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सीजेआई यौन उत्पीड़न: शिकायतकर्ता ने कहा- न्याय मिलने की संभावना नहीं, जांच समिति में पेश होने से इनकार

सीजेआई यौन उत्पीड़न मामले में शिकायतकर्ता महिला ने कहा कि शुरुआत में मुझे लगता था कि जज निष्पक्ष जांच करेंगे लेकिन तीन सुनवाइयों के बाद लगा कि जज मेरी शिकायत को संवेदनशीलता से नहीं बल्कि शक की नजरों से अधिक देखते हैं.

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने मामले की जांच कर रही आंतरिक समिति के माहौल को डरावना बताते हुए समिति के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया है.

शिकायतकर्ता महिला ने अदालत में अपने वकील की मौजूदगी की अनुमति नहीं दिए जाने समेत अनेक आपत्तियां जताते हुए आगे समिति के समक्ष नहीं पेश होने का फैसला किया.

महिला ने कहा कि उसे अपनी सुरक्षा की भी फिक्र है क्योंकि अदालत की कार्यवाही से लौटते वक्त दो से चार लोगों ने उसका पीछा किया.

जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति के समक्ष तीन दिन तक कार्यवाही में भाग लेने के बाद महिला ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की और यह आशंका भी जताई कि उसे समिति से न्याय मिलने की संभावना नहीं है, जिसने न केवल कार्यवाही के दौरान उसकी वकील वृंदा ग्रोवर की मौजूदगी के अनुरोध को खारिज कर दिया बल्कि यह भी कहा कि अगर मैं जांच में भाग नहीं लूंगी तो ऐसे में दूसरे पक्ष को तरजीह देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि समिति ने बिना वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग के कार्यवाही संचालित की. समिति में सुप्रीम कोर्ट की दो महिला जजों जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी शामिल हैं.

महिला ने कहा कि उसे 26 से 29 अप्रैल को दर्ज किए गए उसके बयान की प्रति भी नहीं दी गई.

महिला ने कहा, ‘मुझे लगा कि इस समिति से मुझे न्याय नहीं मिलने वाला इसलिए मैं तीन जजों की समिति की इस कार्यवाही में अब और हिस्सा नहीं लूंगी.’

समिति ने कॉल डेटा रिकॉर्ड और दो संबंधित मोबाइल नंबरों के व्हाट्स ऐप ब्योरे को पेश करने के उसके अनुरोध को मंगलवार को खारिज कर दिया, जिसने उसे समिति की कार्यवाही में हिस्सा लेने से लाचार और परेशान कर दिया.

उसने कहा, ‘मैं आज समिति की कार्यवाही छोड़ने के लिए बाध्य हूं क्योंकि समिति इस बात को स्वीकार करती नहीं दिखती कि यह साधारण शिकायत नहीं है बल्कि एक मौजूदा सीजेआई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत है और इसलिए ऐसी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है जो निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करेगी.’

महिला ने दावा किया कि समिति ने उससे बार-बार पूछा कि उन्होंने यौन उत्पीड़न की यह शिकायत इतनी देरी से क्यों की?

उन्होंने कहा, ‘मुझे समिति का माहौल बहुत डरावना लगा और मैं सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के सामने होने और उनके सवालों की वजह से बहुत घबराई रही, जहां मेरे वकील मौजूद नहीं थे. मैंने सोचा था कि यह समिति मेरी पीड़ा को सुनेगी और मेरे और मेरे परिवार के साथ न्याय होगा.’

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने कहा कि अदालत में पहले दिन हुई सुनवाई के दौरान उनका पीछा किया गया. उन्होंने एक मोटरसाइकिल का आंशिक नंबर नोट कर लिया. इस बारे में समिति को अवगत कराया लेकिन जजों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया.

महिला का आरोप है कि सोमवार को समिति के समक्ष पेश होने से पहले उनका एक बार फिर पीछा किया गया. इस बार दो मोटरसाइकिल पर चार लोग सवार थे. इस बार महिला ने तुगलक रोड पुलिस थाने के एसएचओ से शिकायत की, जो शुरुआत में तो सुरक्षा मुहैया कराने को तैयार हो गए लेकिन महिला का दावा है कि 34 पृथ्वीराज रोड पर सुप्रीम कोर्ट के गेस्टहाउस पर तैनात इंस्पेक्टर पंकज सिंह से एसएचओ की बात होने के बाद उन्होंने सुरक्षा मुहैया कराने से इनकार करते हुए कहा, ‘आप तो प्रोटेक्टिड ही हैं.’

शिकायतकर्ता महिला ने समिति को दिए पत्र में कहा कि वह अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखती है और उसे बहुत संघर्ष करना पड़ा है. महिला ने बाहरी समिति से मामले की जांच करने को कहा, क्योंकि आरोप सीजेआई पर लगे हैं.

महिला ने कहा कि वह शुरुआत में आंतरिक समिति के समक्ष पेश होने के लिए तैयार हो गई थी क्योंकि मुझे लगता था कि जज निष्पक्ष जांच करेंगे लेकिन तीन सुनवाइयों के बाद मुझे लगा कि जज मेरी शिकायत को संवेदनशीलता से नहीं शक की नजरों से अधिक देखते हैं.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने अक्टूबर 2018 में उनका यौन उत्पीड़न किया था.

शिकायतकर्ता महिला की प्रेस विज्ञप्ति पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)