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छत्तीसगढ़ः पारले-जी बिस्किट की फैक्ट्री से 26 बाल मज़दूर छुड़ाए गए

छत्तीसगढ़ के रायपुर में पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठनों की संयुक्त कार्रवाई में पारले-जी कारखाने में छापा मारा गया. ये बच्चे छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों झारखंड, उड़ीसा और मध्य प्रदेश के हैं.

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(फोटो साभार: http://www.parleproducts.com/brands/parle-g)

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की पुलिस ने एक बिस्किट कारखाने से 26 बाल मजदरों को मुक्त कराया है.

रायपुर जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग और सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई कर आमासिविनी गांव में पारले-जी बिस्किट की उत्पादन इकाई से  26 बाल मजदूरों को मुक्त कराया गया. इन बच्चों को किशोर गृह भेज दिया गया है.

ये बच्चे छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों झारखंड, उड़ीसा और मध्य प्रदेश के हैं. इनके परिजनों से भी संपर्क किया जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर कारखाने के मालिक के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है.जांच जारी है.

उन्होंने बताया कि बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के हीच है. हालांकि उनकी उम्र के बारे में सही जानकारी उनके जन्म प्रमाण पत्र से ही मिल सकेगी.

जिले के बाल संरक्षण अधिकारी नवनीत स्वर्णकार ने बताया कि 12 जून को विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस मनाया गया. इस दौरान रायपुर जिले के कलेक्टर के निर्देश पर विभिन्न स्थानों पर काम करने वाले बाल श्रमिकों को बचाने के लिए जिला कार्यबल का गठन किया गया था.

जिले में इस विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए 10 जून से 15 जून तक अभियान चलाया गया. इस अभियान के दौरान छह दिनों में कारखानों और ढाबों समेत अन्य स्थानों पर काम करने वाले 51 बच्चों को मुक्त कराया गया.

सभी बच्चों को काउंसिलिंग के लिए बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया गया है.

बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक संदीप कुमार राव ने बताया कि बच्चों से सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक काम कराया जाता था और इसके लिए उन्हें प्रतिमाह केवल पांच से सात हजार रुपये दिए जाते थे.

झारखंड चाइल्ड लाइन की टीम ने दस बाल श्रमिकों को मुक्त कराया

झारखंड के पाकुड़ चाइल्ड लाइन की टीम ने स्थानीय रेलवे स्टेशन परिसर से दस बाल मजदूरों को शनिवार को मुक्त कराया. इन बच्चों को दलाल दूसरे राज्यों में काम कराने के लिए ले जा रहे थे.

मुक्त कराए गए सभी बच्चे जिले के विभिन्न प्रखंडों के हैं जिनकी उम्र 12 से 16 वर्ष के बीच है.

बाल संरक्षण पदाधिकारी राजेश कुमार मंडल ने बताया कि मुक्त कराए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष ले जाया गया. बच्चों की काउंसलिंग के बाद उन्हें उनके परिजन को सौंप दिया गया.

उन्होंने बच्चों के परिजन से कहा कि वे इन बच्चों को कमाने के लिए भेजने की बजाय अपने-अपने प्रखंड कार्यालय ले जाकर बाल कल्याण के लिए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका भविष्य सुनिश्चित करें.

चाइल्ड लाइन की मोनिका सिंह ने बताया कि छुड़ाए गए बच्चों में से एक पाकुड़ प्रखंड का, हिरणपुर के चार और महेशपुर प्रखंड के पांच बच्चे शामिल हैं.

मालूम हो कि काउंसलिंग के दौरान इन बच्चों के परिजन ने बताया कि उन्होंने मजबूरी में अपने बच्चों को कमाने के लिए न्यू जलपाईगुड़ी, कोलकाता आदि जगहों के लिए भेजा था.