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स्टिंग ऑपरेशन में कालेधन के इस्तेमाल से चुनाव जीतने की बात कबूल करते दिखे सांसद

टीवी9 भारतवर्ष के एक स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा सासंद फग्गन सिंह कुलस्ते, उदितराज, रामदास तड़स, बहादुर कोली के साथ मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस सांसद एमके राघवन, महाबल मिश्रा, राजद सांसद सरफ़राज़ आलम, गोरखपुर से सपा सांसद प्रवीण निषाद, फुलपूर से सपा सांसद नागेंद्र पटेल, लोजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान और आम आदमी पार्टी सांसद साधू सिंह समेत कई अन्य दलों के सांसद आपराधिक और अनैतिक तरीकों से चुनाव जीतने और काला धन लेने की बात कबूल करते पाए गए.

मधेपुरा सांसद पप्पू यादव, गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद, भाजपा सांसद उदित राज और भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते (ऊपर: बाएं से दाएं). आप सांसद साधु सिंह, कांग्रेस सांसद एपी राघवन, लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान और राजद सांसद सरफ़राज़ आलम (नीचे: बाएं से दाएं). (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

मधेपुरा सांसद पप्पू यादव, गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद, भाजपा सांसद उदित राज और भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते (ऊपर: बाएं से दाएं). आप सांसद साधु सिंह, कांग्रेस सांसद एमके राघवन, लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान और राजद सांसद सरफ़राज़ आलम (नीचे: बाएं से दाएं). (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज़ हो चुका है. 11 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोट डाले जाने शुरू हो जाएंगे. इससे पहले एक निजी समाचार चैनल ने दावा किया है कि उसके स्टिंग ऑपरेशन में कई पार्टियों के सांसद चुनावों में करोड़ों रुपये का कालाधन खर्च करने की बात कबूल करते कैद हो गए हैं.

टीवी9 भारतवर्ष समाचार चैनल ने दावा किया है कि इस स्टिंग ऑपरेशन में मध्य प्रदेश के मंडला से भाजपा सांसद और पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते कैद हुए हैं.

सांसद का दावा है कि पिछले आम चुनाव में यानी 2014 में इन्होंने 12 करोड़ रुपये खर्च किए. सिर्फ रैलियों पर 2 करोड़ से ज्यादा उड़ा दिए. चुनाव प्रचार के लिए गाड़ियों में, विरोधियों के वोट काटने के लिए उम्मीदवार खड़े करने में, मतदाताओं में शराब बांटने में करोड़ों की ब्लैकमनी उड़ा दी.

कुलस्ते कैमरे पर कहते हैं कि करोड़ों की मोटी रकम सिर्फ उनके बंगले पर ही डिलिवर कराई जाए. इसके साथ ही वह यह बात भी कबूल करते हैं कि नागपुर से जबलपुर तक उनका हवाला रैकेट चलता है. 2014 के चुनाव में उन्होंने 12 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद इस बार 15 करोड़ खर्च करने की तैयारी पूरी है.

इससे पहले 1999 में वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री रहने के दौरान वोट फॉर नोट कांड में भी उनका नाम आया था. संसद के अंदर उन्होंने भी नोट की गड्डियां लहराई थीं.

इसके बाद 2005 में सांसद निधि के बदले कमीशन लेते हुए एक न्यूज़ चैनल ने कुलस्ते का स्टिंग ऑपरेशन किया था. उसके बाद उन्होंने 22 जुलाई 2008 को यूपीए सरकार के विश्वासमत के दौरान लोकसभा में नोटों के बंडल लहराए थे. उन्होंने यूपीए पर बहुमत के लिए ख़रीद-फ़रोख़्त का आरोप लगाया. इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

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इसके बाद 2017 में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को लेकर रिश्वत से जुड़े मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय को उनके ख़िलाफ़ शिकायत मिली. सितंबर 2017 में पीएम मोदी ने कुलस्ते को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री पद से हटा दिया.

