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केरल: बैंक का कर्ज़ चुका पाने में नाकाम होने पर मां-बेटी ने आग लगाकर दे दी जान

यह मामला तिरुवनंतपुरम के नेयाटिनकारा का है. सात लाख का क़र्ज़ न चुका पाने और घर की कुर्की के डर से मंगलवार को मां-बेटी ने करोसिन डालकर ख़ुद को आग लगा ली थी.

Kerala Neyyattinkara Map

तिरुवनंतपुरम: बैंका का करीब सात लाख का कर्ज़ न चुका पाने और इसी के चलते अपने घर की कुर्की किए जाने के डर से मंगलवार को तिरुवनंतपुरम के नेयाटिनकारा में मां-बेटी ने केरोसिन डालकर खुद को आग लगा ली. इस घटना में दोनों लोगों की मौत हो गई है.

पुलिस ने बताया कि 19 वर्षीय युवती वैष्णवी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और 90 प्रतिशत झुलस चुकी उसकी 42 वर्षीय मां लेखा को तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया,  जहां मंगलवार रात उसकी मौत हो गई.

पुलिस ने बताया कि जिस समय यह घटना हुई उस समय वैष्णवी के पिता चंद्रन घर पर नहीं थे. चंद्रन ने आरोप लगाया कि बैंक के अधिकारी बकाया कर्ज के भुगतान को लेकर उन पर दबाव बना रहे थे.

हालांकि, केनरा बैंक ने एक विज्ञप्ति में बताया है कि उन्होंने परिवार को धमकी नहीं दी है या किसी तरह का दबाव नहीं बनाया है.

इस घटना की खबर लगते ही स्थानीय निवासियों ने केनरा बैंकी की स्थानीय शाखा के बाहर प्रदर्शन किया और चंद्रन के घर के सामने सड़क पर चक्काजाम कर दिया. उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

वहीं राज्य के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने इस मामले में जांच का वादा किया है.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कर्ज़ से छुटकारा पाने के लिए मां-बेटी ने मकान भी बेचने की कोशिश की लेकिन आखिरी समय में खरीददार पीछे हट गया. ऐसे में बैंक द्वारा दी गई समयसीमा खत्म होने पर मां-बेटी ने आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा लिया.

लेखा के पति और मकान मालिक चंद्नन की नौकरी कुछ समय पहले ही छूटी थी. वह खाड़ी देश में कॉरपेंटर की नौकरी करते थे.

चंद्रन ने बताया कि बैंक द्वारा कर्ज़ चुकाने के लिए दी गई समयसीमा खत्म होने पर उनकी पत्नी और बेटी की हिम्मत टूट गई थी. उन्होंने अपने घर का नाम अपनी बेटी वैष्णवी के नाम पर वैष्णवम रखा था जो कि कॉलेज से डिग्री का कोर्स कर रही थी.

चंद्रन ने बताया, ‘मैंने यह मकान बनवाने के लिए 2003 में कर्ज लिया था. मैं अब तक पांच लाख रुपये दे चुका हूं लेकिन आर्थिक तंगी के चलते कर्ज पूरा नहीं हो सका. बैंक मुझसे 6.80 लाख रुपये की और मांग कर रहा था.’

उन्होंने बताया कि परिवार ने बकाया का भुगतान करने के लिए बैंक से कुछ समय मांगा था. लेकिन बैंक के अधिकारी लगातार उनकी पत्नी को फोन कर रहे थे. उनका कहना था कि वे लोन चुकाएं या अपनी संपत्ति की कुर्की के लिए तैयार रहें.

वहीं, बैंक के एक कर्मचारी ने बताया कि मां-बेटी को कर्ज़ चुकाने के लिए वक्त दिया गया था. उन्होंने 2003 में यह कर्ज लिया था. मामला अदालत में पहुंचने के बाद वसूली की कार्रवाई शुरू की गई थी.

पुलिस ने कहा, उन्हें वह सहमति पत्र मिला है जिसे चंद्रन ने कोर्ट की ओर से नियुक्त पैनल को सौंपा था. इस पत्र में चंद्रन ने 14 मई तक बैंक को 6.80 लाख रुपये लौटाने का वादा किया था.

पत्र के मुताबिक, अगर चंद्रन रकम लौटाने में असफल रहता तो बैंक को वसूली की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार था.

बैंक के अधिकारियों का कहना है कि चंद्रन 2010 में डिफॉल्टर घोषित हो गया था जिसके बाद बैंक ने वसूली की कार्रवाई शुरू की थी. इसके लिए हम कोर्ट गए थे और कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)