राजनीति

उत्तर प्रदेश में बसपा द्वारा बांटे गए टिकट जातीय समीकरण साधने की ओर इशारा करते हैं

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों व क्षत्रियों को टिकट देने से पहरेज करने वाली बसपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिल खोलकर ब्राह्मणों को टिकट दिया है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जातीय समीकरणों को देखते हुए पार्टी प्रमुख मायावती ने ख़ुद ऐसा करने का निर्देश दिया था.

Mayawati_PTI

बसपा सुप्रीमो मायावती (फोटो: पीटीआई)

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से रविवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश की 16 लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी की गई.पार्टी का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पहले चरण से शुरू हुआ दलित मुस्लिम (डीएम) फैक्टर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंचते पहुंचते सोशल इंजीनियरिंग में आकर बदल गया.

बसपा प्रमुख मायावती ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की जो सूची जारी की है उसमें से चार ब्राह्मण और एक क्षत्रिय प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाया है. जिन चार सीटों पर पार्टी ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा है, उसमें से प्रतापगढ़ ऐसी सीट है जिस पर पिछले चुनाव में बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा था.

लेकिन इस बार इस सीट पर भी बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी को हटा कर ब्राह्मण प्रत्याशी को वरीयता दी है. प्रतापगढ़ से सटी सुल्तानपुर सीट पर पार्टी ने इस बार बाहुबली क्षत्रिय प्रत्याशी पर दांव लगाया गया है. जबकि सुल्तानपुर से पिछला चुनाव ब्राह्मण प्रत्याशी को बसपा ने लड़ाया था.

जातीय समीकरण साधने की कोशिश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों व क्षत्रियों को टिकट देने से पहरेज करने वाली बसपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिल खोलकर ब्राह्मणों को टिकट दिया है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जातीय समीकरणों को देखते हुए पार्टी प्रमुख मायावती ने खुद ऐसा करने का निर्देश नेताओं को दिया था.

उक्त नेता बताते हैं कि बहन जी कैसरगंज लोकसभा सीट भी अपने पक्ष में चाहती थीं ताकि वहां से भी किसी ब्राह्मण प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया जा सके क्योंकि कैसरगंज लोकसभा सीट पर भी ब्राह्मण वोटरों की संख्या साढ़े तीन लाख से ऊपर है. लेकिन सपा से तालमेल न बन पाने के कारण मायावती को निराशा हाथ लगी.

पार्टी ने प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर और भदोही से ब्राह्मण प्रत्याशियों को उतारा है. प्रतापगढ़ सीट से बसपा ने पिछला चुनाव आसिफ निजामुद्दीन को लड़ाया था, जो करीब दो लाख वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे. भाजपा समर्थित अपना दल के प्रत्याशी को यहां से जीत हासिल हुई थी.

इस बार पार्टी ने निजामुद्दीन के स्थान पर अशोक कुमार त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. त्रिपाठी ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करीब दो साल पूर्व विधानसभा चुनाव के समय की थी. वे अरुणाचल प्रदेश पुलिस की इंटेलिजेंस विंग में कार्यरत थे.

प्रतापगढ़ सीट पर करीब तेरह प्रतिशत ब्राह्मण, बाइस प्रतिशत दलित और सत्रह प्रतिशत मुस्लिम मतदाता है. भाजपा ने भी इस सीट पर अपना प्रत्याशी सोमवार को घोषित कर दिया है. भाजपा ने यहां से संगमलाल गुप्ता को अपना प्रत्याशी बनाया है.

प्रतापगढ़ से सटी हुई सुल्तानपुर सीट की बात करें तो बसपा ने यहां पर पूर्व बाहुबली विधायक चंद्रभद्र सिंह उर्फ़ सोनू सिंह को मैदान में उतारा है. बसपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट से पवन पांडेय को चुनाव लड़ाया था.

टिकट न मिलने से नाराज पवन पांडेय इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी का समर्थन करते दिख रहे हैं. पांडेय ने सोनू सिंह के खिलाफ पत्र जारी कर लोगों से भाजपा प्रत्याशी को जिताने की अपील की है.

पवन पांडेय कहते हैं कि बसपा ने यहां सामंतवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले प्रत्याशी को मैदान में उतार दिया है. जो दलितों, पिछडों व समाज के कमजोर वर्ग पर लगातार अत्याचार ही करता रहा है. यही कारण है कि मैं इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का समर्थन खुल के कर रहा हूं. बसपा को इस सीट पर भितरघात का सामना करना पड़ रहा है.

