भारत

कैबिनेट ने तीन तलाक पर नए विधेयक को मंजूरी दी

पिछले महीने 16 वीं लोकसभा के भंग होने के बाद फरवरी, 2019 में तीन तलाक पर लाया गया पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था क्योंकि वह राज्यसभा में लंबित था. अब नया विधेयक सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में पेश किया जाएगा.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with Union Ministers Nitin Gadkari, Rajnath Singh, Amit Shah and others during the first cabinet meeting, at the Prime Minister’s Office, in South Block, New Delhi, May 31, 2019. (PTI Photo)(PTI5_31_2019_000248B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने ‘तीन तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा पर पाबंदी लगाने के लिए बुधवार को नए विधेयक को मंजूरी दी. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी.

यह विधेयक सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में पेश किया जाएगा और यह पूर्ववर्ती भाजपा नीत राजग सरकार द्वारा फरवरी में जारी एक अध्यादेश का स्थान लेगा.

पिछले महीने 16 वीं लोकसभा के भंग होने के बाद पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था क्योंकि यह राज्यसभा में लंबित था. दरअसल, लोकसभा में किसी विधेयक के पारित हो जाने और राज्यसभा में उसके लंबित रहने की स्थिति में निचले सदन (लोकसभा) के भंग होने पर वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है.

गौरतलब है कि मुस्लिम महिला(विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक को विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ा था. वह विधेयक तलाक ए बिद्दत की प्रथा को दंडनीय अपराध बनाता था.

जावड़ेकर ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक लैंगिक समानता पर आधारित है और यह सरकार के दर्शन – सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास – का हिस्सा है.

नया विधेयक अभी लागू अध्यादेश की प्रति (कॉपी) होगा और मंत्री ने आशा जताई कि राज्यसभा (जहां सरकार के पास जरूरी संख्या बल नहीं है) द्वारा इसे आमराय से पारित कर दिया जाएगा.

सरकार ने सितंबर 2018 और फरवरी 2019 में दो बार तीन तलाक अध्यादेश जारी किया था. इसका कारण यह है कि लोकसभा में इस विवादास्पद विधेयक के पारित होने के बाद वह राज्यसभा में लंबित रहा था.

मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अध्यादेश, 2019 के तहत तीन तलाक के तहत तलाक अवैध, अमान्य है और पति को इसके लिए तीन साल की कैद की सजा होगी.

सत्रहवीं लोकसभा के प्रथम सत्र में नयी सरकार की योजना तीन तलाक की प्रथा पर पाबंदी लगाने सहित 10 अध्यादेशों को कानून में तब्दील करने की है. दरअसल, इन अध्यादेशों को सत्र के शुरू होने के 45 दिनों के अंदर कानून में तब्दील करना है अन्यथा वे निष्प्रभावी हो जाएंगी.