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उत्तर प्रदेशः योगी सरकार ने गो-संरक्षण के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए

योगी आदित्यनाथ सरकार ने कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश गोरक्षा एवं विकास कोष नियम 2019 को मंजूरी दी. इस कोष का इस्तेमाल राज्य में अस्थाई गोशालाओं में चारा मुहैया कराने के लिए किया जाएगा.

(फोटो: पीटीआई)

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लखनऊः उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्त वर्ष 2019-2020 के बजट में एक विशेष कोष के साथ गोशाला निर्माण के लिए 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है. इस विशेष कोष का इस्तेमाल राज्य में अस्थाई गोशालाओं में चारा मुहैया कराने के लिए किया जाएगा.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश गोरक्षा एवं विकास कोष नियम 2019 को मंजूरी दी. इसके साथ ही विशेष कोष की स्थापना का रास्ता साफ हो गया. इस कोष में सार्वजनिक और निजी फंड के जरिए धनराशि इकट्ठा होगी.

राज्य मंत्रिमंडल ने गोरक्षा के मद में कोष का निर्माण करने के लिए भारत में बनने वाली विदेशी शराब एवं बियर के विनिर्माण और इसके बॉटलिंग पर विशेष उपकर (सेस) लगाने का प्रस्ताव 18 जनवरी को पारित कर दिया था. अब शराब और बियर की बोतल पर एक से तीन रुपये प्रति बोतल शुल्क लगेगा. शराब एवं बियर के विनिर्माण पर परमिट फीस के अलावा प्रति बोतल 0.50 से दो रुपये तक का सेस लगेगा.

इसके साथ ही होटलों और रेस्तरां में परोसे जाने वाले शराब और बीयर की प्रीमियम ब्रांड पर 10 रुपये और पांच रुपये का विशेष सेस लगेगा. सरकार ने गोसंरक्षण और विकास एजेंडा की फंडिंग के लिए दो फीसदी मंडी सेस भी लगाया था.

मौजूदा समय में राज्य में लगभग 6,000 सार्वजनिक और निजी गोशालाएं हैं, जिसमें 400,000 से अधिक मवेशी बंधे हैं जबकि अधिक से अधिक स्थाई और अस्थाई गोशलाओं के निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है.

राज्य में 5,076 स्थाई गोशालाएं हैं, जिसमें 307,000 से अधिक मवेशी हैं, यहां स्थानीय निकायों द्वारा संचालित 92 कान्हा गोशालाएं हैं, जिसमें लगभग 20,500 मवेशी हैं. इसके अलावा राज्य में 434 कान्जी हाउस (आवारा मवेशियों घर) हैं, जो 3,600 से अधिक मवेशियों को आश्रय दे रहे हैं. इस तरह सरकार द्वारा समर्थित मवेशी आश्रयगृहों में 3,30,000 से अधिक मवेशी हैं.

इसके अलावा सरकार ने कान्हा गोशालाओं और शहरी पशुगृहों के लिए अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए हैं. विदेशी शराब की बिक्री पर विशेष सेस के तहत जुटाए जाने वाले 165 करोड़ रुपये का इस्तेमाल भी आवारा पशुओं की देखरेख में होगा.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2019-2020 के बजट में गोशालाओं के रखरखाव के लिए 247.60 करोड़ रुपये आवंटित किए थे.