फग्गन सिंह कुलस्ते का दावा है कि वो कम से कम 10 करोड़ ख़र्च करके आराम से चुनाव लड़ते हैं, जबकि चुनाव आयोग ने ख़र्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये तय की है. मतलब ये कि पिछले लोकसभा चुनाव में कुलस्ते ने तय सीमा से 14-15 गुना ज्यादा खर्च किया.

बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने दावा किया कि वो ख़ुद ही डमी कैंडिडेट्स खड़े करवाते हैं. उन्हें लाखों रुपये ब्लैकमनी देते हैं, ताकि वो चुनाव में उनकी मदद कर सकें.

ये ख़ुलासा भी किया कि चुनाव के लिए बीजेपी हेडक्वार्टर से उन्हें जो फंड मिलता है, वो आयोग की तय सीमा से ज़्यादा है और वो भी कैश.

फग्गन सिंह कुलस्ते के मुताबिक वो चुनाव में खुलकर कालेधन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन संसद में सवालों के बदले भी काला धन मिल जाए, तो उसके लिए भी वो तैयार हैं.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

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इस स्टिंग ऑपरेशन में राजस्थान के भरतपुर लोकसभा सीट से सांसद बहादुर सिंह कोली भी कैद हुए हैं.

सांसद ने बताया कि अगर रैली बड़े नेताओं की हो तो 80 लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं. ये पैसा रैली में लोगों की भीड़ जुटाने में ख़र्च होता है. सांसद ने बताया कि चुनाव लड़ने में 3 करोड़ रुपये तक खर्च हो जाते हैं.

सांसद ने टीवी9 भारतवर्ष के स्पेशल इनवेस्टिगेटिंग टीम के सामने कबूला कि पार्टी से 1 करोड़ तक की मदद मिल जाती है. लेकिन आधा पैसा यानी 50 लाख रुपये हवाला के ज़रिए उन तक पहुंचता है. ज़रूरत पड़ी तो लाखों की ये ब्लैकमनी एंबुलेंस या पुलिस की गाड़ी में भेज दी जाती है.

उन्होंने चुनाव प्रचार में 800 तक गाड़ियों का काफिला लेकर जाने की बात कबूली जिसमें एक गाड़ी के ऊपर एक दिन में 6 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं.

ये दावा भी किया कि नोटबंदी की वजह से इस लोकसभा चुनाव में कोई दिक्कत नहीं आएगी. संसद में सवाल उठाने के लिए वो किसी तरह का चार्ज नहीं लेते हैं. उन्होंने कबूल किया कि पिछली बार वो कालेधन की बदौलत सांसद बने थे और इस बार भी इसी प्रसास में हैं.

वहीं उन्होंने पीएम मोदी की रैली में भीड़ के लिए 10-10 लाख रुपये दिये जाने की बात भी कबूली.

दलित नेता और भाजपा सांसद उदित राज ने कहा कि आज की तारीख में चुनाव सिर्फ और सिर्फ कालाधन से लड़ा जाता है. सांसद ने दावा किया राजनीति में अब कोई ईमानदारी नहीं रह गई है.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

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भाजपा सांसद ने कहा कि जो नेता ईमानदार होने का दावा करता है वो सबसे बड़ा बेईमान है. इतना ही नहीं, सांसद ने खुफिया कैमरे के सामने जमकर जनता को भी गालियां दी.

उदित राज ने कहा कि 2014 लोकसभा चुनाव में 5-7 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से कालाधन तो ख़त्म नहीं हुआ है. देश का कारोबार जरूर तबाह हो गया है.

पांच बार चुनाव जीत कर संसद पहुंचने वाले बिहार के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के प्रमुख हैं. बाहुबली के तौर पर पहचान बनाने वाले पप्पू यादव पर हत्या जैसे संगीन अपराध का मुकदमा चल चुका है.

चुनाव में बजट के खर्चे को लेकर पप्पू यादव ने कहा कि 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने 3.5 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के बीच खर्च किया था. वहीं उनकी पत्नी और कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन का 7-8 खर्च करोड़ खर्च हुआ था जबकि चुनाव आयोग को 47 लाख रुपये खर्च का ब्यौरा दिया.

