होंने कहा, ‘20-25 साल पहले एक स्वागत समारोह में एक व्यक्ति ने मुझे कहा कि आप भारतीयों की तरह नहीं दिखते हैं. उसके जवाब में मैंने पूछा कि एक वाक्य में आप बताएं भारतीय कैसे दिखते हैं?’

पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने लाल थनहवला का कहना है कि यह सिर्फ आम लोगों की बात नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे राजनेता सभी पार्टियों में है जिनके पास भारत का मूल विचार नहीं है.

वे कहते हैं, ‘आप भाजपा, कांग्रेस या किसी भी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं अगर अपने देश को नहीं जानते हैं तो आप नेता कैसे हैं? इन पार्टियों के बहुत सारे नेता अपने देश के बारे में नहीं जानते हैं, जो कि बहुत मूर्खतापूर्ण है. यह शिक्षा और देशभक्ति की कमी के बारे में बताता है. इससे उनकी मानसिकता पता चलती है.’

नगालैंड: पहले विश्व युद्ध में भाग लेने वाले नगा लेबर कॉर्प्स की याद में कोहिमा में बना स्मारक

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कोहिमा में नगा लेबर कॉर्प्स की स्मृति में लगा स्मारक स्तंभ (फोटो: ट्विटर)

नगा लेबर कॉर्प्स (एनएलसी) के पहले विश्व युद्ध में भाग लेने के एक शताब्दी बाद राज्य सरकार ने कोहिमा में उनके लिए एक स्मारक स्तंभ समर्पित किया.

21 अप्रैल 1917 को एनएलसी के पहले गुट ने विश्वयुद्ध में हिस्सा लेने के लिए यूरोप यात्रा शुरू की थी. कुछ रिपोर्टों के अनुसार ब्रिटिश सरकार ने लगभग 2,000 नगा सैनिकों को नियुक्त किया था, जो दो गुटों में फ्रांस पहुंचे थे. ऐसा बताया जाता है कि बाकी कामों के अलावा उनसे सड़कों की मरम्मत और बचाव कार्य करवाए जाते थे.

23 अप्रैल को इस स्मारक का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री शुरहोज़ेले लिजित्सू ने कहा, ‘हम नगाओं की एकता और कभी न ख़त्म होने वाली दोस्ती की नींव रखने के लिए हमेशा एनएलसी के आभारी रहेंगे. एनएलसी ने हमारे वर्तमान और बेहतर भविष्य के लिए इतिहास रचा. हमें उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए याद रखना है.’ उन्होंने यह भी कहा कि इस स्मारक को इसलिए लगाया गया क्योंकि अब तक उनकी स्मृति में कुछ नहीं किया गया था, बावजूद इसके कि फ्रांस में कुछ ने अपनी जान भी गंवा दी थी.

युद्ध में बचे हुए लोग जून, 1918 में घर लौटे थे. इसके बाद ही एनएलसी के सदस्यों ने कोहिमा और मोकोकचुंग में सामाजिक-राजनीतिक ग्रुप नगा क्लब की स्थापना की थी, जिसने पहली बार नगा नेशनल मूवमेंट की शुरुआत की. 1929 में नागा क्लब ने साइमन कमीशन को एक मेमोरेंडम सौंपा था, जिसमें उन्होंने ब्रिटिशों के भारत छोड़ने के बाद नगाओं को अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता दिए जाने की मांग रखी थी.

लिजित्सू ने यह भी कहा, ‘पहले विश्वयुद्ध मे भेजी गई जनजातियों में नगा वो पहला समूह थे जिन्होंने इकट्ठे होकर एकता से रहने की ज़रूरत समझी थी.’ उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही सरकार एनएलसी की याद में कोहिमा में एक स्मारक और पार्क भी बनवाएगी.

मणिपुर: चार कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल

देशभर में लगातार कांग्रेस नेता अपनी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा का हाथ थाम रहे हैं. पिछले दिनों दिल्ली के कुछ कांग्रेस के कुछ नेताओं के बाद हालिया उदाहरण मणिपुर का है.

मणिपुर में कांग्रेस के चार विधायक बीते दिनों मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की मौजूदगी में सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हुए. मणिपुर भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष समुतिबाला नोंगथाउजम ने समाचार एजेंसी भाषा से बात करते हुए जानकारी दी कि भाजपा में शामिल होने वालों विधायकों में एन हाओकिप, वाई सुरचंद्र सिंह, एस बीरा सिंह और ओ लुखोई सिंह शामिल हैं.

प्रदेश भाजपा कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में उनका जोरदार स्वागत किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा असम के वित्तमंत्री हिमंता बिस्व शर्मा और मणिपुर राज्य भाजपा प्रमुख केबी सिंह समेत कई अन्य नेता भी शामिल हुए. ज्ञात हो कि मार्च में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस विधायक टी श्यामकुमार सिंह और गिनसुआनहाउ पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

नगालैंड: एशिया की सबसे बड़ी बाप्टिस्ट चर्च का उद्घाटन

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नगालैंड में बनी एशिया की सबसे बड़ी बाप्टिस्ट चर्च (फोटो: ट्विटर)

राज्य के ईसाई बहुल ज़ूनहेबोटो शहर में बनी इस चर्च का 22 अप्रैल को उद्घाटन किया गया. समुद्र स्तर से 1,864.9 मीटर की ऊंचाई पर में बनी यह सुमी बाप्टिस्ट चर्च एशिया की सबसे बड़ी चर्च है.

नौ मंजिलों में बंटी इस चर्च में 8,500 लोगों के बैठने की व्यवस्था है. स्थानीय ख़बरों के अनुसार इसका निर्माण में 10 सालों में 3,000 मजदूरों की मदद से किया गया, जिसमें तकरीबन 36 करोड़ रुपये की लागत आई.

चर्च का उद्घाटन करते हुए रेवरेंड सोलोमन रोंगपी ने कहा, ‘ज़ूनहेबोटो के लोग ख़ुशनसीब हैं कि उन्हें एशिया की दूसरी सबसे भव्य चर्च मिली है.’ गौरतलब है कि साउथ कोरिया के सीओल की योइडो फुल चर्च, जो एक पेंटेकोस्टल चर्च है, एशिया की सबसे बड़ी चर्च है. रेवरेंड ने यह भी बताया कि इस चर्च को बनाने में लगा खर्च स्वेच्छा से किए गए दान, हाउस बजट और चर्च में विश्वास करने वालों द्वारा दी गई उनकी एक महीने के तनख्वाह द्वारा पूरा किया गया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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