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साल 2016 में भी वायुसेना का एएन-32 विमान लापता हुआ था, जिसका आज तक कुछ पता न चल सका

तीन साल पहले 22 जुलाई 2016 को चेन्नई से पोर्ट-ब्लेयर जा रहा वायुसेना का एएन-32 विमान लापता हो गया था. इसमें 29 लोग सवार थे. तकरीबन दो महीने तक विमान के बारे में कुछ भी पता नहीं चल सका. इसके बाद वायुसेना ने तलाशी अभियान पर रोक लगा दी और विमान में सवार सभी लोगों को मृत मान लिया गया.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली/ईटानगर: भारतीय वायुसेना का एक एएन-32 विमान बीते सोमवार को लापता हो गया. उस विमान के लिए तलाशी अभियान अभी जारी है. इस विमान में 13 लोग सवार थे.

इस घटना के साथ ही 2016 में एक अन्य मालवाहक एएन-32 विमान के बंगाल की खाड़ी के ऊपर से लापता होने की दुखद यादें ताजा हो गईं.

रूस में बना यह विमान करीब तीन साल पहले 22 जुलाई 2016 में चेन्नई से अंडमान निकाबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट-ब्लेयर जा रहा था और उसमें चालक दल के छह सदस्यों सहित कुल 29 लोग सवार थे.

एंतोनोव एएन-32 दो इंजन वाला एक सैन्य परिवहन विमान है, जो बिना पुन: ईंधन भरे चार घंटे तक उड़ान भर सकता है.

इस विमान ने चेन्नई के तांबरम एयरफोर्स स्टेशन से सुबह साढ़े आठ बजे उड़ान भरी थी. उस समय रक्षा सूत्रों ने बताया था कि उड़ान भरने के 16 मिनट बाद तक ही विमान से संपर्क बना हुआ था. उसके बाद से संपर्क टूट गया.

साल 2016 में लापता विमान के तलाशी अभियान के क्षेत्रों का मानचित्र. (फोटो साभार: ट्विटर/इंडियन नेवी)

साल 2016 में लापता विमान के तलाशी अभियान के क्षेत्रों का मानचित्र. (फोटो साभार: ट्विटर/इंडियन नेवी)

विमान में सवार 29 लोगों में से छह क्रू मेंबर, वायुसेना के 11 अफसर, सेना के दो जवान नौसेना से एक जवान, भारतीय कोस्ट गार्ड्स से एक जवान और नेवल अर्मामेंट डिपो में काम करने वाले आठ असैन्य कर्मचारी शामिल थे. ये सभी आठ लोग आंध्र प्रदेश के विशाखापत्नम शहर से थे.

बताया जाता है कि इस विमान को खोजने के लिए भारत ने अब तक का सबसे बड़ा तलाशी अभियान चलाया था. इस अभियान में एक पनडुब्बी समेत तकरीबन 28 जहाज लगाए गए थे, इसके बाद भी न तो इस विमान को खोजा जा सका और न ही उसके मलबे का ही कहीं पता चल सका.

तकरीबन दो महीने बाद 15 सितंबर 2016 को विमान के लिए जारी तलाशी अभियान पर विराम लगा दिया गया.

भारतीय वायुसेना की ओर से इस नतीजे पर पहुंच गया कि विमान कहीं दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें सवार सभी लोग अब जीवित नहीं बचे हैं. वायुसेना के अनुसार, कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी ने निष्कर्ष दिया था कि इस बात की संभावना नहीं लगती कि विमान में सवार हुए लापता लोग दुर्घटना में जीवित बचे होंगे.

(फोटो साभार: इंडिया टुडे)

(फोटो साभार: इंडिया टुडे)

इसके बाद वायुसेना ने इस निष्कर्ष की जानकारी संबंधित परिवारों को पत्र भेजकर दे दी थी.

इस पत्र का शीर्षक ‘निधन का अनुमान’ दिया गया था.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद से सोमवार को जब संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि 2016 में लापता हुए विमान के मामले में कोई नई जानकारी नहीं है.

