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असमः गोमांस बेचने के शक़ में मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट मामले में आठ गिरफ़्तार

असम के बिश्वनाथ जिले में पिछले सप्ताह एक मुस्लिम शख्स के साथ मारपीट की गई थी और उसे जबरन सुअर का मांस खिलाया गया था.

(फोटो साभार: यूट्यूब वीडियो)

पीड़ित शख़्स शौकत अली (फोटो साभार: यूट्यूब वीडियो)

गुवाहाटीः असम में कथित तौर पर गोमांस बेचने के शक में एक मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट मामले में असम पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है.

असम के बिश्वनाथ जिले में पिछले सप्ताह एक मुस्लिम शख्स के साथ मारपीट की गई थी और उसे जबरन सुअर का मांस खिलाया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया.

उन्होंने कहा, ‘हम इस घटना में शामिल किसी को भी नहीं बख्शेंगे. यह धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है. धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का सख्ती से पालन किया जाएगा. ‘

इस बीच पीड़ित के परिवार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि मेडिकल जांच के बाद अली को हिरासत में क्यों रखा गया? अली ने बताया कि बिश्वनाथ जिले में साप्ताहिक बाजार में दो मैनेजर के साथ वह दुकान चलाते हैं. उन्हें पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया और अगली सुबह रिहा किया गया.

परिवार के सवालों का जवाब देते हुए बिश्वनाथ के पुलिस महानिरीक्षक राकेश रौशन ने कहा, यह सच नहीं है. उन्हें हिरासत में नहीं रखा गया. वह हमारी सुरक्षात्मक हिरासत में थे क्योंकि क्षेत्र में तनाव था, उनकी जान को खतरा था. दो लोगों की मौजूदगी में उनकी मेडिकल जांच की गई.

गौरतलब है कि असम के बिश्वनाथ जिले में कथित तौर पर गोमांस बेचने के शक़ में भीड़ ने एक मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट की थी. पीड़ित की पहचान शौकत अली के रूप में की गई.

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें पीड़ित को कीचड़ में घुटनों के बल बैठे देखा जा सकता है.

वीडियो में भीड़ पीड़ित से पूछती दिखाई देती है कि वह गोमांस क्यों बेच रहा था. भीड़ को पीड़ित से यह पूछते देखा जा सकता है कि क्या तुम्हारे पास बीफ बेचने का लाइसेंस है?

भीड़ पीड़ित से उसकी नागरिकता को लेकर भी सवाल पूछ रही है. भीड़ उससे पूछती है. क्या तुम बांग्लादेशी हो? क्या तुम्हारा नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) में है?

मालूम हो कि असम में एनआरसी तैयार किया जा रहा है, जिसमें दर्ज शख्स को ही भारत का नागरिक माना जाएगा.

अली के परिवार का कहना है कि उनके पूरे परिवार का नाम पिछले साल ही एनआरसी में दर्ज हो गया था.