यादव ने माना कि उन्होंने नोट के दम पर ग़रीबों का फ़ायदा उठाया. चैनल के स्टिंग के अनुसार उन्होंने कहा, ‘आदमी किसी का नहीं होता कुछ भी कर लो. राजनीति का मतलब सेवा-धर्म नहीं दोगलई है. जितना अधिक दोगलई-तेगलई करोगे उतनी अच्छी राजनीति कर सकोगे.’

स्टिंग में पैसा बांटने में खर्च को लेकर पप्पू यादव ने कहा, लगभग 2-2.5 करोड़ तक का खर्च आएगा. पर्सन टू पर्सन ग़रीबों को और यूथ को बांटना होता है.’ उन्होंने कहा कि अभी हम जितना खर्च करेंगे उतना अधिक फ़ायदा होगा.

वहीं चुनाव प्रचार में यात्रा पर खर्च को लेकर पप्पू यादव ने बताया, ‘एक से सवा करोड़ रुपये खर्च हो जाता है. हालांकि रैलियों का खर्च अलग होता है. सिर्फ हेलीकॉप्टर पर 1 करोड़ के लिए खर्च होता है. 2019 में लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च कर जीतने का इरादा है.’

उन्होंने कहा कि बिहार में भले ही शराबबंदी हो लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा इसके बिना तो काम ही नहीं चलता.

स्टिंग में पप्पू यादव बार-बार रंजीता रंजन को भी फंडिंग करने की मांग कर रहे थे. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर हर महीने 10-12 लाख़ रुपये खर्च होता है.

इतना ही नहीं रथ यात्रा निकालने के लिए एक से डेढ़ करोड़ रुपये की अलग से भी मांग की. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां भी लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. इसलिए कुल तीन सांसदों की फंडिंग का प्रबंध करें.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

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टीवी9 भारतवर्ष के इस स्टिंग ऑपरेशन में पंजाब के फ़रीदकोट से आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद साधू सिंह भी पैसा लेने की बात कबूल करते कैद हुए हैं. आम आदमी पार्टी के इस सांसद ने बताया कि पिछली बार की तरह इस बार भी चुनाव में जीत के लिए उसने कोई कसर नहीं छोड़ी है.

साधू सिंह ने कहा, ‘पिछली बार जब चुनाव में उतरे थे तो आम आदमी पार्टी एक आंदोलन थी. अब एक राजनीतिक पार्टी है और पार्टी चलाने के लिए पैसा लेना गुनाह नहीं है.’

उन्होंने कैमरे यह बात कबूल की कि चुनाव जीतने के लिए आम आदमी के वोट को खरीदना भी पड़ता है.

साधू सिंह ने कहा, ‘अगर चुनाव में मदद करनी है तो रकम कैश में दो. विरोधी तो करोड़ों खर्च करते हैं. मुझे भी चुनाव के लिए कम से कम 3 करोड़ रुपये चाहिए.’

हालांकि साधू सिंह के पीए ने स्टिंग में बताया कि उनकी आम आदमी पार्टी वोट नहीं खरीदती है और न ही शराब बांटती है. फिर भी खर्च 2-3 करोड़ से ऊपर का होता है.

उन्होंने बताया कि सबसे ज़्यादा खर्च रैली, बैनर, पोस्टर और झंडे में होता है. यह हमारी अच्छी बात है कि हम चुनाव में शराब और नशे का प्रयोग नहीं करते हैं.

उन्होंने बताया, ‘फ़रीदकोट लोकसभा सीट पर विरोधी दल 27 करोड़ रुपये खर्च करते हैं इसलिए उन्हें भी तीन करोड़ रुपये खर्च करना होता है.’

टीवी9 भारतवर्ष के अनुसार वो तीन करोड़ रुपये कैश लेने को तैयार थे. उन्होंने चेक लेने से यह कहते हुए मना कर दिया कि इससे प्रॉब्लम हो जाएगी. उन्होंने बताया कि चुनाव जीतने के लिए उन्हें तीन-चार डमी कैंडिडेट भी खड़े करने होते हैं.

