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मेरे आंसुओं को मेरी कमज़ोरी न समझना: आईपीएस चारु निगम

गोरखपुर में भाजपा विधायक की अभद्रता से भावुक हुई महिला आईपीएस अधिकारी ने फेसबुक पोस्ट से दिया जवाब.

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चारु निगम. फोटो: (फेसबुक/चारु निगम)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र में भाजपा विधायक द्वारा एक आईपीएस अधिकारी से कथित अभद्रता करने पर भावुक हुई महिला पुलिस अधिकारी ने कहा है कि वे ठीक हैं लेकिन उन्हें थोड़ा दुख हुआ और वे आहत हैं.

रविवार को गोरखपुर में आईपीएस अधिकारी चारु निगम के साथ विधायक द्वारा की गई कथित अभद्रता के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में बहुत से लोग आ गए हैं.

आईपीएस निगम ने अपनी फेसबुक वॉल पर इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुये लिखा, ‘मेरी ट्रेनिंग ने मुझे कमज़ोर होना नहीं सिखाया है. मैं इस बात की अपेक्षा नहीं कर रही थी, तभी मेरे सहयोगी एसपी सिटी गणेश साहा वहां पहुंचे और उन्होंने मेरी चोटों के बारे में बात की और इस निरर्थक बहस को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया.’

उन्होंने कहा कि जब तक एसपी सिटी सर नहीं आए थे, मैं वहां मौजूद सब से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थी. लेकिन जब एसपी साहा वहां पुलिस बल के साथ आयें और मेरे समर्थन में खड़े हुये तब मैं भावुक हो गई.

गोरखपुर का मीडिया जिसने दोनों घटनायें देखी थी, उसने पूरी तरह से मेरा साथ दिया और मेरे साथ खड़ा रहा. मैं मीडिया की शुक्रगुज़ार हूं कि उसने बिना किसी भेदभाव के पूरा सच दिखाया.

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कृपया शांत रहें, मैं बिल्कुल ठीक हूं बस थोड़ी आहत हुई हूं. कोई चिंता की बात नही है, परेशान न हो.

उन्होंने फेसबुक पर कुछ लाइनें में भी लिखी. ‘मेरे आंसुओं को मेरी कमज़ोरी न समझे, मेरे आंसू न तो मेरी कोमलता की वजह से बाहर आयें और न ही कठोरता की वजह से. मैं एक महिला अधिकारी हूं, सच्चाई में बहुत ताकत होती है और आपकी सच्चाई हमेशा रंग दिखाती है.’

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चारु निगम का फेसबुक पोस्ट

गौरतलब है कि करीमनगर इलाके में एक शराब की दुकान हटाए जाने के लिये स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन कर थे और पुलिस विरोध करने वालों को वहां से हटा रही थी.

तभी वहां स्थानीय भाजपा विधायक राधा मोहन अग्रवाल पहुंचे और विरोध कर रहे स्थानीय लोगों ने विधायक से शिकायत की कि सर्किल आफिसर चारु निगम ने ज़बर्दस्ती शराब की दुकान का विरोध करने वालों को वहां से हटवाया.

स्थानीय लोगों ने विधायक से कहा कि पुलिस ने कथित तौर पर एक महिला को चोट पहुंचायी तथा एक 80 साल के बुजुर्ग को वहां से खींचकर हटाया.

तब विधायक अग्रवाल ने पुलिस अधिकारी निगम से उनकी इस कार्रवाई के बारे में पूछा और उनसे कहा कि प्रदेश सरकार का आदेश है कि घनी बस्ती जहां लोग रहते है वहां कोई भी शराब की दुकान नहीं होगी.

विधायक की तेज आवाज़ और बहस के बीच महिला अधिकारी निगम ने रूमाल से अपनी आंखों से निकले आंसू पोंछे. उनकी यह तस्वीर मीडिया के कैमरों में कैद हो गयी और वायरल हो गयी.

बाद में पुलिस अधिकारी निगम ने आरोप लगाया कि विधायक ने भीड़ के सामने उनके साथ अभद्रता और बदतमीज़ी की. निगम ने बाद में कहा कि विधायक ने मेरे साथ अभद्रता की और इस बात का ख्याल भी नही रखा कि वे भीड़ के सामने एक महिला पुलिस अधिकारी सेे बात कर रहे है.

मीडिया में उनके आंसू पोछते हुई आई तस्वीरों पर उन्होंने कहा मैं रो नहीं रही थी और न ही मै इस तरह की हूं और न ही यह मेरे व्यक्तित्व में शामिल है. बस मैं उस समय भावुक हो गयी, जब मेरे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहयोगी ने मेरा समर्थन किया.

उधर दूसरी ओर विधायक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी शराब की दुकान बंद करवाने की मांग करने वाली जनता के साथ सख्ती से पेश आ रही थी.

उन्होंने कहा कि हम घनी आवासीय बस्ती में शराब की दुकान चलाये जाने का विरोध करते है. इलाके की जनता भी शांतपूर्ण तरीके से शराब की दुकान हटाने के लिये विरोध प्रदर्शन कर रही थी. लेकिन महिला पुलिस अधिकारी ने विरोध करने वाली जनता को ज़बर्दस्ती बलपूर्वक वहां से हटाया और इस दौरान एक महिला को चोट लगी तथा एक अस्सी साल के बुजुर्ग को वहां से खींचा गया. इस तरह की हरकत कतई बर्दाश्त नहीं होगी.

अग्रवाल ने उन आरोपों को पूरी तरह से ख़ारिज किया कि उन्होंने महिला अधिकारी के साथ अभद्रता की. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और शराब माफिया के बीच आपसी समझौता है तभी जो शराब की दुकान 15 दिन पहले बंद हो गयी थी वह दोबारा कैसे खुल गयी.

(एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)