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सेना द्वारा मानव ढाल बनाए गए फ़ारूक़ अहमद डार की लोकसभा चुनाव में लगी ड्यूटी

साल 2017 में 9 अप्रैल को श्रीनगर-बडगाम संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान मेजर लीतुल गोगाई ने अपनी जीप के आगे फ़ारूक़ अहमद डार को मानव ढाल के तौर पर बांधकर तकरीबन 28 गांवों में घुमाया था.

Farooq-Ahnmad-Dar

फ़ारूक़ अहमद डार (फोटोः वीडियो स्क्रीनशॉट)

उलटिगम/बड़गाम: लगभग दो साल पहले श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के दौरान जिस फ़ारूक़ अहमद डार को पत्थरबाजों से बचने के लिए मानव ढाल के तौर पर सेना की जीप के बोनट पर बांध कर कई किलोमीटर तक घुमाया गया था, बीते गुरुवार को हुए दूसरे चरण के चुनाव में उन्हें चुनावी ड्यूटी पर लगाया गया था.

बडगाम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नज़ीर अहमद ने बीते गुरुवार को बताया, ‘फ़ारूक़ अहमद डार स्वास्थ्य विभाग में बतौर सफाईकर्मी तैनात हैं. उनकी चुनाव के दौरान ड्यूटी लगाई गई है.’

गुरुवार को बडगाम ज़िले के उलटिगम मतदान केंद्र पर मतदान शुरू होने के बाद 1,016 पंजीकृत मतदाताओं में से सिर्फ दो मतदाताओं ने ही शुरुआती 100 मिनट में वोट डाला.

साल 2017 में एक युवक को जीप के आगे बांधकर घुमाने के मामले में कश्मीर पुलिस ने भारतीय सेना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है. कश्मीरी युवक को आर्मी की जीप से बांधकर घुमाने का वीडियो 13 अप्रैल को सामने आया था. इस युवक की पहचान फ़ारूक़ अहमद डार के रूप में हुई थी.

यह घटना 9 अप्रैल को श्रीनगर-बडगाम संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान हुई थी. बडगाम में पत्थरबाजों से बचने के लिए 53 राष्ट्रीय राइफल्स ने अपनी जीप के आगे फ़ारूक़ को मानव ढाल के तौर पर बांध दिया था. राष्ट्रीय राइफल के मेजर लीतुल गोगोई के नेतृत्व में ये सब हुआ था.

जांच में पता चला कि वह उपचुनाव में वोट डालने के बाद अपनी बहन के घर किसी शोक सभा में शामिल होने के लिए जा रहे थे कि सेना ने उन्हें पकड़ लिया और रस्सी से जीप के बोनट पर बांधकर लगभग 28 गांवों में पांच घंटे तक घुमाया था.

सेना के ऐसा करने का मकसद उन संभावित प्रदर्शनकारियों को डराना था, जिनकी पेट्रोलिंग कर रही सेना की टुकड़ी से भिड़ंत हो सकती थी. उस दिन उपचुनाव की वोटिंग में कश्मीर के चुनावी इतिहास का सबसे कम (7%) मतदान हुआ था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उनके संवाददाता ने फ़ारूक़ अहमद डार के गांव छैल-ब्रास का दौरा किया था, लेकिन डार घर पर नहीं थे. उनकी मां फ़ाज़ी बेग़म ने बताया, ‘वह चुनावी ड्यूटी के लिए गया है.’

उन्होंने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग में डार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में तैनात हैं और बुधवार से उनकी चुनाव ड्यूटी लगी है.

यह पूछने पर कि क्या उनके परिवार के लोगों ने वोट दिया. इस पर फ़ाज़ी बेगम ने कहा, ‘दो साल पहले वोटिंग की वजह से मैंने अपने बेटे को लगभग खो दिया था. क्या आपको लगता है कि हम वोट करने दोबारा जाएं?’

65 वर्षीय फ़ाज़ी बेगम ने बताया, ‘सेना के लोगों ने जब से उसे (फ़ारूक़) जीप पर बांधा है, उसका अंगूठा ख़राब हो गया है. अब वह शॉल बनाने का काम नहीं कर सकता.’

राज्य के मानवाधिकार आयोग ने डार को 10 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का ऐलान किया था लेकिन राज्य सरकार ने उसका भुगतान करने से इनकार कर दिया.

फ़ाज़ी बेगम ने कहा, ‘हमें सरकार से कोई मदद नहीं मिली. तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्य के मानवाधिकार आयोग के फैसले का सम्मान नहीं किया.’ अब उन्हें अदालत से उम्मीद है, जहां मामला विचाराधीन है.

मालूम हो कि फ़ारूक़ अहमद डार को मानव ढाल बनाने वाले मेजर लीतुल गोगोई के ख़िलाफ़ एक अन्य मामले में सेना की ओर से कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी चल रही थी. हाल ही में उनके ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई.

आर्मी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (सीओआई) ने पिछले साल 23 मई को श्रीनगर के एक होटल में हुई घटना में मेजर गोगोई और उनके चालक को दोषी ठहराने के बाद मेजर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी.

अपनी यूनिट से अनाधिकृत रूप से गैरहाजिर रहने की वजह से मेजर गोगोई के ड्राइवर समीर मल्ला के कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया भी हाल ही में कश्मीर घाटी में पूरी हुई है. इस साल फरवरी माह में मेजर गोगोई और उनके ड्राइवर के ख़िलाफ़ सबूत पूरे होने के बाद कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू की गई थी. दोनों को एक महिला से दोस्ती और ड्यूटी स्थल से दूर होने का दोषी पाया गया था.