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आय से अधिक संपत्ति मामलाः सीबीआई ने मुलायम और अखिलेश यादव को दी क्लीनचिट

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर कर कहा है कि आय से अधिक संपत्ति मामले में उन्हें मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले हैं.

Lucknow: Samajwadi Party founder Mulayam Singh Yadav addresses party workers at a condolence meeting for Congress veteran ND Tiwari at the party office in Lucknow, Friday, Oct 19, 2018. The party chief Akhilesh Yadav is also seen. (PTI Photo) (PTI10_19_2018_000126B)

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को क्लीनचिट दे दी है. सीबीआई ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने हलफनामे में कहा कि मुलायम सिंह और अखिलेश के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने के लिए कोई सबूत नहीं मिले.

मालूम हो कि सीबीआई ने अप्रैल में मुलायम सिंह यादव, अखिलेश और प्रतीक यादव के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर बताया था कि उनके ख़िलाफ़ जांच 2013 में बंद कर चुका है.

सीबीआई ने कहा था कि ये प्रारंभिक जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को चार सप्ताह  में जवाब दाखिल करने को कहा था. सीबीआई ने कहा कि इसको लेकर हम जवाब दाखिल करेंगे और कोर्ट को बताएंगे कि आगे हम क्या करेंगे.

वहीं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में मुलायम सिंह यादव ने दावा किया था कि सीबीआई की प्राथमिक जांच उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है जबकि जिस रिपोर्ट का मुलायम ने हवाला दिया है, सीबीआई उसे पहले ही फर्जी बताकर 2009 में एफआईआर दर्ज करा चुकी है.

सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा था कि उनके ख़िलाफ़ दायर याचिका राजनीति से प्रेरित है.

मुलायम सिंह ने कहा था कि लोकसभा चुनाव होने हैं इसलिए जानबूझकर उनके ख़िलाफ़ ये अर्जी दाखिल की गई है. उन्होंने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कई बातें छिपाई है.

उन्होंने कहा था कि आयकर विभाग ने उनकी और उनके परिवार की संपत्ति की जांच की थी, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला. ऐसे में उनके और उनके परिवार के ख़िलाफ़ दायर याचिका को खारिज किया जाना चाहिए.