बहरहाल, पत्र में पीड़ित परिवारों से कहा गया था कि लापता विमान को लेकर कोर्ट ऑफ इंक्वायरी संचालित की गई थी, ताकि उपलब्ध सबूतों का परिक्षण और विमान में सवार लोगों के बचने की संभावना स्थापित की जा सके.

सुलुर (तमिलनाडु) स्थित एयरफोर्स स्टेशन की ओर से की गई जांच को वायुसेना ने यह कहते हुए समाप्त कर दिया कि इस बात की संभावना अब नहीं है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में सवार लोग बच गए होंगे.

पत्र में भारतीय वायुसेना ने पीड़ित परिवारों से यह भी आग्रह किया था कि वे ‘निधन के अनुमान वाले प्रमाण-पत्र’ (सर्टिफिकेट ऑफ प्रिज़म्प्शन ऑफ डेथ) पर हस्ताक्षर कर दें ताकि मुआवजे को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सके.

शोक संतप्त परिवार के लोगों को सांत्वना देने की कोशिश में भारतीय वायुसेना ने पत्र में कहा था कि उसने विमान और उसमें सवार लोगों का पता लगाने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

पत्र में वायुसेना की ओर से कहा गया था, ‘हमने सभी उपयुक्त विमानों से तकरीबन 201 तलाशी और बचाव अभियान चलाए थे. तकरीबन 2,17,800 स्क्वायर नॉटिकल मील के दायरे में हमारे विमानों ने लापता विमान की तलाश की.’

पत्र में यह भी कहा गया था कि यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों और अमेरिका के उपग्रहों से भी लापता विमान के बारे में कोई ठोस जानकारी प्राप्त करने में मदद नहीं मिल सकी.

मालूम हो कि रूस में निर्मित इस विमान ने नौ जुलाई 1976 को पहली बार उड़ान भरी थी. भारतीय वायुसेना के अलावा, अंगोला की वायुसेना, श्रीलंका की वायुसेना और उक्रेन की वायुसेना इस विमान का इस्तेमाल करती है.

भारतीय वायुसेना ने तकरीबन 125 एएन-32 विमान खरीदें थे, जिनमें से तकरीबन 10 विमान अभी भी सेवा में हैं. इन विमानों को समय-समय पर अपग्रेड भी किया जा चुका है.

एएन-32 विमान और हादसों का सिलसिला

मालूम हो कि यह पहला मामला नहीं है जब एएन-32 विमान लापता या दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो. इससे पहले भी ये विमान कई बार हादसों का शिकार हुआ है और कई अन्य घटनाओं में यह विमान लापता भी है, जिसका आज तक कुछ पता नहीं चल सका है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: विकिपीडिया)

(प्रतीकात्मक तस्वीर: विकिपीडिया)

25 मार्च 1986: भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान अरब सागर के ऊपर से गायब हो गया था. इस विमान ने भारत में डिलिवरी के लिए ओमान की राजधानी मस्कट होते हुए उड़ान भरी थी. इस विमान का भी कुछ पता नहीं चल सका. विमान में तीन क्रू सदस्य और चार अन्य लोग सवार थे.

15 जुलाई 1990: तमिलनाडु के तांबरम एयरफोर्स स्टेशन से तिरुअनंतपुरम के लिए उड़ा भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान हादसे का शिकार हो गया था. इसमें पांच लोग सवार थे.

07 मार्च 1999: भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान नई दिल्ली के नजदीक दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में 21 लोग मारे गए थे.

10 जून 2009: अरुणाचल प्रदेश के मेचुखा से उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले के एक गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस विमान में 13 लोग सवार थे, जो कि इस हादसे में मारे गए. हादसे के बाद भारत ने यूक्रेन से 400 मिलियन डॉलर का समझौता किया ताकि इस विमान को अपग्रेड किया जा सके.

