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यूएन: पहली बार फिलिस्तीनी मानवाधिकार संगठन के ख़िलाफ़ भारत ने इज़रायल के पक्ष में किया वोट

यह पहली बार है जब भारत ने दशकों पुराने दो देशों वाले सिद्धांत से अपने क़दम पीछे खींच लिए हैं. दो देशों के सिद्धांत के तहत अब तक भारत इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों को अलग और स्वतंत्र देशों के रूप में देखता रहा है.

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: रॉयटर्स)

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: रॉयटर्स)

संयुक्त राष्ट्र: भारत ने अपने अब तक के रुख से हटते हुए संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद में इज़रायल के एक प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है. इजराइल के इस प्रस्ताव में फिलिस्तीन के एक गैर-सरकारी संगठन ‘शहीद’ को सलाहकार का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई गई थी.

यह पहली बार है जब भारत ने दशकों पुराने दो देशों वाले सिद्धांत से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. दो देशों के सिद्धांत के तहत अब तक भारत इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों को अलग और स्वतंत्र देशों के रूप में देखता रहा है.

भारत का पूर्व रुख पश्चिम एशिया में शांति लाने की कोशिश के तहत कायम था. लेकिन संयुक्त राष्ट्र में बदली हुई परिस्थितियों में भारत ने इज़रायल के पक्ष में वोटिंग करने का फैसला लिया.

फिलिस्तीन के एनजीओ ‘शहीद’ के विरोध में प्रस्ताव को लेकर इज़रायल ने कहा कि इस संगठन ने हमास के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं किया था. इसके बाद हुए मतदान में संगठन को संयुक्त राष्ट्र में पर्यवेक्षक का दर्जा देने का प्रस्ताव खारिज हो गया.

दिल्ली में तैनात इज़रायल की राजनयिक माया कडोश ने समर्थन में वोट डालने पर भारत का आभार जताया है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘इज़रायल के साथ खड़े रहने और आतंकी संगठन शहीद को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक का दर्जा देने की अपील को खारिज करने के लिए भारत का शुक्रिया. हम साथ मिलकर आतंकी संगठन के खिलाफ काम करते रहेंगे, जिन संगठनों का मकसद नुकसान पहुंचाना है.’

इज़रायल ने संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद में 6 जून को मसौदा प्रस्ताव ‘एल.15’ पेश किया. इस प्रस्ताव के पक्ष में रिकॉर्ड 28 मत पड़े जबकि 14 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया जबकि पांच देशों ने मत विभाजन में भाग नहीं लिया.

प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले देशों में ब्राजील, कनाडा, कोलंबिया, फ्रांस, जर्मनी, भारत, आयरलैंड, जापान, कोरिया, यूक्रेन, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं. मिस्र, पाकिस्तान, तुर्की, वेनेजुएला, यमन, ईरान और चीन सहित 14 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोटिंग की.

संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट पर मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार, परिषद ने एनजीओ के आवेदन को लौटाने का फैसला किया क्योंकि इस साल की शुरुआत में जब उसके विषय पर विचार किया जा रहा था, तब एनजीओ महत्वपूर्ण जानकारी पेश करने में विफल रहा. एनजीओ ने अपने आवेदन में संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक का दर्जा दिए जाने की अपील की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)