मार्च 2018 में यूपी की हॉट सीट गोरखपुर के समाजवादी पार्टी के सांसद प्रवीण निषाद यूपी की सियासत में कई साल से सक्रिय निषाद दल के मुखिया संजय निषाद के बेटे हैं.

Praveen Nishad A

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

पिछड़ों की राजनीति करने वाले प्रवीण निषाद भी कालाधन लेने की बात करते हुए कैमरे पर कैद हो गए. 6 साल पहले तक वे राजस्थान की एक कंपनी में प्रोडक्शन इंजीनियर थे.

टीवी9 के  रिपोर्टर्स ने सांसद प्रवीण निषाद के घर पहुंचकर बताया कि वो पॉलिटिकल फंड देने वाली कंपनियों से जुड़े हैं. लिहाज़ा उन्हें चुनाव में करोड़ों रुपये ब्लैकमनी मिल सकता है.

ये सुनते ही समाजवादी पार्टी के सांसद प्रवीण निषाद बताने लगे कि 2018 के उपचुनाव में कैसे उन्होंने दोनों हाथों से करोड़ों का कालधन लुटाया था?

स्टिंग में उन्होंने ये ख़ुलासा भी किया कि इस बार भी लोकसभा चुनाव में करोड़ों का ब्लैकमनी दोनों हाथों से लुटाएंगे. गोरखपुर चुनाव में होने वाले खर्च के बारे में पूछने पर निषाद ने बताया कि लगभग 5-6 करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

फंडिंग के सवाल पर निषाद ने कहा कि जितनी फंडिंग आप करा सकते हैं उतनी करा दीजिए, क्योंकि हमारे पास 2 लोकसभा सीट हैं. एक गोरखपुर और दूसरी पिताजी की महराजगंज सीट.

प्रवीण निषाद ने कहा, ‘मैं तो जीत रहा हूं 100 पर्सेंट, पिताजी का थोड़ा बहुत रिस्क रहेगा तो हम उनको राज्यसभा भेजेंगे.’

पिछले चुनाव में हुए खर्च के बारे में पूछे जाने पर प्रवीण निषाद ने स्टिंग में बताया कि 7-8 करोड़ खर्च हो गए थे. जिसमें लगभग 3.5 करोड़ हमने खर्च किया और 4 करोड़ के आसपास पार्टी ने किया था.

प्रवीण निषाद ने बताया छोटी पार्टियों को मैनेज करना पड़ता है, फिर आख़िर में ग्राम सभाओं को भी हम मैनेज करते हैं.

मैनेज करने के तरीकों पर बताते हुए निषाद ने बताया कि रैलियों में गाड़ी करवाते हैं तो तकरीबन 60-80 लाख रुपये खर्च होते हैं. इसके अलावा नौजवानों को टी-शर्ट, महिलाओं को साड़ियां भी बांटी जाती हैं.

नोटबंदी के बाद कैश मैनेज करने के लिए प्रवीण निषाद ने बताया कि इसके लिए पार्टी का अकाउंट होता है. इसके अलावा थर्ड पार्टी का अकाउंट भी होता है और ट्रस्ट से भी मैनेज किया जाता है. पैसा देने की बात पर निषाद ने कैमरे पर बताया कि हमें कैश दीजिए अगर चेक से जाएगा तो वो तो ऑन रिकॉर्ड होगा, कैश रहेगा तो कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा.

चैनल के अनुसार, ब्लैकमनी के लिए गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद की बेचैनी ऐसी थी कि वो न केवल फ़ौरन बताई हुई फ़र्ज़ी कंपनी से मीटिंग के लिए तैयार हो गए, बल्कि चुनाव का हवाला देकर जल्दी मीटिंग का दबाव भी बनाने लगे. प्रवीण निषाद ने यह भी बताया कि चुनाव में अलग से मिलने वाले फंड के अलावा पार्टी भी फंड देती है.

