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कर्नाटक: मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को गाली देने के आरोप में दो लोग गिरफ़्तार

सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए एक वीडियो में दो युवक कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और उनके परिवार को कथित तौर पर गाली देते हुए नज़र आए थे.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी (फोटो: कुमारस्वामी फेसबुक)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी (फोटो: कुमारस्वामी फेसबुक)

नई दिल्ली: एक वीडियो में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और उनके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने को लेकर कर्नाटक पुलिस ने शनिवार को दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

द न्यूज मिनट के अनुसार, यह वीडियो 23 मई को रिकॉर्ड किया गया था और व्हाट्सएप पर प्रसारित किया गया था. बता दें कि 23 मई को ही लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे और जनता दल (धर्मनिरपेक्ष) पार्टी ने सिर्फ एक सीट  पर जीत दर्ज की थी.

आरोप है कि 26 वर्षीय सिद्धाराजू और 28 वर्षीय चामा गौड़ा ने 32 सेकेंड के वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को गाली दी थी. दोनों युवक चन्नपटना के रहने वाले हैं.

दोनों युवकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 504 (शांतिभंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित करना) और 505 (2) (समुदाय के खिलाफ अपराध के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

बता दें कि शनिवार को जद (एस) के सोशल मीडिया सेल ने दो युवकों के खिलाफ एक शिकायत दर्ज करवाई थी और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

द हिंदू के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने कहा, जब हमने उन्हें पकड़ा और उनसे सवाल पूछा तब उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री के परिवार की राजनीति और लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी के खराब प्रदर्शन से परेशान थे.

बता दें कि, इससे पहले लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद जद (एस) प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं होने के बारे में खबर प्रकाशित करने पर एक कन्नड़ अखबार विश्ववाणी के संपादक विश्वेश्वर भट और उसके संपादकीय विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है.

इस मामले में शिकायत के अनुसार, अखबार ने कुमारस्वामी के बेटे निखिल के बारे में झूठी सूचना प्रकाशित की.

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भट्ट के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना की और एफआईआर को प्रेस को दबाने और अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटने वाला बताया.

इससे पहले अगस्त, 2018 में मंगलूरू के 24 साल के प्रशांत पूजारी को इंस्टाग्राम पर कुमारस्वामी के खिलाफ कथित तौर पर गाली देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, केंद्रीय क्राइम ब्रांच द्वारा की गई यह गिरफ्तारी स्वत: संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज करके की गई थी.

बता दें कि यह हालिया कार्रवाई अभिव्यक्ति की आजादी पर हुए उन हालिया हमले के बाद सामने आयी है जिनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘छवि’ धूमिल करने के आरोप में तीन पत्रकारों सहित कम से कम पांच लोगों को यूपी पुलिस द्वारा  गिरफ्तार किया जा चुका है.

बता दें कि स्वतंत्र पत्रकार कनौजिया को उनके ट्वीट के लिए गिरफ्तार किया गया है, जिसमें उन्होंने आदित्यनाथ की प्रेमिका होने का दावा करने वाली और उनके साथ अपना जीवन बिताने की इच्छा जताने वाली एक महिला का वीडियो साझा किया था.

कनौजिया को बीते शनिवार को दिल्ली स्थित उनके घर से यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें न्यायायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया को तत्काल जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस कानून के मुताबिक इस मामले में आगे बढ़े.

वहीं, इशिका सिंह और अनुज शुक्ला को उनके चैनल नेशन लाइव पर एक कार्यक्रम के लिए गिरफ्तार किया गया. इस कार्यक्रम में आदित्यनाथ की प्रेमिका होने का दावा करने वाली और उनके साथ अपना जीवन बिताने की इच्छा जताने वाली महिला का वीडियो प्रसारित किया गया था.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में रविवार की शाम दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस के ट्वीट के अनुसार, ‘एक व्यक्ति की ट्विटर पर शिकायत मिली थी जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया. उसे भाजपा नेता के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है.’

इन पत्रकारों की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए सोमवार को नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पत्रकारों ने शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट मार्च भी निकाला था. प्रोटेस्ट मार्च में पत्रकारों की गिरफ्तारी को मनमाना बताते हुए कहा गया कि उन्हें तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ लगाए गए आपराधिक मानहानि के मामले को भी वापस लिया जाए.

इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सहित देश के कई पत्रकार संगठनों ने गिरफ्तारी को ‘कानून का दुरुपयोग’ और प्रेस को डराने का प्रयास बताया.

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