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जस्टिस चंद्रचूड़, नरीमन द्वारा सीजेआई मामले की जांच समिति से मुलाकात का दावा, सुप्रीम कोर्ट ने नकारा

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन द्वारा जस्टिस एसए बोबडे से शिकायतकर्ता की गैरमौजूदगी में जांच नहीं करने के संबंध में मुलाकात करने की ख़बर का खंडन करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया. हालांकि, अदालत ने जांच समिति को पत्र लिखने की बात को खारिज नहीं किया.

जस्टिस डीवी चंद्रचूड़. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब/Increasing Diversity by Increasing Access)

जस्टिस डीवी चंद्रचूड़. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब/Increasing Diversity by Increasing Access)

नई दिल्लीः चीफ जस्टिस पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रही आंतरिक समिति से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस रोहिंगटन नरीमन की मुलाकात संबंधी खबर को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के महासचिव ने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन ने आंतरिक समिति और जस्टिस एसए बोबडे से मुलाकात नहीं की.

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक समाचार पत्र ने अपनी खबर के हवाले से कहा कि जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने तीन मई 2019 शुक्रवार शाम को जस्टिस एसए बोबडे से मुलाकात की. यह पूरी तरह से गलत है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई मामले पर विचार-विमर्श कर रही आंतरिक समिति इस अदालत के और किसी भी जज की सलाह के बिना खुद से ही इस पर विमर्श कर रही है.’

इससे पहले इंडियन एक्सप्रेस  ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जस्टिस नरीमन के साथ जस्टिस चंद्रचूड़ ने बीते सप्ताह शुक्रवार को आंतरिक समिति से मुलाकात की थी और कहा था कि शिकायतकर्ता महिला की गैरमौजूदगी में जांच जारी नहीं रखी जाए.

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह खबर पूरी तरह से गलत है. एक्सप्रेस ने अपनी स्टोरी में ये भी लिखा है कि इस संबंध में जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक पत्र भी लिखा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के महासचिव द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में पत्र लिखने की बात को खारिज नहीं किया गया है.

अखबार के मुताबिक जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना था कि शिकायतकर्ता महिला की गैरमौजूदगी में जांच करने से सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचेगा.

SCजांच समिति में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी हैं. ऐसा माना जा रहा है कि दोनों जजों ने मौजूदा जांच को लेकर अपनी चिंताओं से समिति को वाकिफ कराया.

खबर के मुताबिक, जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह भी सुझाव दिया था कि समिति या तो शिकायतकर्ता महिला की आग्रह के अनुरूप उसे वकील मुहैया कराएं या फिर जांच के लिए न्यायमित्र (एमाईकस क्यूरी) नियुक्त करें.

मालूम हो कि शिकायतकर्ता महिला के जांच में शामिल होने से इनकार करने के बाद जांच समिति ने जांच आगे बढ़ाने का फैसला किया था.

गौरतलब है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी ने मामले की जांच कर रही आंतरिक समिति के माहौल को डरावना बताते हुए समिति के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया था.

शिकायतकर्ता महिला ने अदालत में अपने वकील की मौजूदगी की अनुमति नहीं दिए जाने समेत अनेक आपत्तियां जताते हुए आगे समिति के समक्ष नहीं पेश होने का फैसला किया था.

महिला ने कहा था कि वह शुरुआत में आंतरिक समिति के समक्ष पेश होने के लिए तैयार हो गई थी क्योंकि उन्हें लगता था कि जज निष्पक्ष जांच करेंगे लेकिन तीन सुनवाइयों के बाद उन्हें लगा कि जज मेरी शिकायत को संवेदनशीलता से नहीं, बल्कि शक की नजरों से अधिक देखते हैं.

जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की समिति चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रही है.

बता दें कि रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति से जस्टिस एनवी रमन ने खुद को अलग कर लिया था. इसके बाद जस्टिस इंदु मल्होत्रा को समिति में तीसरी सदस्य के रूप में शामिल किया गया था.

हालांकि, जस्टिस गोगोई ने इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे स्वतंत्र न्यायपालिका के लिए एक खतरा बताया था.

सुप्रीम कोर्ट की आतंरिक जांच समिति की ओर से की जा रही जांच के प्रति चिंता जताने वाले जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठता सूची में दसवें नंबर पर हैं. वह 2022 से 2024 तक चीफ जस्टिस का पद संभालेंगे.