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बिहारः जेल में महिला कैदियों के यौन शोषण के आरोप के बाद जांच समिति का गठन

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के केंद्रीय कारावास में सज़ा काट चुकी एक महिला ने बीते दिनों प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि जेल में महिला बंदियों को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है और ऐसा न करने पर उनकी बेरहमी से पिटाई की जाती है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मुज़फ़्फ़रपुरः बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक महिला कैदी द्वारा जेल में यौन शोषण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के बाद क्षेत्र के जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद जिलाधिकारी ने इस समिति का गठन किया है.

मालूम हो कि मुज़फ़्फ़रपुर की शहीद खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में बंद रही महिला ने जेल प्रशासन द्वारा उसके और उसकी बेटी के यौन शोषण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था.

जिलाधिकारी ने कहा, ‘जांच दल को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है. इस समिति में इंटेग्रेटिड चाइल्ड डेवलेपमेंट सर्विसेज (आईसीडीसी) की डीपीओ ललिता कुमारी, मुशहरी की सीडीपीओ मंजू कुमारी,  महिला विकास निगम के डीपीएम मोहम्मद गौस अली हैदर, महिला हेल्पलाइन की सलाहकार पूर्णिमा कुमारी और संस्थान के वरिष्ठ एडीएम प्रतिभा सिन्हा शामिल हैं.’

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महिला कैदी की यौन शोषण की शिकायत पर जांच का आदेश देने के लिए जारी पत्र (फोटो साभार: एएनआई)

गौरतलब है कि शिकायतकर्ता महिला, उसकी बेटी और पति को मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस ने 27 सितंबर 2018 को कथित देह व्यापार के मामले में गिरफ्तार किया था. तीनों को इस साल 26 मार्च को ही जमानत पर रिहा किया गया है.

रिहा होने के तुरंत बाद महिला ने 28 मार्च को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, जिसमें महिला ने आरोप लगाया गया था कि जेल अधीक्षक आमतौर पर महिला कैदियों का यौन शोषण करता था. महिला ने अपने पत्र की एक कॉपी राज्य के महिला आयोग, मुख्यमंत्री कार्यालय और आईजी (जेल) को भी भेजी है.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में महिला कैदी ने कहा है कि जेल में महिला बंदियों को शारीरिक संबंध बनाने को मजबूर किया जाता है. पदाधिकारियों और राइटर (वो बंदी, जो जेल प्रशासन के कार्यालय में लिखा-पढ़ी का काम करते हैं) से संबंध नहीं बनाने पर पीटा जाता है, जो समर्पण कर देती हैं, उन्हें मोबाइल से बात करने समेत अन्य सुविधाएं दी जाती हैं.

सभी कैदियों को शाम 6 बजे अंदर कर दिया जाता है लेकिन राइटर को देर रात तक बाहर रहने की छूट है. वे देर रात महिला खंड में आते हैं. उनके साथ महिला बंदी को देर रात बाहर भेज दिया जाता है. इसके बाद उसका शारीरिक शोषण किया जाता है.

बेटी के साथ जेल में बंद इस महिला बंदी के अनुसार पदाधिकारियों और राइटर के साथ संबंध बनाने का विरोध करने पर खाना नहीं दिया जाता है.

उन्होंने इस पत्र में कहा गया, जेल के राइटर मुझे जेल प्रशासन के कहे अनुसार काम करने को कहते थे. उन्होंने मेरी बेटी को जेल अधिकारियों के पास भेजने के लिए भी मुझ पर दबाव बनाया. जब भी मैंने इनकार किया, वे बांस की छड़ी से हमारी पिटाई करते थे. इस काम में तीन महिला कॉन्स्टेबल भी थीं.

महिला ने आरोप लगाया कि वह इस साल चार मार्च को पिटाई के बाद बेहोश हो गई थी क्योंकि जेल अधीक्षक के पास अपनी बेटी को न भेजने को लेकर एक कॉन्स्टेबल ने उन्हें बेरहमी से मारा था.

जेल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया. आईजी (जेल) मिथिलेश मिश्रा ने कहा कि उन्होंने मुज़फ़्फ़रपुर के जिलाधिकारी को इस मामले की जांच को कहा है.

दैनिक भास्कर के मुताबिक, इस मामले पर बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जेल में जाकर जांच करने और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है.