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गुजरात: आरटीआई कार्यकर्ता पिता की हत्या के आरोपी की ज़मानत का विरोध कर रहे बेटे की भी हत्या

गुजरात के राजकोट ज़िले का मामला. साल 2018 में दलित आरटीआई कार्यकर्ता नानजीभाई सोंडर्वा की हत्या कर दी गई थी. हत्या का एक आरोपी अदालत के रोक लगाने के बाद भी कथित तौर पर राजकोट ज़िले में नज़र आया था. आरटीआई कार्यकर्ता के बेटे ने अदालत में इसकी शिकायत की थी.

आरटीआई कार्यकर्ता नानजी सोंडर्वा की पत्नी मेघाबाई.

आरटीआई कार्यकर्ता नानजी सोंडर्वा की पत्नी मेघाबाई.

राजकोट: गुजरात के एक दलित आरटीआई कार्यकर्ता नानजीभाई सोंडर्वा की हत्या के एक साल बाद उनके बेटे की भी हत्या कर दी गई. मामला गुजरात के राजकोट ज़िले का है.

एक साल पहले नानजीभाई की हत्या छह लोगों ने इस वजह से कर दी थी क्योंकि वह अपने गांव की सड़क बनाने में हुए खर्च का ब्योरा मांगने के साथ ही पारदर्शिता बरतने की मांग कर रहे थे. बीते 22 मई को नानजीभाई के 17 वर्षीय बेटे राजेश सोंडर्वा की भी हत्या कर दी गई.

राजेश विज्ञान के छात्र थे और 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे. 22 मई की सुबह वह अपने दोस्त मिलन परमार के साथ राजकोट शहर से कोटाड़ा संगनी तालुका के अपने गांव मानेकवाड़ा लौट रहे थे, जब उन पर हमला हुआ.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबित, गुजरात के सीआईडी क्राइम ने बताया कि राजेश अपने पिता की हत्या के आरोपियों में से एक की जमानत रद्द करवाने का प्रयास कर रहे थे. उन्होंने बताया कि राजेश अदालत में चल रहे पुराने मामलों में समझौता करने को तैयार नहीं था.

इस बीच गोंडल टाउन की एक स्थानीय अदालत ने बीते तीन जून को राजेश की हत्या के मामले में आठ में से चार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

इंडियन एक्सप्रेस से अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर जांच के बारे में जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया, ‘राजेश ने देखा कि उसके पिता की हत्या के आरोपियों में से एक गांव में खुलेआम घूम रहा है, जबकि उसे इस शर्त पर जमानत मिली थी कि वह जिले में प्रवेश नहीं करेगा. इसके बाद राजेश ने अदालत का रुख किया और इसी वजह से आरोपी ने राजेश की हत्या कर दी.’

मालूम हो कि साल 2018 में नौ मार्च को 35 वर्षीय नानजीभाई सोंडर्वा की हत्या उनके गांव मानेकवाड़ा में कर दी गई थी. उस वक्त नानजीभाई के पिता ने छह लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि नानजीभाई ने गांव में बन रही एक सड़क के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर आईटीआई दाखिल की थी.

मानेकवाड़ा गांव निवासी- महेंद्रसिंह भीखूभा जाडेजा, अजयसिंह जाडेजा, जितेंद्रसिंह चंदूभा जाडेजा, जितेंद्रसिंह निर्मलसिंह जाडेजा, नरेंद्रसिंह जाडेजा और जगभाई भारवाड़ के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि, बाद में गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महेंद्रसिंह जाडेजा कोटडा सांगानी तालुका पंचायत की मौजूदा कांग्रेस सदस्य बीनाबा जाडेजा के पति हैं और मानेकवाड़ा गांव के तत्कालीन सरपंच भीखूभा जाडेजा के बेटे हैं.

गांव के सोंडर्वा समुदाय के लोगों ने बताया कि जितेंद्रसिंह चंदूभा को इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह राजकोट जिले में प्रवेश नहीं करेगा. हालांकि, उसे गांव और गोंडल शहर में खुलेआम घूमते देखा गया था.

राजेश की हत्या मामले में पुलिस ने राजेश के छोटे भाई अजय की शिकायत पर हरदीपसिंह जाडेजा, महेंद्रसिंह और उनके बेटे दिव्यराजसिंह, यशपाल सिंह और उनके भाई दीपेंद्रसिंह, ध्रुवराजसिंह, अजयसिंह और हरदीपसिंह बहादुरसिंह गोहिल पर मामला दर्ज किया है.

इस मामले में अब तक हरदीपसिंह, दिव्यराजसिंह, यशपालसिंह, ध्रुवराजसिंह, महेंद्रसिंह, अजयसिंह, दीपेंद्रसिंह और हरदीपसिंह को गिरफ्तार कर लिया है. बता दें कि महेंद्रसिंह और अजयसिंह नानजी और उनके बेटे राजेश दोनों की हत्या के मामले में आरोपी हैं.

पुलिस का कहना है कि आरोपी दलितों को उनके साथ समझौता करने के लिए मजबूर कर रहे थे लेकिन वे सफल नहीं हुए.

अधिकारी ने बताया कि दलित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ अत्याचार के लगभग आधा दर्जन अन्य मामले दर्ज किए थे. इससे शत्रुता बढ़ गई, जिससे राजेश की हत्या हो गई.