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सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कर्णन को छह महीने के लिए जेल भेजा

देश में अपनी तरह का यह पहला मामला है कि जब अवमानना के आरोप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के न्यायाधीश को जेल भेजा जा रहा है.

Justice CS Karnan PTI

जस्टिस सीएस कर्णन. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने एक अभूतपूर्व आदेश देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सीएस कर्णन को न्यायालय की अवमानना करने के लिए तुरंत छह माह के लिए जेल भेजने के निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीश कर्णन को छह महीने कैद की सजा सुनाई और कहा कि उसके आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन हो.

प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने कहा, हम सभी का सर्वसम्मति से यह मानना है कि न्यायाधीश सीएस कर्णन ने न्यायालय की अवमानना की, न्यायपालिका की और उसकी प्रक्रिया की अवमानना की.

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर, न्यायमूर्ति पी सी घोष और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की पीठ ने कहा कि वह न्यायाधीश कर्णन को छह माह की जेल की सजा सुनाए जाने से संतुष्ट हैं.

पीठ ने कहा, सजा का पालन किया जाए और उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाए. देश में अपनी तरह का यह पहला मामला है कि जब अवमानना के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के न्यायाधीश को जेल भेजा जा रहा है.

पीठ ने न्यायाधीश कर्णन द्वारा आगे कोई आदेश पारित किए जाने की स्थिति में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया को आदेश की सामग्री को प्रकाशित करने से रोक दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीश कर्णन के सोमवार रात दिए गए आदेश की सामग्री को मीडिया द्वारा प्रकाशित करने पर रोक लगा दी जिसमें उन्होंने भारत के प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और उच्चतम न्यायालय के सात अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.

इससे पहले प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली इस संविधान पीठ ने देशभर की सभी अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों को निर्देश दिया कि वे आठ फरवरी के बाद न्यायमूर्ति कर्णन द्वारा दिए गए आदेशों पर विचार न करें. इस पीठ ने अपने पहले के आदेश में न्यायमूर्ति कर्णन के प्रशासनिक और न्यायिक कार्य करने पर भी रोक लगा दी थी.

पीठ ने एक मई को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि वह पुलिस का एक दल गठित करें जो चार मई को न्यायमूर्ति कर्णन की मेडिकल जांच में मेडिकल बोर्ड की मदद कर सके. मेडिकल बोर्ड को आठ मई तक रिपोर्ट सौंपनी थी. लेकिन जस्टिस कर्णन ने जांच से इंकार करते हुए मेडिकल बोर्ड को वापस लौटा दिया.

जस्टिस कर्णन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मामला चल रहा है. इस मामले की सुनवाई सात सदस्यीय पीठ कर रही है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर के अलावा जस्टिस दीपक मिश्र, जस्टिस जे चेल्मेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस कुरियन जोसफ शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने न्यायिक कर्तव्यों को जारी रखने की जस्टिस कर्णन की याचिका यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि वह दिमाग़ी रूप से ठीक नहीं हैं.

इससे पहले न्यायमूर्ति कर्णन 31 मार्च को शीर्ष अदालत के समक्ष पेश हुए थे और उन्होंने न्यायिक तथा प्रशासनिक शक्तियां बहाल करने की मांग की थी. लेकिन न्यायालय ने अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद न्यायमूर्ति कर्णन ने कहा था कि वह दोबारा न्यायालय के समक्ष पेश नहीं होंगे.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के ख़िलाफ़ लिखे गए न्यायमूर्ति कर्णन के कई पत्रों पर स्वत: संज्ञान लिया है.

जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. इस संबंध में उन्होंने सीबीआई को आदेश दिया था कि मामले की जांच की जाए और इसकी रिपोर्ट संसद को सौंपी जाए. इन आरोपों के जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने इसे अदालत की आवमानना बताया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सात जजों की एक खंडपीठ गठित की, जिसने जस्टिस कर्णन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना से जुड़ी कार्रवाई शुरू की.

इस सुनवाई के दौरान जस्टिस कर्णन सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश से लगातार टकराव मोल लेकर आदेशों का पालन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्रवाई का सामना करने के लिए उन्हें दो बार पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन जस्टिस कर्णन ने इस आदेश को अनसुना किया और कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)