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क्या राजनीतिक कारणों से हुई सीपीआई नेता फागो तांती की हत्या?

सीपीआई नेता फागो तांती ने बेगूसराय से सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार का प्रचार भी किया था. सीपीआई नेता और पूर्व विधायक अवधेश राय ने हत्या के पीछे भाजपा का हाथ होने की आशंका ज़ाहिर की है, हालांकि भाजपा ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

सीपीआई नेता फागो तांती

सीपीआई नेता फागो तांती

पटना: पांच दिन पहले बिहार के बेगूसराय में मटिहानी थाना क्षेत्र के महाजी गांव निवासी सीपीआई नेता फागो तांती की हत्या के मामले में पुलिस को अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है.

मटिहानी थाने के एसएचओ धीरेंद्र पाठक ने कहा, ‘अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है. हम लोग मामले की जांच कर रहे हैं.’

60 वर्षीय सीपीआई नेता फागो तांती की हत्या 16 मई की रात कर दी गई थी. तांती के परिजनों के मुताबिक उन्होंने 15 कट्ठा खेत बटैया पर लेकर सब्जी की खेती की थी थी. फागो के बड़े भाई रामचंद्र तांती के अनुसार वह रोज सुबह खाना खाकर खेत में निकल जाते थे और शाम को लौटते थे.

16 मई को भी वह सुबह में निकल गए, लेकिन शाम को नहीं लौटे. फागो तांती के पड़ोसी राजीव सिंह ने बताया कि रात करीब 9 बजे एक अज्ञात व्यक्ति उनके पास आया और कहा कि फागो तांती को अगवा कर लिया गया है.

राजीव सिंह ने कहा, ‘सूचना मिलने पर हम लोग डीएसपी के पास पहुंचे क्योंकि एसपी छुट्टी पर थे और उनका प्रभार डीएसपी संभाल रहे थे. हमने पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाई. तड़के हमारे पास खबर आई कि उनका शव उनके घर से करीब एक किलोमीटर दूर भगवती स्थान के पास से बरामद किया गया.’

स्थानीय लोगों का कहना है कि हत्या कहीं और की गई तथा शव को देर रात भगवती स्थान के पास फेंक दिया गया.

तांती के शरीर में बालू लगा हुआ और हाथ की नसें कटी हुई थीं, जिससे अनुमान है कि तांती ने बचने के लिए काफी संघर्ष किया होगा और कई लोगों ने मिलकर उनकी हत्या की होगी.

तांती के परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है कि अपहरण की सूचना पुलिस को दी गई थी, लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई नहीं की. अगर कार्रवाई हुई होती, तो तांती की हत्या नहीं होती.

इस संबंध में बेगूसराय के एसपी अवकाश कुमार को फोन किया गया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थे.

स्थानीय नेताओं ने बताया कि फागो तांती लंबे समय से सीपीआई से जुड़े हुए थे. उन्होंने इस लोकसभा चुनाव में सीपीआई नेता व बेगूसराय संसदीय सीट से उम्मीदवार कन्हैया कुमार के लिए खूब प्रचार किया था.

सीपीआई के एक नेता ने बताया, ‘वह अपने इलाके के असामाजिक तत्वों के खिलाफ खुल कर बोलते थे और कन्हैया के प्रचार के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. उन्होंने लोकप्रिय नारे ‘हम लेके रहेंगे आजादी’ लिखा टी-शर्ट बनवाया था और हमेशा उसे पहने रहते थे.’

बेगूसराय लोकसभा सीट से भाजपा की तरफ से गिरिराज सिंह मैदान में हैं. वहीं राजद ने तनवीर हसन को मैदान में उतारा है.

कन्हैया कुमार ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की और कहा, ‘बेगूसराय में सीपीआई के नेता कॉमरेड फागो तांती की निर्मम हत्या की खबर सुनकर स्तब्ध हूं. उनके परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं. दोषियों को सजा दिलाए बिना हम चैन से नहीं बैठेंगे.’

सीपीआई ने इस घटना के विरोध में सोमवार को प्रतिवाद मार्च निकाला और दोषियों को अविलंब गिरफ्तार करने की मांग की.

स्थानीय सीपीआई नेता व बछवारा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक अवधेश राय ने इस हत्या के पीछे भाजपा का हाथ होने की आशंका जाहिर की है. उन्होंने कहा कि भाजपा की तरफ से उन पर प्रचार नहीं करने का दबाव बनाया जाता था.

उन्होंने कहा, ‘बेगूसराय में वोटिंग से एक दिन पहले उन्हें धमकी मिली थी कि वे सीपीआई के लिए प्रचार करना बंद कर दें, वरना बुरा परिणाम होगा.’

महाजी गांव रामदिरी पंचायत-दो के अंतर्गत आता है. यहां भूमिहार के अलावा ततमा, तांती, पासी व अन्य पिछड़ी जातियां रहती हैं. गांव में भूमिहारों के पास जमीनें हैं जबकि छोटी जातियों में अधिकतर के पास अपनी जमीन नहीं है. जिनके पास है भी तो बस दो-चार कट्ठा.

स्थानीय नेताओं की मानें तो यहां से सीपीआई को 1000 से 1200 वोट मिला करता था. सीपीआई के एक नेता ने बताया, ‘हमें जो खबर मिली है उसके मुताबिक, इस बार के आम चुनाव में यहां से सीपीआई को 2500 से तीन हजार वोट मिले हैं. ऐसे में संभव है कि राजनीतिक कारणों से उनकी हत्या हुई हो.’

हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है. स्थानीय भाजपा नेता राम लखन सिंह ने कहा कि हत्या पर सीपीआई बेवजह की राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा, सीपीआई नेताओं ये इतिहास है कि वह खुद अपने लोगों की हत्या करवाते हैं, फिर श्रद्धांजलि देते हैं और खुद ही केस भी करवा आते हैं.

उन्होंने कहा कि सीपीआई के नेताओं को खुद नहीं पता कि किसने उसकी हत्या की है. भाजपा हत्या की राजनीति में विश्वास नहीं करती है.

मटिहानी थाने के एसएचओ धीरेंद्र पाठक ने हत्या के पीछे राजनीतिक वजहों से इनकार किया है. उन्होंने कहा, ‘महाजी गांव में कम्युनिस्ट पार्टी बहुत मजबूत नहीं है और न ही वोटिंग के दौरान ही किसी तरह की कोई घटना नहीं हुई थी. अब तक की जांच में किसी तरह की राजनीतिक वजह सामने नहीं आई है.’

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)