राजनीति

हेमंत करकरे शहीद, लेकिन एटीएस प्रमुख के रूप में उनका काम सही नहीं था: सुमित्रा महाजन

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘हेमंत करकरे के दो पहलू हैं. वह शहीद हुए क्योंकि ड्यूटी पर तैनाती के दौरान उनकी मौत हुई, लेकिन एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका सही नहीं थी.’

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन. (फोटो: पीटीआई)

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: 2008 मालेगांव बम धमाके की आरोपी और भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे पर विवादित टिप्पणी के बाद अब लोकसभा स्पीकर और इंदौर से आठ बार की भाजपा सांसद सुमित्रा महाजन ने करकरे पर बयान दिया है.

महाजन ने बीते सोमवार को कहा कि हेमंत करकरे इसलिए शहीद हुए क्योंकि ड्यूटी पर तैनाती के वक्त उनकी मौत हुई, लेकिन महाराष्ट्र आतंकरोधी दस्ता के प्रमुख के रूप में उनका काम उत्कृष्ट नहीं था.

सुमित्रा महाजन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘हेमंत करकरे के दो पहलू हैं. वह शहीद हुए क्योंकि ड्यूटी पर तैनाती के दौरान उनकी मौत हुई, लेकिन एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका सही नहीं थी, हमारा कहना है कि यह सही नहीं है.’

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि उनके पास कोई सबूत नहीं है लेकिन उन्होंने सुना है कि कांग्रेस नेता और भोपाल से पार्टी के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह करकरे के दोस्त थे. उन्होंने कहा कि जब सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने अक्सर आरएसएस पर बम बनाने और आतंकी संगठन होने का आरोप लगाया.

महाजन ने आरोप लगाया कि इंदौर से महाराष्ट्र एटीएस द्वारा की गई गिरफ्तारी पूर्व सीएम के इशारे पर हुई थी.

इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, दिग्विजय ने ट्वीट किया, ‘सुमित्रा ताई, मुझे गर्व है कि आप मुझे अशोक चक्र विजेता शहीद हेमंत करकरे के साथ जोड़ रही हैं. आपके सहयोगी उनका अपमान कर सकते हैं, लेकिन मैंने हमेशा देश के हित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के बारे में बात करने वालों का समर्थन किया है.’

महाजन ने यह भी कहा कि प्रज्ञा ठाकुर हिरासत में प्रताड़ित होने वाली अकेली नहीं थीं और उन्होंने दिलीप पाटीदार का उदाहरण दिया, जिन्हें नवंबर 2008 में इंदौर से महाराष्ट्र एटीएस ने पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया था.

उन्होंने कहा कि पाटीदार कभी नहीं लौटे, और उनके लापता होने का मुद्दा लोकसभा और अदालत में उठा था. महाजन ने आरोप लगाया कि वह पुलिस हिरासत में मारे गए. उन्होंने कहा, ‘ये तथ्य हैं, किसी को इस पर जवाब देना चाहिए.’

सुमित्रा महाजन ने एक मराठी टीवी चैनल पर भी कुछ ऐसी ही टिप्पणी की थी.

दिग्विजय ने भी ट्वीट किया, ‘मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री के रूप में मैंने बजरंग दल और सिमी दोनों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करने का साहस किया. मैंने देश को शीर्ष पर रखा, नीच राजनीति को नहीं.’