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असहमति के मत को चुनाव आयोग के फैसले में शामिल करने की अशोक लवासा की मांग ख़ारिज

असहमति के मत को आयोग के फैसले का हिस्सा बनाने के मामले में चुनाव आयोग ने मौजूदा व्यवस्था को ही बरक़रार रखते हुए कहा कि असहमति और अल्पमत के फैसले को आयोग के फैसले में शामिल कर सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील कुमार अरोड़ा, चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा. (फोटो: पीटीआई)

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा (बीच में), चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (बाएं) और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (दाएं). (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निस्तारण में आयोग के सदस्यों के ‘असहमति के मत’ को फैसले का हिस्सा बनाने की चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की मांग को 2-1 बहुमत के आधार पर अस्वीकार कर दिया.

आयोग ने इस मामले में मौजूदा व्यवस्था को ही बरकरार रखते हुए कहा कि असहमति और अल्पमत के फैसले को आयोग के फैसले में शामिल कर सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

लवासा के सुझाव पर विचार करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा द्वारा मंगलवार को हुई आयोग की पूर्ण बैठक में 2-1 के बहुमत से यह फैसला किया गया. हालांकि आयोग ने कहा कि निर्वाचन नियमों के तहत इन मामलों में सहमति और असहमति के विचारों को निस्तारण प्रक्रिया की फाइलों में दर्ज किया जाएगा.

आयोग की पूर्ण बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दोनों चुनाव आयुक्त भी बतौर सदस्य मौजूद होते हैं.

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निस्तारण में असहमति का फैसला देने वाले लवासा ने ‘असहमति के मत’ को भी आयोग के फैसले में शामिल करने की मांग की थी.

इस मुद्दे पर लगभग दो घंटे तक चली पूर्ण बैठक के बाद आयोग द्वारा जारी संक्षिप्त बयान में कहा गया, ‘आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया के बारे में हुई बैठक में यह तय किया गया है कि इस तरह के मामलों में सभी सदस्यों के विचारों को निस्तारण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा. सभी सदस्यों के मत के आधार पर उक्त शिकायत को लेकर कानून सम्मत औपचारिक निर्देश पारित किया जायेगा.’

सूत्रों के अनुसार अरोड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से इस व्यवस्था को स्वीकार किया गया.

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस फैसले को स्पष्ट करते हुए बताया कि आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निस्तारण में सभी सदस्यों का मत अयोग की पूर्ण बैठक के रिकार्ड में दर्ज होगा लेकिन प्रत्येक सदस्य के मत को आयोग के फैसले का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में निर्वाचन कानूनों के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था के तहत बैठक में किए गए बहुमत के फैसले को ही आयोग का फैसला माना जायेगा.

ज्ञात हो कि लवासा ने आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निस्तारण में आयोग के फैसले से असहमति का मत व्यक्त करने वाले सदस्य का पक्ष शामिल नहीं करने पर नाराजगी जतायी थी.

लवासा ने पिछले कुछ समय से आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों के निपटारे के लिए होने वाली आयोग की पूर्ण बैठकों से खुद को अलग कर लिया था.