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एक महीने में टीवी चैनलों ने नरेंद्र मोदी को 722 घंटे दिखाया, जबकि राहुल गांधी को सिर्फ़ 251 ​घंटे

वरिष्ठ पत्रकार कावेरी बामजई बता रही हैं कि लोकसभा चुनाव के दौरान 1 से 28 अप्रैल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टीवी पर सबसे ज्यादा एयरटाइम मिला. प्रधानमंत्री ने इस एक महीने में 64 रैलियां की थीं, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 65 रैलियों में शामिल हुए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीआईबी/पीटीआई)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीआईबी/पीटीआई)

लोकसभा के इस करीबी चुनावी मुकाबले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टीवी पर सबसे ज्यादा एयरटाइम मिला. सिर्फ 1 से 28 अप्रैल यानी करीब एक महीने में वे अलग-अलग चैनलों पर कुल मिलाकर 722 घंटे दिखे, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 251 घंटे का समय ही मिला.

प्रधानमंत्री मोदी ने 1 से 28 अप्रैल के बीच देशभर में 64 रैलियां कीं और इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 65 रैलियों को संबोधित किया. देश के टॉप 11 हिंदी समाचार चैनलों पर प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति राहुल के मुकाबले कहीं अधिक रही.

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के मुताबिक मोदी को समाचार चैनलों ने कुल 722 घंटे, 25 मिनट और 45 सेकेंड का समय दिया. राहुल ने पीएम से एक रैली अधिक की पर उन्हें टीवी पर कम समय मिला. राहुल को इस अवधि में 251 घंटे, 36 मिनट और 43 सेकेंड का समय मिला.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को 123 घंटे, 39 मिनट और 45 सेकेंड और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को 84 घंटे, 20 मिनट और 5 सेकेंड का समय मिला. प्रधानमंत्री को इसलिए अधिक समय दिया गया क्योंकि उनको दिखाने से टीवी चैनलों को बेहतर टीआरपी मिलती है.

विश्लेषक कहते हैं कि यह बताना कठिन है, लेकिन मोदी को विशेष दर्जा तो मिलता ही है. 25 अप्रैल को वाराणसी में नामांकन से एक दिन पहले प्रधानमंत्री के रोड शो को साढ़े तीन घंटे तक चैनलों ने लाइव दिखाया.

उनका इंटरव्यू भी काफी लंबा रहा. जबकि राहुल गांधी के साथ प्रचार के दौरान बातचीत सिर्फ 25 मिनट की ही रही.

अभिनेता अक्षय कुमार द्वारा किए गए प्रधानमंत्री के इंटरव्यू को भी सभी चैनलों ने एक साथ प्रसारित किया. इसे 1.7 करोड़ लोगों ने देखा. हालांकि लंदन में भारत की बात के तहत प्रसून जोशी के प्रधानमंत्री के साक्षात्कार को 2.5 करोड़ लोगों ने देखा था.

इसके बावजूद अक्षय कुमार से बातचीत की स्टिकनेस (ज्यादा देर तक देखा जाना) रही. इसे इम्प्रेशन से नापते हैं. मोदी-अक्षय के मामले में यह 52 लाख और ‘भारत की बात’ में 35 लाख रहे.

बीएआरसी डाटा से यह भी पता चलता है कि पीएम के स्वतंत्रता दिवस के भाषणों को भी चैनलों ने काफी दिखाया. 2016 में प्रधानमंत्री के भाषण को 137 चैनलों पर 11.7 करोड़, 2017 में 147 चैनलों पर 10.9 करोड़ और 2018 में 147 चैनलों पर 12.1 करोड़ लोगों ने देखा.

न्यूजलॉन्ड्री के अभिनंदन शेखरी कहते हैं कि समय की बात अब अप्रासंगिक है. लेकिन न्यूज चैनलों को जो करना चाहिए, वह नहीं हो रहा है.

वह कहते हैं कि अगर हम समय की बात करें तो कुछ अपवाद को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख दलों को बराबर का समय मिल रहा है. लेकिन, विपक्ष पर लगातार हमला होता है और उन्हें काफी खराब तरीके से पेश किया जाता है. पीएम को दिखाना चैनलों के लिए रेवेन्यू जुटाने का भी काम करता है.

बीएआरसी के डाटा के मुताबिक पिछले साल नवंबर से भाजपा टेलीविजन पर सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाली पार्टी बन गई है, उसने एक पान मसाला की जगह ली है. इसके बाद नेटफ्लिक्स और ट्रिवागो हैं.

(दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत प्रकाशित)