2018 में लालू यादव की पार्टी राजद के टिकट पर अररिया लोकसभा का उपचुनाव जीतने वाले सरफराज़ आलम भी कैमरे पर चौंकाने वाले खुलासे करते हुए कैद हुए हैं. वे 2019 में अररिया से ही राजद के प्रत्याशी बने हैं.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

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सरफराज़, लालू के खास रहे तसलीमुद्दीन के बेटे हैं. साल 2000 में बिहार के जोकीहाट से आरजेडी के विधायक बने सरफराज़ 2010 और 2015 में जेडीयू के सहारे विधानसभा पहुंचे लेकिन बाद में पार्टी ने उन्हें निकाल दिया और वो लालू की शरण में लौट आए.

दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर कैमरे पर उन्होंने कहा कि चुनाव में दस-बीस करोड़ रुपये का खर्च होने वाला है. इस दौरान उन्होंने अररिया उपचुनाव में 75 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करने के साथ भाजपा पर भी 80 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगाया.

स्टिंग में उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान शराब की होम डिलीवरी करवानी पड़ती है. यही नहीं उन्होंने कैश के हेरफेर में कोई बीच में आया तो उसे गोली मारने की धमकी भी दे डाली.

इस स्टिंग ऑपरेशन में वर्धा से भाजपा सांसद रामदास तड़स भी कैमरे पर कैद हुए हैं. वहीं स्टिंग ऑपरेशन के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए हैं. वह जांच करने के बाद महाराष्‍ट्र चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंपेंगे.

तड़स ने माना कि पिछले चुनाव में उन्‍होंने 10 करोड़ रुपये खर्च किए थे. 2019 में एक बार फिर वर्धा से चुनावी मैदान में उतरने जा रहे तड़स इस बार वह 25 करोड़ रुपये चुनाव में खर्च करने जा रहे हैं.

जब एक फर्जी कंपनी की मदद के बदले में चुनावी खर्च में मदद की पेशकश की गई तो सांसद महोदय 8 करोड़ कैश लेने के लिए तैयार हो गए थे.

2014 में महाराष्ट्र के वर्धा से जीते इस सांसद ने न सिर्फ साफ तौर पर चेक से पैसे लेने से मना कर दिया, बल्कि कैश के बदले संसद में फर्जी कंपनी के फायदे के लिए हर सवाल उठाने को भी राजी हो गए.

स्टिंग में उन्होंने नोट की डिलिवरी दिल्ली में अपने सरकारी बंगले पर करने को कहा. इसके अलावा पैसे पहुंचाने के लिए सांसद पार्लियामेंट स्टिकर वाली कार तक मुहैया कराने को तैयार हो गए.

2014 में पहली बार भाजपा से सांसद बनने वाले लखन लाल साहू ने बताया कि पिछले चुनाव में उन्होंने 15 करोड़ रुपये खर्च किए थे लेकिन दूसरी बार चुनाव में ज़्यादा खर्च करना पड़ता है.

साहू ने खुफिया कैमरे पर बताया कि चुनाव के दौरान वो 400 गाड़ियों का काफिला चलाते हैं. उन्होंने ये भी माना कि वो प्रचार के दौरान लोगों को रुपये बांटते हैं.

उन्होंने कहा कि देश के बड़े नेताओं की रैलियों में करोड़ों रुपये का कालाधन ख़र्च होता है.

साहू बूथ लेवल पर खर्चे गिनाते हुए ये भी बताते हैं कि चाहे वोटर को देना हो या कार्यकर्ता को लेकिन पैसा कैश में ही खर्च होता है. अपने संसदीय क्षेत्र में वो कई तरह की संस्थाओं को ब्लैकमनी बांटते हैं. साहू ने ख़ुलासा किया कि चुनाव के लिए करोड़ों रुपये का काला धन वो अपने बेटे के ज़रिए मंगवाते हैं.

स्टिंग में साहू ने कबूल किया कि वो अपने हाथों से कालाधन ले जाकर अपने कमरे में रखते हैं. इतना ही नहीं ब्लैकमनी लाने-ले जाने के लिए वो अपनी कार का भी बेख़ौफ़ होकर इस्तेमाल करते हैं क्योंकि, वो ख़ुद कह रहे हैं कि उनकी गाड़ी भला कौन रोकेगा?

