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एक्शन डायरेक्टर और अभिनेता अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का निधन

90 के दशक के मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन 100 से अधिक फिल्मों के एक्शन कोरियोग्राफ कर चुके थे.

वीरू देवगन: (फोटो साभार: इंस्टाग्राम/Ajay Devgn)

वीरू देवगन: (फोटो साभार: इंस्टाग्राम/Ajay Devgn)

मुंबई: बॉलीवुड के एक्शन डायरेक्टर और अभिनेता अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का सोमवार को निधन हो गया. वह 85 वर्ष के थे.

सोमवार सुबह सांस लेने में दिक्कत होने के बाद उन्हें मुंबई के सांताक्रूज स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनका अंतिम संस्कार सोमवार शाम तकरीबन छह बजे मुंबई के विले पार्ले पश्चिम स्थित एक शवदाहगृह में होगा.

90 के दशक के मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन ने 100 से ज्यादा फिल्मों में फाइट सीन कोरियोग्राफ कर चुके थे. तकरीबन तीन दशक के अपने करिअर में वीरू देवगन ने मनोज कुमार, जीतेंद्र, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, अमिल कपूर, शशि कपूर और अपने बेटे अजय देवगन की तमाम फिल्मों में एक्शन सीन कोरियोग्राफ किए थे.

बतौर एक्शन डायरेक्टर उनकी फिल्में- रोटी कपड़ा और मकान (1974), खून पसीना (1977), सत्यम शिवम सुंदरम (1978), मिस्टर नटवरलाल (1979), क्रांति (1981), हिम्मतवाला (1983), राम तेरी गंगा मैली (1985), मिस्टर इंडिया (1987), खून भरी मांग (1988), शहंशाह (1988), तमाचा (1988), इलाका (1989), त्रिदेव (1989), बेनाम बादशाह (1991), फूल और कांटे (1991), जिगर (1992), दिलवाले (1994), प्रेम (1995), हकीकत (1995), जान (1996), प्रेमग्रंथ (1996), सनम (1997), इतिहास (1997), महानता (1997), इश्क (1997), लाल बादशाह (1999) आदि हैं.

अजय देवगन की बतौर अभिनेता पहली फिल्म फूल और कांटे में उनका दो बाइकों पर खड़े होकर किया गया स्टंट वीरू के सबसे लोकप्रिय एक्शन दृश्यों में से एक है.

उन्होंने 1999 में आई फिल्म हिंदुस्तान की कसम का निर्देशन किया था. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, मनीषा कोईराला, सुष्मिता सेन आदि प्रमुख भूमिकाओं में थीं.

इसके अलावा 1981 में आई फिल्म क्रांति, 1979 में आई सौरभ और 1986 में आई फिल्म सिंहासन में वीरू देवगन ने अभिनय भी किया था.

उनके निधन पर एक्शन डायरेक्टर और अभिनेता विकी कौशल के पिता शाम कौशल ने ट्वीट कर कहा, ‘अलविदा वीरू देवगन जी. इस दुखद खबर के बारे में जानकारी मिली. एक्शन डायरेक्टर के रूप में वह समय से आगे की सोचते थे, एक बेहतरीन इंसान. आठ अगस्त 1980 को उनके आशीर्वाद से मैं स्टंटमैन बना. मेरे आवेदन पत्र पर उन्होंने हस्ताक्षर किए थे तब मैं स्टंटमैन बना. उन्होंने मुझे अपनी टीम का हिस्सा बनाया.’