सुल्तानपुर के करीब अंबेडकरनगर सीट से बसपा ने रीतेश पांडेय को प्रत्याशी बनाया है. रीतेश वर्तमान में पार्टी के विधायक हैं और उनके पिता राकेश पांडेय ने पिछला लोकसभा चुनाव इस सीट से लड़ा था. राकेश पांडेय को पिछले चुनाव में करीब तीन लाख वोट मिले थे और वे दूसरे स्थान पर थे.

मजेदारबात ये है कि पांडेय परिवार अंबेडकरनगर में हाथी का झंडा बुलंद कर रहा है तो राकेश पांडेय के सगे भाई पवन पांडेय सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी के पक्ष में खुलकर माहौल बना रहे हैं.

गोरखपुर से सटे संतकबीरनगर जिले को लेकर बसपा के नेता काफी आश्वस्त हैं. इस सीट पर पार्टी ने पुराने चेहरे कुशल तिवारी पर ही भरोसा जताया है. कुशल तिवारी पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी के पुत्र हैं.कुशल इस सीट से सांसद भी रह चुके हैं.

इस सीट से पिछला चुनाव भाजपा के शरद त्रिपाठी जीते थे. कुछ दिन पूर्व शरद त्रिपाठी ने बैठक के दौरान अपनी ही पार्टी के एक विधायक पर जूते से हमला कर दिया था, जिसे लेकर जिले में भाजपा के कार्यकर्ता दो खेमों में बंट गए हैं.

अपनी ही पार्टी के विधायक को जूते से पीटने वाले शरद त्रिपाठी भाजपा के बड़े नेता रमापति राम त्रिपाठी के बेटे हैं. फिलहाल भाजपा ने सोमवार को जो सूची जारी की है उसमें शरद त्रिपाठी का टिकट काट दिया है. संतकबीर नगर से शरद का टिकट काटकर पार्टी ने उनके पिता रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से टिकट दिया है.

भदोही सीट पर बसपा ने पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को मैदान में उतारा है. पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट से पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी को उतारा था. त्रिपाठी को यहां करीब ढाई लाख वोट मिले थे और वे दूसरे स्थान पर थे.

पूर्वांचल की दो सीटों पर बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. दबंगों से दूरी बनाकर चलने वाली मायावती ने गाजीपुर लोकसभा सीट से जेल में बंद मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को टिकट दिया है.

अफजाल ने पिछला लोकसभा चुनाव कौमी एकता दल के टिकट पर बलिया से लड़ा था. गाजीपुर में चार लाख के करीब दलित और ढाई लाख के करीब ब्राह्मण व क्षत्रिय मतदाता है. इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की बात करें तो उनकी संख्या करीब पौने दो लाख के आसपास है.

डुमरियागंज सीट पर भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारते हुए बसपा ने आफताब आलम को टिकट दिया है. बसपा की अंतिम सूची में तीन रिजर्व सीटें भी शामिल हैं. इनमें से दो सीटों पर इस बार पार्टी ने अपने प्रत्याशियों को बदल दिया है.

बसपा प्रमुख मायावती के करीबी रहे लोक निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर टी. राम को पार्टी ने मछलीशहर सीट से मैदान में उतारा है. इस सीट से पिछला चुनाव बीपी सरोज लड़े थे और करीब पौने तीन लाख वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे.

इसी तरह लालगंज सुरक्षित सीट से पार्टी ने इस बार संगीता को प्रत्याशी बनाया है. जबकि पिछले चुनाव में पार्टी ने डॉक्टर बलिराम पर भरोसा जताया था. बलिराम पिछले चुनाव में इस सीट पर तीसरे स्थान पर थे. उन्हें पार्टी के पुराने व कद्दावर नेताओं में शामिल किया जाता है.

बांसगांव सुरक्षित सीट पर पुराने प्रत्याशी सदल प्रसाद पर ही पार्टी ने इस बार भी भरोसा जताया है. सलेमपुर सीट की बात करें तो यहां से बसपा ने यूपी के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को मैदान में उतारा है. इसके साथ ही जौनपुर लोकसभा सीट से पूर्व पीसीएस अधिकारी श्याम सिंह यादव हाथी की सवारी कर संसद तक पहुंचना चाहते हैं.

जानकार बताते हैं कि यादव चुनाव लड़ने के लिए ही कुछ दिन पूर्व पार्टी में शामिल हुए हैं. पार्टी ने घोसी से अतुल राय, देवरिया से विनोद कुमार जयसवाल, बस्ती से राम प्रसाद चौधरी और श्रावस्ती से राम शिरोमणि वर्मा को मैदान में उतारा है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)