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भारतीय महिला रग्बी टीम में पहला अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबला जीतकर इतिहास रचा

बीते 22 जून को फिलिपींस की राजधानी मनीला में हुए एशिया वुमेंस डिवीज़न 1 रग्बी 15एस चैंपियनशिप के मुकाबले में भारतीय महिला रग्बी टीम ने उच्च वरियता प्राप्त सिंगापुर की टीम को 21-19 के स्कोर से मात देकर यह जीत हासिल की.

जीत के बाद भारतीय महिला रग्बी टीम. (फोटो साभार: ट्विटर/रग्बी इंडिया)

जीत के बाद भारतीय महिला रग्बी टीम. (फोटो साभार: ट्विटर/रग्बी इंडिया)

नई दिल्ली: इस समय जब पूरा देश क्रिकेट वर्ल्ड कप के खुमार में डूबा हुआ है, ठीक उसी वक्त में भारतीय महिला रग्बी टीम ने इतिहास रचते हुए अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मुकाबला जीतकर इतिहास रच दिया है.

हालांकि इंग्लैंड में चल रहे क्रिकेट वर्ल्ड कप के शोर के बीच मीडिया में यह खबर कहीं खोकर रह गई.

बहरहाल, बीते 22 जून को फिलिपींस की राजधानी मनीला में हुए ‘एशिया वुमेंस डिवीजन 1 रग्बी 15एस चैंपियनशिप’ के मुकाबले में भारतीय महिला रग्बी टीम ने उच्च वरियता प्राप्त सिंगापुर की टीम को 21-19 के स्कोर से मात देकर यह जीत हासिल की.

इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने अपने लिए कांस्य पदक सुरक्षित कर लिया है. मालूम हो कि भारतीय महिला रग्बी टीम ने यह जीत अपने गठन के तकरीबन एक साल में दर्ज किया है.

इस टूर्नामेंट में चीन ने मेजबान फिलिपींस की टीम के खिलाफ 68-0 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया है.

एशिया वुमेंस डिवीजन 1 रग्बी 15एस चैंपियनशिप में चार टीमों ने भाग लिया था. 15एस फॉरमेट रग्बी का परंपरागत फॉरमेट है, यह 7एस फॉरमेट से अलग होता है.

इस प्रतियोगिता में बिहार की स्वीटी कुमारी फॉर्म में नजर आईं. स्वीटी कुमारी पांच साल पहले रग्बी का नाम भी नहीं जानती थीं, उन्होंने अपनी टीम को जीत की राह पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 15 सदस्यों की टीम में से सात खिलाड़ी ओडिशा से हैं.

इस जीत पर रग्बी इंडिया ने ट्वीट कर कहा है, ‘हमारी महिला रग्बी टीम ने इतिहास रच दिया. अपनी पहली टेस्ट जीत में टीम इंडिया ने शीर्ष वरियता प्राप्त सिंगापुर को मात दी.’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय महिला रग्बी टीम की कप्तान वाहबिज़ भरूचा हैं. वह पिछले एक दशक से रग्बी खेल रही हैं. रग्बी खिलाड़ी होने के अलावा वह एक फीजियोथेरेपिस्ट भी हैं.

इस टीम की सबसे छोटी खिलाड़ी 18 साल की हैं और सबसे बड़ी 32 साल की संगीता बेरा हैं. ओडिशा की संगीता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बच्चों को घर पर ही छोड़ दिया है.

टीम की एक खिलाड़ी शुभलक्ष्मी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत करते हुए कहती हैं, ‘जब भी मैं किसी टूर्नामेंट के लिए बाहर जाती हूं तो मेरा बेटा बीमार हो जाता है. इस बार 15एस रग्बी फॉरमेट के लिए मेरा चयन हुआ तो मेरे बेटे को बुखार हो गया था. मैं तनाव में रहती हूं और घर भी नहीं जा सकती. ऐसे क्षणों में मेरा परिवार मेरा भरपूर सहयोग करता है.’

शुभलक्ष्मी की तरह पश्चिम बंगाल की संगीता कहती हैं, ‘परिवार, बच्चे, नौकरी और खेल में तालमेल बिठा पाना बहुत मुश्किल काम होता है. हम लोग ही नहीं हमारे बच्चे भी बलिदान देते हैं, ताकि हम खेल सकें. उनको अच्छे से मां का प्यार नहीं मिल पाता.’

कप्तान वाहबिज़ कहती हैं, ‘पिछले साल हम एशियन गेम्स में भाग लेने वाले थे, लेकिन प्रतियोगिता शुरू होने के एक या डेढ़ महीने पहले पता चला कि हमारी टीम भाग नहीं ले सकती क्योंकि हमारी रैंकिंग ठीक नहीं है.’

26 वर्षीय वाहबिज़ कहती हैं, ‘यह तब हुआ जब सरकार द्वारा हमें दो महीने के कैंप की अनुमति मिल गई थी. एक हफ्ते कैंप करने के बाद हमें पता चला कि हम एशियन गेम्स में भाग नहीं ले पाएंगे. प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुछ खिलाड़ियों ने अपनी नौकरी से छुट्टी ली थी, कुछ खिलाड़ियों ने नौकरी छोड़ दी थी. तब पता चला कि हम न तो घर के रहे और न घाट के.’