लखन लाल साहू ने ये तक कह दिया कि नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं. उन्हें सीएम और पीएम का फ़र्क़ नहीं मालूम. इसके साथ ही उन्होंने पैसे लेकर संसद में सवाल उठाने की भी बात कबूली.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

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इस स्टिंग में केरल के कोझिकोड से कांग्रेस के सांसद एमके राघवन भी कैद हुए हैं. एमके राघवन ने चुनाव में अपनी जीत पक्की करने के 20 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कबूल की.

बिहार के समस्तीपुर के सांसद और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान ने कबूला कि उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में 5 करोड़ रुपये खर्च किये थे. साथ ही उनका ये भी दावा है कि बिहार में 6 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी उम्मीदवारों पर पूरे 50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

लोक जनशक्ति पार्टी ने इनको एक बार फिर लोकसभा चुनाव के लिए समस्तीपुर से मैदान में उतारा है. समस्तीपुर में चुनाव पांचवें चरण में है, जिसकी वोटिंग 29 अप्रैल को होगी.

बता दें कि रामचंद्र पासवान तीन बार सांसद रह चुके हैं और चौथी बार मैदान में हैं. पहली बार वह 1999 में सांसद चुने गए. दूसरी बार 2004 में और तीसरी बार 2014 में वो संसद पहुंचे.

दिल्ली के सरकारी निवास पर सांसद रामचंद्र पासवान ने बताया कि चुनाव लड़ने के लिए उन्हें 5 से 10 करोड़ रुपये तक की जरूरत पड़ती है. जबकि पिछले चुनाव में उन्होंने चुनाव आयोग को जो ब्यौरा दिया वो सिर्फ 28 लाख 59 हजार रुपये का था.

फर्जी कंपनी के नुमाइंदे बनकर टीवी9 भारतवर्ष के ख़ुफ़िया रिपोर्टर ने उन्हें 5 करोड़ के इंतजाम करने का भरोसा दिया. शर्त ये थी कि बदले में कंपनी के प्रोजेक्ट में समस्तीपुर में कोई रुकावट न आए. साथ ही जरूरत पड़ने पर सांसद संसद में कंपनी की समस्याओं को उठायें. रामचंद्र पासवान ने इस पर बिना कोई देरी के पूरे सपोर्ट का भरोसा दे दिया. साथ ही कंपनी को फंड दिलाने को भी तैयार हुए.

पैसे कैश में दें या चेक में देने के सवाल पर सांसद ने कैमरे पर कहा कि चेक में लफड़ा होता है, कैश दे दो, ईज़ी है. उन्होंने बताया कैश में वक्त नहीं लगता.

वे दिल्ली या नोएडा कहीं भी पैसा लेने को तैयार थे. उन्होंने पैसे दिल्ली से बिहार पहुंचते का रास्ता भी बताया.

पासवान ने कहा कि कार्यकर्ता सेट होते हैं पैसा ले जाने के लिए. हवाला में दिक्कत होती है. लाखों लोग दिल्ली आते हैं. हर तरह के लोग आते हैं. अमीर-गरीब. इन लोगों को 2 लाख, 5 लाख, 10 लाख देकर पैसे भिजवा दिए जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने स्टिंग ऑपरेशन में बताया कि वोट खरीदने के लिए कैश के अलावा शराब भी बांटने से वो पीछे नहीं हटते. कालेधन की डिलीवरी के लिए उनका पूरा सिस्टम तैयार है. पैसा मिलना पक्का हो तो दिल्ली से हवाई जहाज के रास्ते में लाखों-करोड़ों रुपये उनके घर तक पहुंच सकते हैं.

सांसद ने ये भी खुलासा किया कि चुनाव के मौके पर चुनाव आयोग को झांसा देने के लिए वो अपने ही पैसे की हेराफेरी भी करने से नहीं चूकते. उन्होंने पिछले चुनाव में 7 करोड़ रुपये खर्च करने की बात भी कबूल की.