22 जुलाई 2016: चेन्नई के तांबरम एयरफोर्स स्टेशन से अंडमान निकाबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट-ब्लेयर जा रहा एएन 32 विमान लापता हो गया था. उसमें चालक दल के छह सदस्यों सहित कुल 29 लोग सवार थे. इस विमान का आज तक कुछ पता नहीं चल सका. हादसे के तकरीबन दो महीने बाद भारतीय वायुसेना ने विमान का जांच और तलाशी अभियान बंद कर दिया और विमान में सवार लोगों को मृत मान लिया गया.

03 जून 2019: असम के जोरहाट एयरबेस से अरुणाचल प्रदेश के लिए उड़ा भारतीय वायुसेना का एएन-32 विमान लापता हो गया. विमान में 13 लोग सवार थे. इस विमान की खोज के लिए वायुसेना द्वारा अभी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

लापता एएन-32 विमान को तलाशने के अभियान में शामिल हुई नौसेना

भारतीय वायुसेना के रूस निर्मित एएन-32 विमान को तलाशने के अभियान में मंगलवार को भारतीय नौसेना के लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान को तैनात किया गया.

एएन-32 सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के पास लापता हो गया था. विमान ने असम के जोरहाट से चीन की सीमा के पास मेचुखा (अरुणाचल प्रदेश) के लिए उड़ान भरी थी.

सोमवार की दोपहर को उड़ान भरने के करीब 33 मिनट बाद विमान लापता हो गया, जिसमें 13 लोग सवार थे. नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने कहा कि पी8आई विमान ने तमिलनाडु के अराकोणम में आईएनएस रजाली से दोपहर करीब एक बजे उड़ान भरी और तलाश अभियान का हिस्सा बना.

अधिकारियों ने बताया कि अंतोनोव एएन-32 विमान का पता लगाने के लिए विमानों और हेलीकॉप्टरों के एक बेड़े को पहले ही लगाया गया है.

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के पर्वतीय इलाके में तलाश अभियान चलाने के लिए जवानों को भी तैनात किया गया है.

कैप्टन शर्मा ने कहा कि पी8आई विमान इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रा-रेड सेंसरों की मदद से तलाश अभियान में मदद करेगा.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘पी8आई विमान में बहुत शक्तिशाली सिंथेटिक अपर्चर रडार होता है जिसका इस्तेमाल लापता विमान को खोजने के लिए किया जाएगा.’

बोइंग द्वारा निर्मित पी8आई लंबी दूरी तक समुद्र में टोह रखने वाला विमान है और इस समय नौसेना के पास आठ ऐसे विमान हैं.

वायुसेना ने बीते सोमवार को बताया था कि विमान ने दोपहर 12:27 बजे जोरहाट से अरुणाचल प्रदेश के शि-योमी जिले में मेचुखा के लिए उड़ान भरी. भूतल पर नियंत्रण कर रहे अधिकारियों से विमान का आखिरी संपर्क दोपहर 1 बजे हुआ.

वायुसेना ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘दुर्घटना की संभावित जगह के बारे में कुछ ग्राउंड रिपोर्ट मिली हैं. हेलीकॉप्टरों को उस तरफ भेजा गया है. हालांकि, अब तक कोई मलबा नहीं दिखा है.’

वायुसेना ने कहा कि विमान में चालक दल के आठ सदस्य और पांच यात्री सवार थे. वायु सेना उसका पता लगाने के लिए भारतीय सेना और अन्य सरकारी एवं असैन्य एजेंसियों की मदद लेने पर भी विचार कर रही है.

वायुसेना ने लापता अंतोनोव एएन-32 विमान का पता लगाने के लिए दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों के साथ ही सी-130जे और एएन-32 विमानों को लगाया है, वहीं भारतीय सेना ने आधुनिक हल्के हेलीकॉप्टरों को लगाया है.

एएन-32 विमान रूस निर्मित विमान है और वायुसेना बड़ी संख्या में इसका परिचालन करती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)