पंजाब के फ़िरोज़पुर से दो बार सांसद बन चुके अकाली दल के शेर सिंह गुबाया तीसरी बार पार्टी बदलकर संसद पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं. कैमरे पर उन्होंने पिछली बार के चुनाव में 25-30 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा. इसके साथ ही यह भी कहा कि इस बार थोड़ा ज्यादा खर्च होगा.

उन्होंने कहा कि अब हमारे क्षेत्र में हरसिमरत कौर आ गई ना, वो तो पैसे बांट देती है, वैसे तो उसे वोट मिलेंगे नहीं, लेकिन वो पैसे देगी, उसके चलते हमें भी कुछ करना पड़ेगा. उन्होंने सभी 10 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक करोड़ रुपये खर्च करने की बात की.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

शाहजहांपुर से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद, यूपी के पूर्व पंचायती राज्य मंत्री और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रह चुके मिथिलेश कुमार भी कैद हुए हैं.

3 बार विधायक रह चुके मिथिलेश कुमार ने चुनाव का खर्च पूछे जाने पर सीधे 15 करोड़ की मांग की. 2009-2014 के बीच सांसद रह चुके मिथिलेश कुमार ने बताया कि इस दौरान 7.50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे इसलिए अब खर्चा डबल हो गया है.

उन्होंने बताया कि पहले 30 लाख में मीटिंग होती थी अब 50 लाख लगते हैं. पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार के मुताबिक प्रधान से लेकर विधायक तक सबको कैश में ब्लैकमनी देकर ख़रीदना पड़ता है, ताकि वोट मिल सकें.

मिथिलेश कुमार ने बताया कि गाड़ियों और नेता खरीदने में सबसे ज्यादा खर्च आता है. समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार वोटर्स को ख़रीदने के बजाय सीधे क्षेत्रीय नेताओं को ख़रीदने का दावा करते हैं. इसके अलावा जीत पक्की करने के लिए वो काले धन से ख़रीदी गई शराब भी बंटवाते हैं. मिथिलेश कुमार ने बताया कि 50 हजार रुपये की दारू हम 3 दिन में बंटवा देते हैं.

स्टिंग ऑपरेशन में शाहजहांपुर से इस बार बसपा  के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे मिथिलेश कुमार का दावा है कि उनका टिकट 6 करोड़ रुपये में तय हुआ है. मिथिलेश कुमार ने ये भी बता दिया कि 6 करोड़ में बसपा से जो टिकट का सौदा हुआ है, उसके लिए 2 करोड़ रुपये एडवांस मांगे गए हैं.

उन्होंने कैमरे पर कहा कि टिकट ख़रीदने के लिए उन्हें करोड़ों रुपये ब्लैकमनी चाहिए. ये सारा कालाधन वो हवाला के ज़रिए लेने को तैयार हो गए. पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार सांसद बनने के बाद ब्लैकमनी लेकर लोकसभा में सवाल पूछने के लिए भी तैयार हो गए.

इस स्टिंग ऑपरेशन में कांग्रेस के बड़े नेता और पश्चिमी दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा भी बेनकाब हुए हैं. रिपोर्टर्स महाबल मिश्रा से उनके स्थायी निवास पर मिले. दिल्ली में 100 करोड़ के एक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा. बदले में उन्हें चुनाव में फंडिंग का भरोसा दिया.

कमरे में महाबल मिश्रा ने कहा कि 2014 के चुनाव में उन्होंने 15 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे. दिल्ली की लोकसभा सीटों के लिए एक उम्मीदवार को ज्यादा से ज़्यादा 70 लाख खर्च करने की छूट है. यानी महाबल मिश्रा ने इससे 21 गुना ज़्यादा रकम खर्च कर दी.

कांग्रेस नेता महाबल मिश्रा ने जवाब दिया कि उनके दोस्त और शुभचिंतक इस पैसे की व्यवस्था करते हैं. उन्होंने ये भी खुलासा किया कि वो चेक नहीं लेते बल्कि कैश में ही पैसा लेते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में महाबल मिश्रा बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा के हाथों हार गए थे.

(नोट: द वायर ‘टीवी9 भारतवर्ष’ समाचार चैनल के इस स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)